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Agra News: बंदरों के लिए नहीं बना रेस्क्यू सेंटर, न हो सकी नसबंदी

Fri, 23 Jan 2026 03:18 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 23 Jan 2026 03:18 AM IST
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Rescue center for monkeys was not built, sterilization could not be done
पिंजरा लगाकर पकड़े गए बंदर। अमर उजाला
आगरा। बंदरों के झपट्टा मारने और डर के कारण छत से नीचे गिरकर मौत के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बीते चार माह में यह पांचवीं घटना है, जब बंदरों के कारण छत से गिरने से मौत हुई है। बंदरों के लिए पांच एकड़ जमीन पर साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से रेस्क्यू सेंटर बनाया जाना था लेकिन तीन साल में वह भी नहीं बन पाया। जिले में 60 हजार से ज्यादा बंदर घूम रहे हैं, जिनमें से केवल 13,827 को ही एक साल में पकड़ा जा सका है। इनमें से केवल 10,303 की ही नसबंदी नगर निगम कर सका है।
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प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव पी गुरु प्रसाद ने 10 जनवरी को आदेश जारी किया है, जिसमें बंदरों को नगर निगम की जगह अब वन विभाग की जिम्मेदारी बताया गया है। दिल्ली का हवाला देने के साथ कहा गया है कि वन्य जीव अधिनियम के शेड्यूल-2 में बंदर को फिर से शामिल किया गया है। ऐसे में अब वन विभाग ही बंदरों को पकड़ने की योजना बनाएगा। एक माह में उन्हें अपनी योजना बनाकर लखनऊ भेजनी होगी।
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ये हादसे हुए
- नवंबर में 9 साल के यशु की चक्कीपाट में बंदरों के झपट्टे में छत से गिरने से मौत हुई।
- सीकरी में 50 साल के विजय सिंह की शादी समारोह में बंदरों से बचने में गिरने से मौत हुई।
- 36 साल की रेखा पुंडीर की ट्रांसयमुना में बंदर भगाते समय करंट लगने से मौत हुई
- चंद्रावती चंदा वाली गली में छत पर कपड़े सुखाने के दौरान महिला की बंदरों के डर से छत से गिरकर मौत हुई।
- रुनकता में एक बंदर ने मां की गोद से 12 दिन के मासूम को छीनकर फेंक दिया। उसकी मौत हो गई।
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