फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Reached Ayodhya hiding in a truck carrying potatoes

Agra News: आलू ले जा रहे ट्रक में छिपकर पहुंचे थे अयोध्या

Mon, 08 Jan 2024 10:31 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jan 2024 10:31 PM IST
विज्ञापन
Reached Ayodhya hiding in a truck carrying potatoes
आलू ले जा रहे ट्रक में छिपकर पहुंचे थे अयोध्याबोले लोग, कारसेवा के बाद अब मिल रही बेहद खुशी
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी

कुसमरा (मैनपुरी)। अयोध्या में 22 जनवरी को हो रही प्राण प्रतिष्ठा को लेकर लोग बेहद खुश हैं। सबसे अधिक उन परिवारों को खुशी है जिनके सदस्यों ने राम मंदिर के आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लिया था। कुसमरा के कई रामभक्तों ने छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में हुई कार सेवा में भाग लिया था।

वर्ष 1990 में रामजन्म भूमि आंदोलन के समय पुलिस आरएसएस व भाजपा पदाधिकारियों को गिरफ्तार कर रही थी। उसी समय नगर के करीब 12 रामभक्त अयोध्या में कारसेवा के लिए पुलिस को चकमा देकर आलू ले जा रहे ट्रक में छिपकर अयोध्या के लिए रवाना हुए थे। घर के बुजुर्गों ने अपने बेटों को माथे पर तिलक लगाकर अयोध्या के लिए रवाना किया था। कारसेवकों में नगर निवासी महेश मिश्रा सह तहसील कार्यवाह के नेतृत्व में डॉ. प्रकाशचंद्र गुप्ता, महेश मिश्रा, सुशील शुक्ला, विनोद शुक्ला, सुधीर दीक्षित, जयंत दुबे, नीरज दुबे, नवीन मिश्रा, प्रवेश शुक्ला, किशोर दुबे, उमाशंकर गुप्ता मंदिर आंदोलन के लिए कानपुर पहुंचे थे।
विज्ञापन


कारसेवा में भाग लेने वाले डॉ. प्रकाशचंद्र गुप्ता, महेश मिश्रा, विनोद शुक्ला, उमाशंकर गुप्ता की मृत्यु हो चुकी है। जो लोग जीवित हैं उन्हें राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर बेहद खुशी है। कारसेवा में शामिल रहे प्रवेश शुक्ला बताते हैं कि तत्कालीन थानाध्यक्ष श्यामसुंदर यादव को भनक लगी कि कुसमरा के कुछ लोग चोरी छिपे कारसेवा को जा रहे हैं। पुलिस ने उनके घरों पर दबिश दी लेकिन तब तक कारसेवक अयोध्या के लिए निकल चुके थे। पुलिस ने परिजन को परेशान भी किया लेकिन पुलिस को कुछ भी जानकारी नहीं मिली। आज तक आस लगाए थे कि सपना कब पूरा होगा। जब मंदिर निर्माण हो चुका है और 22 जनवरी को मूर्ति प्रतिष्ठा होने जा रही है तो कारसेवक बेहद खुश हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन




संगठन की तरफ से अयोध्या जाने का आदेश मिला था। परिजन भयभीत थे लेकिन राम मंदिर का सपना जेहन में गूंज रहा था। मंदिर को बनवाने के लिए अपने जीवन को प्रभु राम के प्रति समर्पित कर दिया था।

सुधीर दीक्षित, कारसवेक


वर्ष 1990 में प्रदेश में सपा की सरकार थी। मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने लोगों को रोकने के लिए सीमाओं पर बैरियर लगवाए थे। जवानी में राम मंदिर निर्माण व ढांचे को गिराना ही हम सबका लक्ष्य था।

सुशील शुक्ल, कारसेवक



कारसेवकों का जत्था कानपुर से मनिकापुर गोंडा पहुंचा था। पुलिस का पहरा होने के कारण जंगलों में पंद्रह दिन गुजारे थे। आसपास के गांवों के लोग भोजन देते थे। भोजन नहीं मिलने पर भूखे पेट रात गुजारते थे।


नवीन मिश्रा, कारसेवक

कारसेवकों का जत्था 30 अक्तूबर 1990 को सरयू नदी के किनारे पहुंचा था। देव उत्थान एकादशी के दिन ढांचे को गिराकर उस पर भगवा फहराया था। पुलिस की फायरिंग शुरू होते ही सुरक्षित स्थान को निकल गए थे।

नीरज दुबे, कारसेवक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed