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रामसर साइट में ऐसे शामिल हुआ मैनपुरी का समान पक्षी विहार
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29एमएनपी-33-समान पक्षी विहार की झील
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी/किशनी। किशनी के समान पक्षी विहार को रामसर साइट में शामिल कर लिया गया। इससे अब पक्षी विहार के विकास की उम्मीद जगी है। नम भूमि और पक्षियों के प्रवास स्थलों के संरक्षण के लिए रामसर संधि के तहत वैश्विक स्तर पर काम किया जा रहा है। समान पक्षी विहार को रामसर साइट में स्थान मिलने से अब संरक्षण के प्रयास हो जाएंगे।
526 हेक्टेयर में फैली समान पक्षी विहार की झील प्रदेश की सबसे बड़ी झील है। संरक्षण के अभाव में अब तक ये गुमनामी के अंधेरों में थी। विदेशी पक्षियों के प्रवास से भी समान खूब गुलजार रहता है। हाल ही में जिला प्रशासन की पहल के बाद समान पक्षी विहार के विकास की उम्मीद जगी थी। चंबल सेंचुरी के डीएफओ आनंद कुमार ने इस झील का नाम रामसर साइट के लिए प्रस्तावित किया था। आखिरकार प्रशासन के प्रयास रंग लाए और बुधवार को जारी रामसर साइट की सूची में समान पक्षी विहार को भी स्थान मिल ही गया।
जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने ट्वीट कर इस पर खुशी जताई। रामसर साइट में शामिल होने के बाद समान पक्षी विहार के विकास को पंख लगने की उम्मीद जताई जा रही है। जल्द ही एक टीम समान पक्षी विहार में विकास की संभावनाएं खोजने के लिए दस्तक दे सकती है। समान पक्षी विहार को रामसर साइट में शामिल करने के बाद जल्द ही इसका प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। आगरा के कीठम झील में दो फरवरी को आयोजित कार्यक्रम में ये प्रमाण पत्र मिलेगा।
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खाली करानी होगी भूमि
समान पक्षी विहार में किसानों से अधिग्रहीत की गई भूमि रोड़ा बन रही है। मुआवजा मिलने के बाद भी कई किसानों ने जहां जमीन खाली नहीं की है तो वहीं कई किसान मुआवजा लेने के लिए तैयार नहीं है। समान पक्षी विहार को विकसित करने के लिए इस भूमि को खाली कराना बहुत जरूरी है। प्रशासन के लिए ये आसान नहीं होगा।
यह है रामसर साइट
नम भूमि और जल पक्षियों के प्रवास स्थानों के संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर एक संधि हुई थी। ये संधि वर्ष 1971 में दो फरवरी को ईरान के शहर रामसर में आयोजित सम्मेलन में हुई थी। इसलिए इसे रामसर संधि का नाम दिया गया। वहीं इस संधि के तहत चयनित होने वाले स्थलों को रामसर साइट कहा जाता है। हालांकि इस संधि के नियमों को 21 दिसंबर 1975 में प्रभावी किया गया। तब से प्रत्येक दो वर्ष में पूरे विश्व में रामसर संधि के तहत स्थानों को चिह्नित कर उनके संरक्षण की पहल की जाती है।
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526 हेक्टेयर में फैली समान पक्षी विहार की झील प्रदेश की सबसे बड़ी झील है। संरक्षण के अभाव में अब तक ये गुमनामी के अंधेरों में थी। विदेशी पक्षियों के प्रवास से भी समान खूब गुलजार रहता है। हाल ही में जिला प्रशासन की पहल के बाद समान पक्षी विहार के विकास की उम्मीद जगी थी। चंबल सेंचुरी के डीएफओ आनंद कुमार ने इस झील का नाम रामसर साइट के लिए प्रस्तावित किया था। आखिरकार प्रशासन के प्रयास रंग लाए और बुधवार को जारी रामसर साइट की सूची में समान पक्षी विहार को भी स्थान मिल ही गया।
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जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने ट्वीट कर इस पर खुशी जताई। रामसर साइट में शामिल होने के बाद समान पक्षी विहार के विकास को पंख लगने की उम्मीद जताई जा रही है। जल्द ही एक टीम समान पक्षी विहार में विकास की संभावनाएं खोजने के लिए दस्तक दे सकती है। समान पक्षी विहार को रामसर साइट में शामिल करने के बाद जल्द ही इसका प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। आगरा के कीठम झील में दो फरवरी को आयोजित कार्यक्रम में ये प्रमाण पत्र मिलेगा।
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खाली करानी होगी भूमि
समान पक्षी विहार में किसानों से अधिग्रहीत की गई भूमि रोड़ा बन रही है। मुआवजा मिलने के बाद भी कई किसानों ने जहां जमीन खाली नहीं की है तो वहीं कई किसान मुआवजा लेने के लिए तैयार नहीं है। समान पक्षी विहार को विकसित करने के लिए इस भूमि को खाली कराना बहुत जरूरी है। प्रशासन के लिए ये आसान नहीं होगा।
यह है रामसर साइट
नम भूमि और जल पक्षियों के प्रवास स्थानों के संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर एक संधि हुई थी। ये संधि वर्ष 1971 में दो फरवरी को ईरान के शहर रामसर में आयोजित सम्मेलन में हुई थी। इसलिए इसे रामसर संधि का नाम दिया गया। वहीं इस संधि के तहत चयनित होने वाले स्थलों को रामसर साइट कहा जाता है। हालांकि इस संधि के नियमों को 21 दिसंबर 1975 में प्रभावी किया गया। तब से प्रत्येक दो वर्ष में पूरे विश्व में रामसर संधि के तहत स्थानों को चिह्नित कर उनके संरक्षण की पहल की जाती है।