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UP: बाह में मिला हिमालय का राजा कहा जाना वाला  हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध, वन विभाग ने किया रेस्क्यू

Fri, 25 Jul 2025 12:28 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 25 Jul 2025 12:28 PM IST
सार

हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध स्वस्थ है, लेकिन वो उड़ नहीं पा रहा है। इस वजह से उसे देखरेख में रखा गया है। 

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Rare Himalayan Griffon Vulture found in Bah rescued by Forest Department
हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध

विस्तार

आईयूसीएन (अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ) की रेड बुक में शामिल हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध बाह के झाड़े की गढ़ी गांव में मिला है। उड़ने में असमर्थ गिद्ध को रेस्क्यू कर वन विभाग की टीम ने होलीपुरा की पौधशाला में रखा है, उसकी देखभाल की जा रही है।
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बाह के रेंजर अमित कुमार ने बताया कि तीन दिन पहले झाड़े की गढ़ी गांव में गिद्ध के होने की जानकारी मिली थी। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। गिद्ध उड़ नहीं पा रहा था। उसको होलीपुरा की पौधशाला में लाया गया। परीक्षण में गिद्ध स्वस्थ था। पशु चिकित्सकों की सलाह पर उसके खानपान की व्यवस्था और देखरेख की जा रही है। सेहत में सुधार होने पर यमुना के संरक्षित जंगल में छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि रेस्क्यू किया गया गिद्ध हिमालयन ग्रिफॉन वल्चर प्रजाति का है। यह प्रजाति आईयूसीएन की रेड बुक में शामिल है। 
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हिमालय का राजा: नहीं करते शिकार, खाते हैं मरे हुए जानवरों का मांस
रेंजर के मुताबिक हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध अफगानिस्तान के काबुल से लेकर उत्तर पूर्वी भारत से सटे भूटान तक हिमालय के ऊंचे और निर्जन पहाड़ों में पाए जाते हैं। इसलिए इनको हिमालय का राजा कहा जाता है। हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध का सिर सफेद, गर्दन हल्के पीले रंग की और पंख बहुत चौड़े होते हैं। पंखों की चौड़ाई 5-6 फीट तक हो सकती है, जबकि इनका वजन 9 से 12 किलोग्राम तक हो सकता है। ये एक दिन में डेढ़ से दो किलोग्राम तक मांस खा सकते हैं। हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध कभी भी जिंदा जीव का शिकार नहीं करता है। ये दूसरे जंतुओ के शिकार करने या किसी अन्य कारण से मरे जानवरों के अवशेष को खाते हैं। इसलिए इन्हें प्रकृति का ''सफाईकर्मी'' कहा जाता है।
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