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निवेशकों से लेकर पैसा लेकर जमा ही नहीं करता था घोटालेबाज
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कासगंज सोरों में बंद जालसाज आशीष की दुकान
- फोटो : KASGANJ
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सोरों। डाकघर एजेंट की जालसाजी मामले में पुलिस को पता चला वो हर माह 250 निवेशकों से उनकी आरडी कराने के लिए पैसे तो लेता था लेकिन जमा नहीं करता था। जब उस पर निवेशकों ने दबाव बनाया तो उसने अपनी ही फर्म का चेक उन्हें दे दिया। लेकिन वो बाउंस हो गए। जनवरी माह से एक भी किस्त निवेशकों की डाकघर में जमा नहीं की गई थी। जबकि नकदी हर माह लेता था।
डाकघर, एलआईसी एजेंट आशीष अग्रवाल और उसकी मांग मृदुला अग्रवाल ने निवेशकों से पैसा लेकर उसे जनवरी माह से डाकघर में जमा नहीं किया। करोड़ों रुपये लेकर मां-बेटे फरार हैं। कुछ निवेशकों का दबाव पड़ता तो वह उन्हें नकद धनराशि दे देता था। कुछ दिनों पहले उसने कुछ अपनी निजी फर्म के खाते के चेक दिए थे। निवेशक पंकज मिश्रा से दो और विकास मिश्रा से तीन लाख रुपये आशीष ने कर्ज लिए थे। फरार होने से दो दिन पहले ही उसने पंकज और विकास को उनकी उधारी की रकम के चेक दिए। पंकज और विकास के मुताबिक उन्होंने चेक खाते में लगाए, लेकिन वह बाउंस हो गए हैं।
खोल लिया था निजी फर्म का खाता
कासगंज। आशीष कपड़ा कारोबारी था। उसने पहले अपनी फर्म पंजीकृत कराई और सत्यप्रकाश राकेश कुमार फर्म के नाम से केनरा बैंक में खाता खोला और इसकी बैंक का चेक निवेशकों को देता था। खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चेक बाउंस हुए।
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आंकड़े की नजर से-े
- 110 से अधिक खाते शुक्रवार को डाकघर में खंगाले गए।
- 10 माह से उपभोक्ताओं के खातों में धनराशि जमा नहीं कर रहा था जालसाज।
- जांच कर रहे हैं। 110 से अधिक खाते देख लिए हैं। देखने में आया है कि वह जनवरी माह से खातों में धनराशि जमा नहीं कर रहा था। तभी से उसने जालसाजी की है। - सुभाष दुबे, पोस्टमास्टर।
- साक्ष्य जुटा लिए हैं। जल्द ही आरोपी की तलाश में संभावित स्थानों पर दबिश दी जाएगी। उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। - रिपुदमन सिंह, कोतवाली प्रभारी।
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डाकघर, एलआईसी एजेंट आशीष अग्रवाल और उसकी मांग मृदुला अग्रवाल ने निवेशकों से पैसा लेकर उसे जनवरी माह से डाकघर में जमा नहीं किया। करोड़ों रुपये लेकर मां-बेटे फरार हैं। कुछ निवेशकों का दबाव पड़ता तो वह उन्हें नकद धनराशि दे देता था। कुछ दिनों पहले उसने कुछ अपनी निजी फर्म के खाते के चेक दिए थे। निवेशक पंकज मिश्रा से दो और विकास मिश्रा से तीन लाख रुपये आशीष ने कर्ज लिए थे। फरार होने से दो दिन पहले ही उसने पंकज और विकास को उनकी उधारी की रकम के चेक दिए। पंकज और विकास के मुताबिक उन्होंने चेक खाते में लगाए, लेकिन वह बाउंस हो गए हैं।
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खोल लिया था निजी फर्म का खाता
कासगंज। आशीष कपड़ा कारोबारी था। उसने पहले अपनी फर्म पंजीकृत कराई और सत्यप्रकाश राकेश कुमार फर्म के नाम से केनरा बैंक में खाता खोला और इसकी बैंक का चेक निवेशकों को देता था। खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चेक बाउंस हुए।
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आंकड़े की नजर से-े
- 110 से अधिक खाते शुक्रवार को डाकघर में खंगाले गए।
- 10 माह से उपभोक्ताओं के खातों में धनराशि जमा नहीं कर रहा था जालसाज।
- जांच कर रहे हैं। 110 से अधिक खाते देख लिए हैं। देखने में आया है कि वह जनवरी माह से खातों में धनराशि जमा नहीं कर रहा था। तभी से उसने जालसाजी की है। - सुभाष दुबे, पोस्टमास्टर।
- साक्ष्य जुटा लिए हैं। जल्द ही आरोपी की तलाश में संभावित स्थानों पर दबिश दी जाएगी। उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। - रिपुदमन सिंह, कोतवाली प्रभारी।