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शहादत को बीता एक साल, यादों में जिंदा विनायकपुर का लाल

Fri, 14 Feb 2020 12:21 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 14 Feb 2020 12:21 AM IST
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pulwama
मैनपुरी/बरनाहल। बरनाहल के गांव विनायकपुर के रामवकील ने पुलवामा में हुए हमले में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। उनकी शहादत को आज पूरा एक साल हो चुका है, लेकिन परिवार और गांव के लोगों की यादों में विनायकपुर का ये लाल आ भी जिंदा है। भले ही एक परिवार ने रामवकील को जन्म दिया, लेकिन आज वह पूरे विनायकपुर का लाल है। जिस पर सभी को गर्व है।
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14 फरवरी 2018 को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ जवान रामवकील शहीद हो गए थे। शहादत पर केवल मैनपुरी ही नहीं बल्कि पूरा देश रोया था। लेकिन विनायकपुर की यादों में देश का ये लाल आज भी जिंदा है। जब भी रामवकील की बात चलती है तो सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है, लेकिन आंखों की नमी अपनों से बिछड़ने का अहसास भी कराती हैं। शहीद की मांग अमितश्री अपने बेटे को याद करके रो पड़ती हैं। आखिर उन्होंने कलेजे का टुकड़ा जो खोया है।
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पत्नी गीता देवी का हाल भी कुछ ऐसा ही है। पति को याद करते हुए वे भी फफक कर रो पड़ती हैं। यूं तो पूरा परिवार आज तक रामवकील की शहादत को नहीं भुला पाया, लेकिन पुलवामा हमले की बरसी ने ये जख्म फिर एक बार ताजा कर दिए हैं।
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मेले का होगा आयोजन
शहीद रामवकील के शहादत दिवस पर गांव में शहीद मेले का आयोजन भी किया जाएगा। पुलवामा हमले की बरसी पर एक दिवसीय मेले का आयोजन होगा। इसमें गांव व क्षेत्र के लोग प्रतिभाग करेंगे। साल दर साल इसका आयोजन किया जाएगा।
नहीं हो सका शहीद स्मारक का निर्माण
देश के लिए भले ही विनायकपुर निवासी सीआरपीएफ के जवान रामवकील ने अपने और परिवार की चिंता नहीं की, लेकिन आज शहादत के एक साल बाद भी स्मारक का निर्माण तक नहीं हो सका। सरकार द्वारा इसके लिए पांच बीघा का पट्टा तो आवंटित किया जा चुका है, लेकिन इसके लिए अब तक रास्ता नहीं मिल पा रहा है। अधिकारियों से लेकर नेताओं तक इस मामले की जानकारी दी गई, लेकिन निराकरण नहीं हो सका।

बेटे को खोने का गम तो है, लेकिन गर्व इस बात का है कि मेरे बेटे ने भारत मां की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए हैं। वह हमारे दिल में हमेशा जीवित रहेगा।
-अमितश्री, शहीद की मां
मेरे पति ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। सरकार से मेरा अनुरोध है कि शहीद स्मारक के लिए रास्ता दिलाई जाए।
गीता देवी, शहीद की पत्नी
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