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मीडिया संस्थानों पर छापे की कार्रवाई को लेकर आक्रोश
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कासगंज में एसडीएम को ज्ञापन सौंपते मीडियाकर्मी एवं व्यापार मंडल के पदाधिकारी
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। देश के मीडिया संस्थानों पर आयकर के छापे की कार्रवाई पर लोगों के बीच आक्रोश है। पत्रकारों, व्यापार मंडल एवं अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई रोकने की मांग की। लोगों ने कहा कि मीडिया संस्थानों की निष्पक्षता और स्वतंत्रता बाधित होना लोकतंत्र के लिए खतरा है।
पत्रकारों और व्यापार मंडल के लोगों ने तहसील परिसर में पहुंचकर प्रदर्शन किया। पत्रकारों ने कहा कि सरकार के द्वारा मीडिया संस्थानों पर बदले की कार्रवाई की जा रही है। कोरोना की दूसरी लहर में हकीकत का आइना सरकार को दिखाया। जिसका खामियाजा मीडिया संस्थान भुगत रहा है। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष सतीश गुप्ता एवं नगर अध्यक्ष अखिलेश अग्रवाल ने कहा कि भारत की सरकार में प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र के आदर्श मूल्यों की स्थापना के लिए निर्धारित है। यदि लोकतंत्र के इस चौथे स्तंभ पर बदले की कार्रवाई की गई या उनका दमन किया गया तो समाज के हित में अच्छे परिणाम नहीं होंगे।
व्यापारियों ने प्रधानमंत्री और राज्यपाल से बदले की कार्रवाई को रोकने की मांग की। इस दौरान डा. विकास गुप्ता, राजवीर सिंह सोलंकी, कबीर प्रताप सिंह, सतवीर सिंह, डा. मोहम्मद फारुख, अंकिश अग्रवाल आदि मौजूद रहे। वहीं जिला कांग्रेस कमेटी विधि प्रकोष्ठ के अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए कहा कि भारत सरकार की तानाशाही और दमनकारी नीतियों से मीडिया का दमन किया जा रहा है। सच की आवाज को दबाना। लोकतंत्र की हत्या का कदम है। मीडिया जनता की आवाज है।
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जिला चेयरमैन सत्येंद्र पाल सिंह बैस ने इलैक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया की स्वतंत्रता न बाधित होने देने की मांग की। अधिवक्ता केशव मिश्रा ने भी सरकार के कदम की निंदा की। इस दौरान मुनेंद्र पाल सिंह, प्रकाशवीर सिंह, अनिल कुमार मिश्रा, आदर्श सक्सेना, धर्मेश शर्मा, धर्मेंद्र सिसोधिया सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। पत्रकारों में संजय धूपड़, राकेश चौधरी, अशोक शर्मा, नरेंद्र पालीवाल, अक्षय पालीवाल, आयुष भारद्वाज, शिवप्रताप सोलंकी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।
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पत्रकारों और व्यापार मंडल के लोगों ने तहसील परिसर में पहुंचकर प्रदर्शन किया। पत्रकारों ने कहा कि सरकार के द्वारा मीडिया संस्थानों पर बदले की कार्रवाई की जा रही है। कोरोना की दूसरी लहर में हकीकत का आइना सरकार को दिखाया। जिसका खामियाजा मीडिया संस्थान भुगत रहा है। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष सतीश गुप्ता एवं नगर अध्यक्ष अखिलेश अग्रवाल ने कहा कि भारत की सरकार में प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र के आदर्श मूल्यों की स्थापना के लिए निर्धारित है। यदि लोकतंत्र के इस चौथे स्तंभ पर बदले की कार्रवाई की गई या उनका दमन किया गया तो समाज के हित में अच्छे परिणाम नहीं होंगे।
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व्यापारियों ने प्रधानमंत्री और राज्यपाल से बदले की कार्रवाई को रोकने की मांग की। इस दौरान डा. विकास गुप्ता, राजवीर सिंह सोलंकी, कबीर प्रताप सिंह, सतवीर सिंह, डा. मोहम्मद फारुख, अंकिश अग्रवाल आदि मौजूद रहे। वहीं जिला कांग्रेस कमेटी विधि प्रकोष्ठ के अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए कहा कि भारत सरकार की तानाशाही और दमनकारी नीतियों से मीडिया का दमन किया जा रहा है। सच की आवाज को दबाना। लोकतंत्र की हत्या का कदम है। मीडिया जनता की आवाज है।
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जिला चेयरमैन सत्येंद्र पाल सिंह बैस ने इलैक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया की स्वतंत्रता न बाधित होने देने की मांग की। अधिवक्ता केशव मिश्रा ने भी सरकार के कदम की निंदा की। इस दौरान मुनेंद्र पाल सिंह, प्रकाशवीर सिंह, अनिल कुमार मिश्रा, आदर्श सक्सेना, धर्मेश शर्मा, धर्मेंद्र सिसोधिया सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। पत्रकारों में संजय धूपड़, राकेश चौधरी, अशोक शर्मा, नरेंद्र पालीवाल, अक्षय पालीवाल, आयुष भारद्वाज, शिवप्रताप सोलंकी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।