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कीरत के अंगना प्रकटी रसिकन की सरताज

Tue, 01 Dec 2015 01:29 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा Updated Tue, 01 Dec 2015 01:29 AM IST
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rasotsav
मंगल कीरत के भये, सब मिल बधायौ गाइए... कीरत के अंगना प्रकटी रसिकन की सरताज... राधा रानी का जन्म होते ही पंडाल में बैठे भक्त पुलक उठे। वातावरण राधामय हो गया। किशोरी की जयजयकार होने लगी। नवीन गल्ला मंडी, फीरोजाबाद रोड में आयोजित रासोत्सव के प्रथम दिन राधा जन्म की लीला हुई।
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श्रीश्यामा श्याम भागवत आयोजन समिति द्वारा रासोत्सव कराया जा रहा है। रासाचार्य पद्मश्री हरगोविंद महाराज के निर्देशन में दिन में चैतन्य महाप्रभु लीला व शाम को कृष्ण रासलीला हो रही है।
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सोमवार शाम कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। सर्वप्रथम भक्तों को रास के दर्शन हुए। मेरी सुधि लीजौ श्रीवृषभानु दुलारी... रास बिहारी, राधा रानी और सखियों ने रास किया। मंच पर आसीन मुकेश शर्मा ने अपनी मधुर वाणी से रासलीला का आनंद बढ़ा दिया। उसके बाद उन्होंने राधा जन्म की भूमिका बताई। कहा कि महाराज स्वच्छंद और महारानी कलावती को संतान सुख नहीं था। इसके लिए उन्होंने घोर वन में जाकर ब्रह्मा की तपस्या की।
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इससे प्रसन्न होकर सृष्टि के रचैया ने दर्शन दिए। बोले, अपनी अभिलाषा प्रकट करो। स्वच्छंद ने कहा कि हम दोनों संतान के लिए दुखी हैं। आप हमें संतान सुख का वरदान दो। ब्रह्मा ने कहा कि तुम्हारा पूर्व जन्म का कोई योग ही नहीं है, जिससे संतान प्राप्त हो। अगले जन्म में तुम्हें संतान प्राप्त होगी।
तब कलावती ने कहा, हमै एक पुत्री की इच्छा है। जनकसुता जग जानकी या शिवा पार्वती सोय, मेरी हू अभिलाषा है तिन सम कन्या होय... कलावती के ये वचन सुन ब्रह्मा बोले, इस कठिन वरदान को पूरा करने की सामर्थ्य मुझमें नहीं है। तुम्हें मार्ग दिखा सकता हूं। गऊ लोक मेें किशोरी विहार करती हैं।

तुम राधा मंत्र का जाप करो। सर्वेश्वरी राधिका तुम्हें पुत्री के रूप में प्राप्त होंगी। अगले जन्म में तुम्हारा नाम कीरत होगा और स्वच्छंद का वृषभानु। तुम दोनों ब्रज में जन्म लोगे। स्वच्छंद और कलावती ने राधा रानी की आराधना की। किशोरी ने उनकी अभिलाषा पूर्ण की। अगले जन्म में नवीन देह धारण कर वृषभानु और कीरत के रूप में बरसाना में आए। तब उनके अंगना में किशोरी का जन्म हुआ। कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष हरीचंद गर्ग, उपाध्यक्ष रविकांत गुप्ता, सतीश शाह, राजीव गुप्ता, अनीश अग्रवाल उपस्थित रहे।

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