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चिलिंग प्लांट पर छापा, 4400 लीटर मलावटी दूध पकड़ा

Wed, 07 Oct 2015 01:34 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा Updated Wed, 07 Oct 2015 01:34 AM IST
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raid in chilling plant in kheragarh
ऊंटगिरि के विद्यालय में मिड-डे मील में बांटे गए दूध को पीने से 139 बच्चों के बीमार होने की घटना के बाद जागे प्रशासन ने मिलावटी दूध का कारोबार करने वालों पर मंगलवार को भी छापा मारा। उपजिलाधिकारी और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की टीम ने नगला कमाल रोड स्थित गांव पहाड़ी में सिंघल चिलिंग प्लांट पर छापेमारी में 4400 लीटर दूषित दूध पकड़ा। इसमें हाईड्रोजन पराआक्साइड मिले होने की आशंका पर नमूने लिए गए। टीम ने मौके पर ही दूध को नाली में फेंकवा दिया। टीम से अभद्रता करने पर दो लोगों को हिरासत में ले लिया गया है। अधिकारियों ने चिलिंग प्लांट का लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति की है।
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दोपहर लगभग एक बजे उपजिलाधिकारी एमपी सिंह और अभिहीत अधिकारी रामनरेश यादव के नेतृत्व में टीम सिंघल चिलिंग प्लांट पहुंची। जहां एक टैंक में 4400 लीटर दूध भरा मिला। कार्रवाई पर व्यापारियों ने बेवजह परेशान करने का आरोप लगाते हुए टीम से अभद्रता कर दी। इस पर व्यापारी नरेंद्र पुत्र पूरन सिंघल और उनके भाई पप्पू को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। अभिहीत अधिकारी ने बताया कि दूध पूरी तरह खराब हो चुका था। इसमें केमिकल मिलाकर बेचा जा रहा था। जांच के लिए नमूने भेजे गए हैं। वहीं, हिरासत में लिए गए व्यापारी नरेंद्र सिंघल ने अधिकारियों पर अवैध वसूली का विरोध करने पर कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। खाद्य निरीक्षक भगवत सिंह ने टीम के साथ अभद्रता करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने की तहरीर दी है।
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बता दें, शनिवार को एफडीए की टीम ने खेरागढ़ कस्बे में राधारानी चिलिंग प्लांट में छापेमारी की थी।
.. इसलिए मिलाते हैं हाईड्रोजन पराआक्साइड
अभिहीत अधिकारी राम नरेश यादव के अनुसार, हाईड्रोजन पराआक्साइड दूध को फटने से बचाने के लिए मिलाया जाता है। यह अखाद्य पदार्थ है। सेहत के लिए नुकसानदायक है। खेरागढ़ के ऊंटगिरि के विद्यालयों में बच्चों को पिलाए गए दूध में हाईड्रोजन पराआक्साइड की मात्रा हो सकती है। लखनऊ लैब से बुधवार तक रिपोर्ट प्राप्त होने की संभावना है। इससे स्थिति स्पष्ट होगी।
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सेहत के लिए खतरनाक
चिकित्सकों के अनुसार हाइड्रोजन पराक्साइड मुख्यत: अल्सर, सूजन अथवा प्रभावित अंग से शरीर के भीतर ही खून का रिसाव का कारण बन सकता है। इसका असर इसकी मात्रा पर भी निर्भर करता है। ज्यादा होना या लंबे समय तक इस्तेमाल कैंसर और दूसरे गंभीर रूपों में सामने आ सकता है।
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