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रक्षाबंधन पर विशेष: 60 साल पहले राखी बंधवा कर छलकी थीं चंबल के डकैतों की आंखें

Mon, 03 Aug 2020 12:18 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Mon, 03 Aug 2020 12:18 AM IST
सार

  • रूपा गिरोह के 19 बागियों ने किया था आत्मसमर्पण
  • विनोवा भावे की प्रार्थना सभा में राखी बंधवाकर गए थे जेल

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Raksha Bandhan Special Story Of Chambal Bandit
आत्मसमर्पण के दौरान चंबल के बागियों की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

60 साल पहले जेल जाने से पहले धर्म की बहनों से राखी बंधवा कर चंबल के डकैतों की आंखें छलक पड़ी थीं। जेल में रहने और बाहर आने के बाद भी भाई-बहन के रिश्तों की डोर बंधी रही। 
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पिनाहट से कदौरा तक संत विनोवा भावे ने डकैतों के हृदय परिवर्तन के लिए पद यात्रा की थी। 22 मई 1960 को कदौरा में मान सिंह, रूपा गिरोह के 19 बागियों ने संत विनोवा के समक्ष हथियार डाल दिए। इस दिन रक्षाबंधन था। जेल जाने से पहले संत विनोवा और यदुनाथ सिंह की मौजूदगी में प्रार्थना सभा हुई। एक-एक कर कांता बहन ने डकैतों को टीका किया। 
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हरिविलासी बहन ने राखी बांधी। राखी बंधवाने वाले डकैतों की आंखें भर आई थीं। अशोक नगर, बाह की 90 साल की गुलकंदी देवी ने बताया कि डकैतों के राखी बांधने और जेल के बाद भी रिश्ते की डोर को निभाने की घटना आज भी प्रेरित करती है। जरार की 85 साल की रामश्री ने बताया कि उस वक्त रक्षाबंधन पर यह घटनाक्रम सबको भावुक कर गया था। यादें आज भी आंखें भिगो देती हैं। 
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Raksha Bandhan Special Story Of Chambal Bandit
ठाकुरबेटी और गुलकंदी देवी - फोटो : अमर उजाला
सिमराई की 91 साल की ठाकुर बेटी ने बताया कि भाई बहन के रिश्ते को मजबूत करने वाली इस घटना को आज भी चंबल के गांवों में लोग सुनाते हैं। बाह 82 साल की भागवती देवी ने बताया कि डकैतों के हृदय परिवर्तन और राखी के बंधन की घटना आज की पीढ़ी को भी भावुक कर देती है।          

पदयात्रा के पड़ाव
12 मई 1960 को संत विनोवा ने पिनाहट से बागियों के हृदय परिवर्तन के लिए पदयात्रा शुरू की थी। 12 मई को संत विनोवा, मेजर जनरल यदुनाथ सिंह के साथ निकले। 13 मई को मुरैना के रछेड़ , 14 मई को अंबाह, 16 मई को पोरसा, 17 मई को नगरा, 18 मई को कनेरा, 19 मई को कदौरा में पदयात्रा का पड़ाव रहा।                                                                  

इन 19 बागियों ने किया था आत्मसमर्पण
लोकमन दीक्षित, तेज सिंह, भगवान सिंह, भूप सिंह, कन्हई, बदन सिंह, पातीराम, विद्याराम, डरेलाल, मटरे, जंगजीत, राम सनेही, दुर्जन, श्रीकृष्ण, लच्छी, मोहरमन, करनसिंह, राम दयाल, प्रभू।  
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