स्मृति शेष: सबसे कम उम्र की महिला क्रांतिकारी थीं रानी सरोज गौरिहार, 13 साल की उम्र गईं थीं जेल
स्वतंत्रता सेनानी रानी सरोज गौरिहार का रविवार तड़के हृदय गति रुकने से निधन हो गया। वे 92 वर्ष कीं थीं। ताजगंज स्थित विद्युत शवदाह गृह में राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश की आजादी के लिए लड़ते हुए रानी सरोज गौरिहार जब जेल गईं तो उनकी उम्र महज 12-13 साल थी। वे सबसे कम उम्र की महिला क्रांतिकारी थीं और इनका काम आजादी के मतवालों के बीच गोपनीय सूचनाओं का आदान-प्रदान था। आगरा में विदेशी वस्त्रों के सफल बहिष्कार को देख पंडित मोतीलाल नेहरू ने भी इनकी सराहना की थी। रविवार को स्वतंत्रता सेनानी रानी सरोज गौरिहार के निधन की खबर मिली तो ताजनगरी में शोक की लहर दौड़ गई।
सरोज गौरिहार की भाभी किरन शर्मा ने बताया कि सरोज गौरिहार का जन्म चार नवंबर 1929 को पंडित जगन प्रसाद रावत और सत्यवती रावत के घर जन्म हुआ। इनके माता-पिता दोनों स्वतंत्रता सेनानी थे। अगस्त क्रांति के आह्वान पर सीनियर बालिका पाठशाला को बंद करवाया गया था। बात 1942 की है, ये कक्षा सात की छात्रा थीं और गर्ल्स गाइड थीं।
नहीं दी थी अंग्रेजी ध्वज को सलामी
उन्होंने यूनियन जैक के अंग्रेजी ध्वज को अपनी सहपाठियों के साथ सलामी देने से मना कर दिया। वह क्रांति दूत के तौर पर समाचार, संदेश और पत्रों का आदान-प्रदान करने लगीं। इससे क्रांतिकारियों को महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने लगीं। अंग्रेजों के विरोध में जुलूस में भी भाग लेने लगीं। विलायती कपड़ों के विरोध में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और लोगों को खादी पहनने के लिए प्रचार किया।