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मैनपुरी में बजट से हजारों परिवारों को बंधी आशियाने की उम्मीद
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मैनपुरी। अपना आशियाना हर किसी का सपना होता है। बेघर लोगों को सरकार से उम्मीद रहती है। लेकिन लक्ष्य के अभाव में चंद लोगों को ही छत मिल पाती है। बजट में एक बार फिर हजारों परिवारों को आवास के लिए अलग से धनराशि का प्रावधान करने की उम्मीद जगी है। बेघर परिवारों का कहना है कि इस बार बजट में उनके लिए जरूर सरकार कोई घोषण करेगी।
जारी वित्तीय वर्ष में अगर प्रधानमंत्री आवास योजना पर नजर डालें तो लक्ष्य का बड़ा अभाव रहा। लगभग सात हजार परिवार जिले में बेघर के रूप में चिह्नित किए गए थे। इसके सापेक्ष पहले चार हजार के करीब आवास निर्माण का लक्ष्य दिया गया। इसके बाद में संशोधित कर 1817 कर दिया गया। वहीं एक बार और इसे संशोधित कर 1789 कर दिया गया। इससे साफ है कि वंचित के सापेक्ष 30 प्रतिशत लोगों को भी इस साल आवास नहीं मिल पाएगा।
लोगों की बात
प्रधानमंत्री आवास योजना केंद्र द्वारा संचालित है। जब बेघरों की सूची शासन ने तैयार करा ली है तो उसके लिए बजट भी देना चाहिए। बजट के अभाव में साल दर साल इंतजार और लंबा होता जा रहा है।
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-विजय कुमार, कुसमरा
गर्मी, सर्दी हो या बारिश सभी में बेघर लोगों के लिए मुसीबत खड़ी होती है। इसी के चलते लोगों को उम्मीद रहती है कि उन्हें आवास मिल जाए। सरकार इस बारे में नहीं सोचती है, जिससे परेशानी होती है।
-प्रमोद शर्मा, कुसमरा
बजट में हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ प्रावधान किया जाता है। ऐेसे में जरूरी है कि पूरे देश में बेघरों को उनका आवास दिलाने का भी ध्यान रखा जाए। अब बजट का इंतजार है, इस बार जरूर आवास के लिए अधिक बजट मिलेगा।
-प्रदीप शाक्य, कुसमरा
प्रशासन से साल दर साल सरकार को आवास की धनराशि के लिए वंचितों की संख्या के अनुसार मांग भेजी जाती है। आवास के लिए कम बजट के कारण धनराशि नहीं मिलती है। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
-छन्नूलाल कश्यप, कुसमरा
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जारी वित्तीय वर्ष में अगर प्रधानमंत्री आवास योजना पर नजर डालें तो लक्ष्य का बड़ा अभाव रहा। लगभग सात हजार परिवार जिले में बेघर के रूप में चिह्नित किए गए थे। इसके सापेक्ष पहले चार हजार के करीब आवास निर्माण का लक्ष्य दिया गया। इसके बाद में संशोधित कर 1817 कर दिया गया। वहीं एक बार और इसे संशोधित कर 1789 कर दिया गया। इससे साफ है कि वंचित के सापेक्ष 30 प्रतिशत लोगों को भी इस साल आवास नहीं मिल पाएगा।
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लोगों की बात
प्रधानमंत्री आवास योजना केंद्र द्वारा संचालित है। जब बेघरों की सूची शासन ने तैयार करा ली है तो उसके लिए बजट भी देना चाहिए। बजट के अभाव में साल दर साल इंतजार और लंबा होता जा रहा है।
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गर्मी, सर्दी हो या बारिश सभी में बेघर लोगों के लिए मुसीबत खड़ी होती है। इसी के चलते लोगों को उम्मीद रहती है कि उन्हें आवास मिल जाए। सरकार इस बारे में नहीं सोचती है, जिससे परेशानी होती है।
-प्रमोद शर्मा, कुसमरा
बजट में हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ प्रावधान किया जाता है। ऐेसे में जरूरी है कि पूरे देश में बेघरों को उनका आवास दिलाने का भी ध्यान रखा जाए। अब बजट का इंतजार है, इस बार जरूर आवास के लिए अधिक बजट मिलेगा।
-प्रदीप शाक्य, कुसमरा
प्रशासन से साल दर साल सरकार को आवास की धनराशि के लिए वंचितों की संख्या के अनुसार मांग भेजी जाती है। आवास के लिए कम बजट के कारण धनराशि नहीं मिलती है। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
-छन्नूलाल कश्यप, कुसमरा