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बंदिया को फरमाइशी गीत सुनाएगा ‘जेल रेडियों’
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कासगंज। रेडियो जॉकी की तरह अब बंदी अपने फरमाइशी गीतों कर आनंद ले सकेंगे। बंदी , जेल समाचारों में दिन भर के क्रिया कलापों, मुख्य घटनाओं एवं प्रेरक प्रसंगों को सुन सकेंगे। यह सब होगा जेल का अपना रेडियों स्टेशन के माध्यम से। इस पर जेल प्रशासन ने अमल भी शुरू कर दिया है।
नेशनल एवार्ड विजेता सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप रघुनंदन 12 वषों से जेल सुधार के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे जनपद कारागार कासगंज के बंदियों के बीच स्वास्थ्य, मनोरंजन, मानसिक परिवर्तन और उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए ‘जेल रेडियो’ की अवधारणा लेकर आए। प्रभारी कारागार अधीक्षक आरके सिंह के साथ मिलकर उन्होंने प्लानिंग तैयार की। इस प्लानिंग पर अमल शुरू हो गया है। जिला कारागार में बाकायदा स्टूडियो तैयार किया जा रहा है। जहां से इस पूरे रेडियो स्टेशन का नियंत्रण एवं प्रसारण होगा। पूरा कारागार एक आधुनिक साउंड तकनीक के तहत आपस में जुड़ा होगा और जेल स्टूडियो से प्रसारित होने वाले गीत संगीत के मनोरंजक कार्यक्रम सभी बैरिक के बंदी सुन सकेंगे। रेडियो जॉकी के लिए पांच बंदियों का चयन किया गया है। जो प्रत्येक सुबह हर बैरिक के बंदियों से उनके पसंदीदा कार्यक्रमों की फरमाइशों को एकत्रित करेंगे और फिर दोपहर बाद उनका प्रसारण होगा। ‘जेल रेडियों’ की अवधि शुरूआत में एक घंटे रहेगी और इसके लिए दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक का समय तय किया गया है। बाद में बंदियों की रुचि और जेल प्रशासन की आवश्यकतानुसार इस समयावधि को बढ़ाया जाएगा। प्रभारी कारागार अधीक्षक का कहना है कि जेल रेडियो की कार्यक्रम शुरू होने के बाद से बंदियों में सुधार आएगा। 31 जुलाई को इसका उद्घाटन होगा।
फोटो सहित
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नेशनल एवार्ड विजेता सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप रघुनंदन 12 वषों से जेल सुधार के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे जनपद कारागार कासगंज के बंदियों के बीच स्वास्थ्य, मनोरंजन, मानसिक परिवर्तन और उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए ‘जेल रेडियो’ की अवधारणा लेकर आए। प्रभारी कारागार अधीक्षक आरके सिंह के साथ मिलकर उन्होंने प्लानिंग तैयार की। इस प्लानिंग पर अमल शुरू हो गया है। जिला कारागार में बाकायदा स्टूडियो तैयार किया जा रहा है। जहां से इस पूरे रेडियो स्टेशन का नियंत्रण एवं प्रसारण होगा। पूरा कारागार एक आधुनिक साउंड तकनीक के तहत आपस में जुड़ा होगा और जेल स्टूडियो से प्रसारित होने वाले गीत संगीत के मनोरंजक कार्यक्रम सभी बैरिक के बंदी सुन सकेंगे। रेडियो जॉकी के लिए पांच बंदियों का चयन किया गया है। जो प्रत्येक सुबह हर बैरिक के बंदियों से उनके पसंदीदा कार्यक्रमों की फरमाइशों को एकत्रित करेंगे और फिर दोपहर बाद उनका प्रसारण होगा। ‘जेल रेडियों’ की अवधि शुरूआत में एक घंटे रहेगी और इसके लिए दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक का समय तय किया गया है। बाद में बंदियों की रुचि और जेल प्रशासन की आवश्यकतानुसार इस समयावधि को बढ़ाया जाएगा। प्रभारी कारागार अधीक्षक का कहना है कि जेल रेडियो की कार्यक्रम शुरू होने के बाद से बंदियों में सुधार आएगा। 31 जुलाई को इसका उद्घाटन होगा।
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