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भावनात्मक लगाव: रामलीला मंचन नहीं, फिर भी रोज मंच पर जाते हैं 'राम-रावण'
Sun, 25 Oct 2020 04:03 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 25 Oct 2020 04:03 PM IST
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रामलीला के कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा में कोरोना संक्रमण के कारण इस बार रामलीला का मंचन नहीं हो पाया, लेकिन ‘राम’ और ‘रावण’ रोज शाम को मंच पर जाते हैं। रामलीला की बात करते हैं और फिर चले आते हैं। यह सिलसिला 10 दिनों से चल रहा है। दरअसल, राम और रावण रेलवे के कर्मचारी हैं जिन्हें रामलीला मंचन से भावनात्मक लगाव हो गया है।
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उनका कहना है कि दिनभर मन में लीला चलती है, दिन अधूरे से लगते हैं, कुछ ऐसा छिन गया है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। रामलीला के दिनों में पूरा दिन लीला में ही बीतता था, इस बार लीला नहीं है तो समय काटना मुश्किल हो गया है।
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रेल पटरियों की देखरेख कर रहे हैं राम
विनोद मौर्य ने कहा, 'मैं रेलवे में प्वाइंट्समैन हूं। पटरियों की देखरेख काम काम कर रहा हूं। इस बार रामलीला नहीं है, इससे पहले पांच साल तक राम का किरदार निभाया है। अबकी बार श्रीराम न बन पाने का मलाल सारी जिंदगी रहेगा। रामलीला के दौरान सिर्फ फल और दूध का सेवन करता था। पूरा परिवार मेरा साथ देता था। पत्नी रीता मौर्य परिधान तैयार करती थीं। ऑनलाइन रामलीला देखकर अभिनय को और बेहतर करने की कोशिश करता था। ये दिन काटने मुश्किल हो रहे हैं। रोज शाम को मंच पर जाता हूं, दीपक जलाता हूं।'
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पढ़ाई कर रहा हूं, पर मन नहीं लग रहा
राजपुर चुंगी के राहुल सानवाल ने कहा कि बीएससी कर चुका हूं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा हूं लेकिन पढ़ाई में इन दिनों मन नहीं लग रहा क्योंकि ये दिन रामलीला के हैं। गढ़वाल समाज की रामलीला में दो साल से राम का किरदार निभा रहा था। इससे पहले लक्ष्मण का किरदार निभाया। मन को तसल्ली देने के लिए रोज ऑनलाइन रामलीला देखता हूं। अन्य पात्र भी दुखी हैं, हम लोग मिलते हैं और रामलीला के प्रसंगों की चर्चा करते हैं।
रेल कर्मचारियों के बिल बना रहे रावण
रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाले मनोज सिंह डीआरएम ऑफिस में लिपिक है। उन्होंने बताया कि इन दिनों मन में भारी बेचैनी है। मैं रेलवे संस्थान की रामलीला में 23 साल से लगातार रावण का किरदार निभाता आया हूं। अगले साल बाद सिल्वर जुबली मनानी थी लेकिन कोरोना केकारण सपना टूट गया। रोज शाम को मंच पर जाता हूं, राम (विनोद मौर्य) के साथ रामलीला के प्रसंगों पर चर्चा करता हूं। रामलीला के दिनों में रोज सुबह दो घंटे राम की पूजा करता था। दो साल पहले रामलीला के मंचन से पहले हृदयाघात हुआ था। ऑपरेशन के बाद डेढ़ माह अस्पताल में भर्ती रहा। डॉक्टर ने सलाह दी कि किसी तरह का मंचन नहीं करना है मगर जिद थी कि रावण का किरदार निभाना है, मैंने मंचन नहीं छोड़ा।
रावण बनना बहुत कठिन है
दयालबाग के केवलराम शिक्षक हैं। उन्होंने कहा कि गढ़वाल भातृ सम्मेलन की रामलीला में चार साल से लंकापति रावण का किरदार निभा रहा हूं, इस बार क्रम टूट गया। रावण बनना आसान नहीं है, आवाज कड़क होनी चाहिए, संवाद अदायगी ऐसी हो कि दर्शकों में डर पैदा हो। रामलीला के दिनों में पूरा दिन अभ्यास में गुजर जाता था, अब दिन काटना मुश्किल है। राम का भक्त हूं, रामलीला मंचन के बाद प्रभु से माफी मांग लेता हूं।
रेल कर्मचारियों के बिल बना रहे रावण
रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाले मनोज सिंह डीआरएम ऑफिस में लिपिक है। उन्होंने बताया कि इन दिनों मन में भारी बेचैनी है। मैं रेलवे संस्थान की रामलीला में 23 साल से लगातार रावण का किरदार निभाता आया हूं। अगले साल बाद सिल्वर जुबली मनानी थी लेकिन कोरोना केकारण सपना टूट गया। रोज शाम को मंच पर जाता हूं, राम (विनोद मौर्य) के साथ रामलीला के प्रसंगों पर चर्चा करता हूं। रामलीला के दिनों में रोज सुबह दो घंटे राम की पूजा करता था। दो साल पहले रामलीला के मंचन से पहले हृदयाघात हुआ था। ऑपरेशन के बाद डेढ़ माह अस्पताल में भर्ती रहा। डॉक्टर ने सलाह दी कि किसी तरह का मंचन नहीं करना है मगर जिद थी कि रावण का किरदार निभाना है, मैंने मंचन नहीं छोड़ा।
रावण बनना बहुत कठिन है
दयालबाग के केवलराम शिक्षक हैं। उन्होंने कहा कि गढ़वाल भातृ सम्मेलन की रामलीला में चार साल से लंकापति रावण का किरदार निभा रहा हूं, इस बार क्रम टूट गया। रावण बनना आसान नहीं है, आवाज कड़क होनी चाहिए, संवाद अदायगी ऐसी हो कि दर्शकों में डर पैदा हो। रामलीला के दिनों में पूरा दिन अभ्यास में गुजर जाता था, अब दिन काटना मुश्किल है। राम का भक्त हूं, रामलीला मंचन के बाद प्रभु से माफी मांग लेता हूं।