Raksha Bandhan: जब राखी बंधवा कर छलक पड़ी थीं चंबल के डकैतों की आंखें, पढ़ें- 62 साल पुरानी कहानी
बाह में 62 साल पहले की भाई-बहन के प्रेम की दास्तान गांव की चौपाल पर लोगों को भी भावुक कर देती है। उस वक्त महिलाओं ने डकैतों को राखी बांधी थी, बहनों का प्रेम देख डकैतों के आंसू छलक पड़े थे।
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डकैतों की लूट, हत्या, अपहरण की खौफ पैदा करने वाली घटनाएं आपने सुनी होंगी, लेकिन चंबल के मान सिंह गिरोह के डकैतों की 62 साल पुरानी भाई-बहन के प्रेम की दास्तान गांव की चौपाल पर आज भी लोगों की आंखें भिगो देती हैं। आगरा जिले के बाह क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि 12 मई 1960 को संत विनोबा ने पिनाहट से बागियों के हृदय परिवर्तन की पद यात्रा मेजर जनरल यदुनाथ सिंह के साथ शुरू की थी।
13 मई को मुरैना के रछेड , 14 मई को अंबाह, 16 मई को पोरसा, 17 मई को नगरा, 18 मई को कनेरा, 19 मई को कदौरा में डकैतों के हृदय परिवर्तन को पद यात्रा का पड़ाव रहा। यहां पर मान सिंह, रूपा गिरोह के 19 बागियों ने संत विनोबा के समक्ष हथियार डाले थे। 22 मई को जेल जाने से पहले संत विनोबा और यदुनाथ सिंह की मौजूदगी में प्रार्थना सभा हुई।
इन डकैतों ने बंधवाई थी राखी
डकैत लोकमन दीक्षित, तेज सिंह, भगवान सिंह, भूप सिंह, कन्हई, बदन सिंह, पातीराम, विद्याराम, डरेलाल, मटरे, जंगजीत, राम सनेही, दुर्जन, श्रीकृष्ण, लक्ष्क्षी, मोहरमन, करन सिंह, राम दयाल, प्रभू को एक एक कर कांता बहन ने टीका किया। हरि विलासी बहन ने राखी बांधी। राखी बंधवाने वाले डकैतों की आंखों में आंसू छलक पडे़। धर्म की बहन भाइयों की राखी की डोर का रिश्ता जेल की सलाखों के भीतर तक चला। कांता और हरि विलासी बहन जेल तक उनके साथ गईं।
भावुक करने वाला था पल
कमतरी के रहने वाले राजबहादुर शर्मा ने बताया कि यह पल बहुत भावुक कर देने वाला था। राखी बंधवाने वाले डकैतों की आंखों में आंसू छलक पडे़ थे। बाह के अहिबरन सिंह परिहार ने कहा कि चौपाल पर रक्षाबंधन का यह घटनाक्रम लोगों की जुबां पर होता है। नैतिक पतन की घटनाओं के बीच डकैतों की राखी को लोग उदाहरण के रूप में पेश करते हैं।
सीख लेने वाली है दास्तां
बाह की रेनू भदौरिया ने कहा कि वर्तमान माहौल में भाई बहन के रिश्ते को मजबूत करने वाली डकैतों की राखी से सीख लेनी चाहिए। भाई-बहन के रिश्ते को चंबल के डकैत निभा सकते हैं, तो हम क्यों नहीं ?