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UP: जिन स्कूलों में महंगी दीं कॉपी-किताबें, जांच के लिए गठित हुईं छह टीम; 4 हफ्ते बाद भी नहीं दे सकीं रिपोर्ट
Fri, 29 May 2026 11:29 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 29 May 2026 11:29 AM IST
सार
आगरा में निजी स्कूलों द्वारा महंगी किताबें लागू करने की शिकायतों पर बनी जांच टीमों ने चार हफ्ते बाद भी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। जिला प्रशासन ने 30 स्कूलों की जांच के लिए टीम गठित की थी, लेकिन अब तक कार्रवाई प्रक्रिया अटकी हुई है।
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किताबें महंगी
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विस्तार
महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ने की शिकायतें हुईं, इस पर प्रशासन ने सख्ती का दावा करते हुए जांच शुरू कराई। मगर 30 स्कूलों की जांच के लिए बनाई गई 6 संयुक्त टीमें अब तक जिला बेसिक शिक्षाधिकारी को रिपोर्ट नहीं सौंप पाईं। एक सप्ताह में इन्हें रिपोर्ट देनी थी लेकिन चार हफ्ते बीत चुके हैं।
जिले के निजी स्कूलों में एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) और एससीईआरटी (राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लागू करने की शिकायतें हुई थीं। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने जांच के आदेश दिए थे। शिकायतकर्ता टीम पापा के मनोज शर्मा ने आरोप लगाया था कि अभिभावकों को स्कूलों और तय दुकानों से महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
जांच के लिए डीएम ने 6 मई को अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम, द्वितीय, तृतीय, उपजिलाधिकारी सदर, किरावली, डिप्टी कलेक्टर मुख्यालय और संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों की 6 संयुक्त टीमें गठित की गई थीं। सभी को 30 स्कूलों का भौतिक सत्यापन कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश थे, ताकि दोषी स्कूलों पर कार्रवाई हो सके। मगर चार सप्ताह बाद भी रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है। बीएसए जितेंद्र कुमार गोंड ने बताया कि अभी रिपोर्ट नहीं मिली है। स्कूल बंद हो गए हैं। जब स्कूल खुलेंगे तो जांच टीम जाएगी। बच्चों से बात कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
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जिले के निजी स्कूलों में एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) और एससीईआरटी (राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लागू करने की शिकायतें हुई थीं। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने जांच के आदेश दिए थे। शिकायतकर्ता टीम पापा के मनोज शर्मा ने आरोप लगाया था कि अभिभावकों को स्कूलों और तय दुकानों से महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
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जांच के लिए डीएम ने 6 मई को अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम, द्वितीय, तृतीय, उपजिलाधिकारी सदर, किरावली, डिप्टी कलेक्टर मुख्यालय और संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों की 6 संयुक्त टीमें गठित की गई थीं। सभी को 30 स्कूलों का भौतिक सत्यापन कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश थे, ताकि दोषी स्कूलों पर कार्रवाई हो सके। मगर चार सप्ताह बाद भी रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है। बीएसए जितेंद्र कुमार गोंड ने बताया कि अभी रिपोर्ट नहीं मिली है। स्कूल बंद हो गए हैं। जब स्कूल खुलेंगे तो जांच टीम जाएगी। बच्चों से बात कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
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