{"_id":"6a94eb3dbf0cb2565202b4ee","slug":"relationship-breakdown-social-media-suspicion-and-stubbornness-tear-families-apart-2026-08-31","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"रिश्तों में 'रील' का जहर: शादी के बाद पति-पत्नी में दरार आने की मुख्य वजह, हर माह 500 केस; टूट रहीं शादियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रिश्तों में 'रील' का जहर: शादी के बाद पति-पत्नी में दरार आने की मुख्य वजह, हर माह 500 केस; टूट रहीं शादियां
Mon, 31 Aug 2026 08:17 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 31 Aug 2026 08:17 AM IST
सार
परिवार परामर्श केंद्र में हर महीने करीब 500 मामले पहुंच रहे हैं, जिनमें सोशल मीडिया, रील, शक और जिद रिश्तों में दरार की बड़ी वजह बन रहे हैं। काउंसलरों की कोशिशों के बावजूद करीब 40 प्रतिशत मामलों में समझौता नहीं हो पा रहा और विवाद कानूनी कार्रवाई तक पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
महिला और युवक सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : AI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सोशल मीडिया की लत, रील बनाने का जुनून और शक की बीमारी अब परिवारों को तोड़ने लगी है। परिवार परामर्श केंद्र में हर महीने औसतन 500 मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें से लगभग 40% मामलों का अंत बिना किसी समझौते के हो रहा है। जिद, घमंड और अहंकार के कारण जोड़े कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने को मजबूर हैं। काउंसलरों की तमाम कोशिशों के बावजूद कुछ ही रिश्ते बच पा रहे हैं।
विज्ञापन
केस 1:
अछनेरा ब्लॉक निवासी एक पिता ने अपनी बेटी की प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि शादी के बाद से सास बहू की कीमती साड़ियां खुद पहनती थी और उसे फटेहाल कपड़े देती थी। विरोध करने पर बहू की बेरहमी से पिटाई की गई, जिससे वह अवसाद में चली गई। सुनवाई के दौरान ससुराल वालों ने कीमती साड़ियां गायब कर दीं और खराब कपड़े लौटाए, जिसके कारण समझौता टूट गया।
अछनेरा ब्लॉक निवासी एक पिता ने अपनी बेटी की प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि शादी के बाद से सास बहू की कीमती साड़ियां खुद पहनती थी और उसे फटेहाल कपड़े देती थी। विरोध करने पर बहू की बेरहमी से पिटाई की गई, जिससे वह अवसाद में चली गई। सुनवाई के दौरान ससुराल वालों ने कीमती साड़ियां गायब कर दीं और खराब कपड़े लौटाए, जिसके कारण समझौता टूट गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
केस 2:
थाना सदर क्षेत्र की एक युवती की 11 साल पहले शादी हुई थी और उनके दो बच्चे हैं। पीड़िता का आरोप है कि पति उस पर जीजा से संबंध होने का झूठा शक जताकर मारपीट करता है। माता-पिता न होने के कारण वह अपनी बहन के घर रहने को मजबूर है। पहली सुनवाई में पीड़िता ने साथ रहने से मना कर दिया, जिसके बाद काउंसलर ने दोनों पक्षों को दो महीने का समय दिया है।
थाना सदर क्षेत्र की एक युवती की 11 साल पहले शादी हुई थी और उनके दो बच्चे हैं। पीड़िता का आरोप है कि पति उस पर जीजा से संबंध होने का झूठा शक जताकर मारपीट करता है। माता-पिता न होने के कारण वह अपनी बहन के घर रहने को मजबूर है। पहली सुनवाई में पीड़िता ने साथ रहने से मना कर दिया, जिसके बाद काउंसलर ने दोनों पक्षों को दो महीने का समय दिया है।
केस 3:
बाह तहसील के एक युवक ने बताया कि 2017 में शादी के बाद से उसकी पत्नी अलग रह रही है। चार भाइयों में सबसे छोटा होने के कारण बुजुर्ग व दुर्घटनाग्रस्त माता-पिता की देखभाल उसी के जिम्मे है। युवक गुड़गांव में मजदूरी करता है, लेकिन पत्नी माता-पिता को छोड़कर साथ रहने पर अड़ी है। रविवार को पति पांच घंटे इंतजार करता रहा, लेकिन पत्नी के न पहुंचने पर फैसला टल गया।
बाह तहसील के एक युवक ने बताया कि 2017 में शादी के बाद से उसकी पत्नी अलग रह रही है। चार भाइयों में सबसे छोटा होने के कारण बुजुर्ग व दुर्घटनाग्रस्त माता-पिता की देखभाल उसी के जिम्मे है। युवक गुड़गांव में मजदूरी करता है, लेकिन पत्नी माता-पिता को छोड़कर साथ रहने पर अड़ी है। रविवार को पति पांच घंटे इंतजार करता रहा, लेकिन पत्नी के न पहुंचने पर फैसला टल गया।
महिला अपराध एडीसीपी पूनम सिरोही ने बताया कि केंद्र में आने वाले हर मामले को गंभीरता से सुना जाता है और काउंसलरों द्वारा पूरा प्रयास किया जाता है कि दंपतियों के बीच सुलह हो सके। जिन मामलों में समझौते की गुंजाइश नहीं बचती, उनमें विधिक कार्रवाई होती है।