Agra News: पूर्व प्रभारी कुलपति के खिलाफ भ्रष्टाचार मामले में प्रोफेसर बने सरकारी गवाह, कोर्ट में बयान दर्ज
एसटीएफ प्रो. विनय पाठक के (जनवरी से सितंबर) कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी मामले की जांच कर रही है। विनय पाठक के खिलाफ तीन प्रोफेसरों ने कोर्ट में बयान दर्ज कराए हैं।
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आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति रहे प्रोफेसर विनय पाठक की मुसीबत और बढ़ने वाली है। इनके खिलाफ विश्वविद्यालय के तीन वरिष्ठ प्रोफेसर और पूर्व कुलसचिव सरकारी गवाह बन गए हैं। इन्होंने प्रो. पाठक के खिलाफ कोर्ट में बयान दर्ज कराए हैं। अभी स्कूल संचालक, कर्मचारी और अन्य प्रोफेसर भी बयान दर्ज करवाएंगे।
एसटीएफ प्रो. पाठक के (जनवरी से सितंबर) कार्यकाल में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की जांच कर रही है। इसमें टीम ने 50 दिन में अहम दस्तावेज और साक्ष्य जुटाए हैं। प्रो. पाठक के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार की गवाह के तौर पर एसटीएफ ने चार के कोर्ट में बयान दर्ज करवा दिए हैं। इसमें विश्वविद्यालय के तीन वरिष्ठ प्रोफेसर हैं।
आठ से अधिक और लोग देंगे गवाही
इन्होंने कोर्ट में उनके कार्यकाल में किस कदर नियमों को दरकिनार करते हुए मनमाने निर्णय लिए, किन योजनाओं और कामकाज में आर्थिक घोटाला किया, किस कदर अधीनस्थों पर दबाव बनाते थे, इसके बारे में बताया है। एसटीएफ के एक अधिकारी ने बताया कि उनकी सूची में अभी आठ से अधिक और लोग हैं, जो गवाही देंगे। इसमें कॉलेज संचालक, विश्वविद्यालय के अधिकारी-कर्मचारी, एजेंसी के कर्मचारी समेत अन्य कंपनियों से जुड़े लोग हैं।
कमीशनखोरी के मामले में दर्ज हुआ था मुकदमा
विश्वविद्यालय में परीक्षा संबंधी कार्य करने वाली डिजीटेक्स टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मालिक डेविड मारियो डेनिस ने 30 अक्तूबर को प्रभारी कुलपति रहे प्रो. विनय पाठक पर कमीशनखोरी पर आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि एजेंसी के भुगतान के लिए वह 1.41 करोड़ रुपये प्रो. पाठक के कहने पर सहयोगी अजय मिश्रा को दिए हैं और अभी 10 लाख और मांग रहे हैं।एसटीएफ ने इन मुख्य मामलों की कर रही है जांच
- बिना मानक के 201 कॉलेज और पाठ्यक्रमों को स्थायी मान्यता देना।
- 90 हजार का बेड, 85 हजार की अलमारी वाला फर्नीचर घोटाला।
- शिक्षकों की नियुक्तियां और आंगनबाड़ी किट के नाम पर वसूली।
- भवन निर्माण कार्य और इनके बिल के भुगतान संबंधी मामले।
- रूसा के तहत बजट की वित्तीय गड़बड़ी।
- परीक्षा केंद्र निर्धारण करने।
- बीएचएमएस के पुर्न मूल्यांकन करवाना।