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Agra News: दवाएं छोड़ीं, मनचाहा खाया...मधुमेह-बीपी गड़बड़ाया
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एसएन मेडिकल कॉलेज
आगरा। ठंड में गजक, लड्डू और मंगोड़े-पकौड़े खाए...दवाएं भी नियमित नहीं लीं। इससे रक्तचाप और ग्लूकोज का स्तर गड़बड़ा गया। साथ ही लकवा भी मार रहा है। परेशानी बढ़ने पर मरीज चिकित्सकों को दिखाने पहुंच रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में ऐसे 40 फीसदी मरीजों में मधुमेह और रक्तचाप अनियंत्रित मिल रहा है।
मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि सर्दी में लोग चिकनाईयुक्त भोजन और मिठाई का सेवन अधिक करते हैं। शारीरिक गतिविधियां भी सीमित हो जाती हैं। इससे ग्लूकोज और रक्तचाप बढ़ा हुआ मिल रहा है। कई मरीज दवाओं को नियमित नहीं ले रहे हैं। ओपीडी में 40 फीसदी मरीज ऐसे आ रहे हैं जिनमें भोजन के बाद ग्लूकोज का स्तर 250 एमजी/डीएल और रक्तचाप 150/170 एमएमएचजी तक मिल रहा है। इनकी दवाएं एडजस्ट करने के साथ खानपान सुधारने और नियमित व्यायाम करने पर जोर दे रहे हैं।
न्यूरोसर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. गौरव धाकरे ने बताया कि रक्तचाप के तेजी से बढ़ने के कारण लकवा के मरीजों की संख्या दोगुना तक हो गई है। हालत गंभीर होने पर सर्जरी भी करनी पड़ रही है। इनमें अधिकांश मरीजों ने दवाएं लेना बंद कर दिया था। न्यूरोसर्जन डॉ. मयंक अग्रवाल ने बताया कि लकवे के अधिकांश मरीजों की उम्र 60 साल से अधिक है। ऐसे में बुजुर्गों के परिजन उनकी दवाओं का खास ध्यान रखें और ठंड से बचाएं।
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हृदय, उच्च रक्तचाप और मधुमेह रोगी रोजाना बीपी की करें जांच
मेडिसिन विभाग के डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि हृदय, मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीज रोजाना बीपी जांचें। ऊपर वाला माप (सिस्टोलिक)100-140 तक रहे और नीचे वाला (डायस्टोलिक) 90 से अधिक नहीं होना चाहिए। अगर दो-तीन दिन बीपी अनियंत्रित हो रहा है तो चिकित्सक को दिखाकर दवाएं एडजस्ट करा लें। सुबह का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर ही टहलने जाएं, नहीं तो घर में ही व्यायाम करें। पूरे दिन में 2-4 ग्राम ही नमक उपयोग करें। तला हुआ भोजन और मीठे से बचें। बीपी की दवाएं कतई बंद नहीं करें। सुबह लेना भूल भी जाएं तो रात की दवा जरूर लें। सुबह 3-6 बजे के बीच रक्तचाप सामान्यरूप से बढ़ता है।
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मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि सर्दी में लोग चिकनाईयुक्त भोजन और मिठाई का सेवन अधिक करते हैं। शारीरिक गतिविधियां भी सीमित हो जाती हैं। इससे ग्लूकोज और रक्तचाप बढ़ा हुआ मिल रहा है। कई मरीज दवाओं को नियमित नहीं ले रहे हैं। ओपीडी में 40 फीसदी मरीज ऐसे आ रहे हैं जिनमें भोजन के बाद ग्लूकोज का स्तर 250 एमजी/डीएल और रक्तचाप 150/170 एमएमएचजी तक मिल रहा है। इनकी दवाएं एडजस्ट करने के साथ खानपान सुधारने और नियमित व्यायाम करने पर जोर दे रहे हैं।
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न्यूरोसर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. गौरव धाकरे ने बताया कि रक्तचाप के तेजी से बढ़ने के कारण लकवा के मरीजों की संख्या दोगुना तक हो गई है। हालत गंभीर होने पर सर्जरी भी करनी पड़ रही है। इनमें अधिकांश मरीजों ने दवाएं लेना बंद कर दिया था। न्यूरोसर्जन डॉ. मयंक अग्रवाल ने बताया कि लकवे के अधिकांश मरीजों की उम्र 60 साल से अधिक है। ऐसे में बुजुर्गों के परिजन उनकी दवाओं का खास ध्यान रखें और ठंड से बचाएं।
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हृदय, उच्च रक्तचाप और मधुमेह रोगी रोजाना बीपी की करें जांच
मेडिसिन विभाग के डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि हृदय, मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीज रोजाना बीपी जांचें। ऊपर वाला माप (सिस्टोलिक)100-140 तक रहे और नीचे वाला (डायस्टोलिक) 90 से अधिक नहीं होना चाहिए। अगर दो-तीन दिन बीपी अनियंत्रित हो रहा है तो चिकित्सक को दिखाकर दवाएं एडजस्ट करा लें। सुबह का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर ही टहलने जाएं, नहीं तो घर में ही व्यायाम करें। पूरे दिन में 2-4 ग्राम ही नमक उपयोग करें। तला हुआ भोजन और मीठे से बचें। बीपी की दवाएं कतई बंद नहीं करें। सुबह लेना भूल भी जाएं तो रात की दवा जरूर लें। सुबह 3-6 बजे के बीच रक्तचाप सामान्यरूप से बढ़ता है।