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Agra News: पुलिसिंग हुई हाईटेक, पर भाषा अब भी अंग्रेजों के जमाने वाली; इसे समझना है मुश्किल

Mon, 29 May 2023 09:44 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 29 May 2023 09:44 AM IST
सार

पुलिसिंग भले ही हाईटेक हुई है, लेकिन भाषा अभी भी अंग्रेजों के जमाने वाली है। दैनिकी और केस डायरी में उर्दू व फारसी शब्दों का इतना अधिक प्रयोग है, जिसे आमजन तो छोड़िए पढ़े-लिखों को भी समझने में दिक्कत होती है।
 

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Policing became hi-tech but the language is still of British era
पुलिस आयुक्त कार्यालय, आगरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पुलिस निरंतर हाईटेक हो रही है। रजिस्टर से कंप्यूटर, टैब का सफर पूरा करते हुए अब एंड्रायड के नए-नए एप तक पहुंच चुकी है। पर पुलिस की भाषा अभी भी वहीं अंग्रेजों के जमाने वाली है। जनरल डायरी से केस डायरी तक उर्दू और फारसी शब्दों का अधिक प्रयोग हो रहा है, जो कई बार लोगों की समझ से परे हो जाता है। एफआईआर, पुलिस के विवेचना के कागज पढ़ने में परेशानी होती है। लोगों को अनुवादकों या किसी वकील की मदद लेनी पड़ती है। इसी समस्या को देखते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने गत दिनों एक आदेश पारित किया था, जिसमें उर्दू और फारसी के शब्दों के प्रयोग की जगह आसान हिंदी शब्द लिखने के दिशा-निर्देश दिए गए थे। मगर, उत्तर प्रदेश पुलिस अंग्रेजों के समय वाली भाषा ही लिख रही है।

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अब नहीं होते उर्दू अनुवादक

शहर के एक थाने के निरीक्षक ने बताया कि हर थाने में आठ नंबर रजिस्टर होता है। इसमें अपराध का लेखा-जोखा रखा जाता है। अंग्रेजों के जमाने से इस रजिस्टर में उर्दू में लिखा जाता रहा है। हर थाने में उर्दू अनुवादक की नियुक्ति थी। वह रजिस्टर पढ़ते थे। पुराने केस आज भी उर्दू में दर्ज हैं। हालांकि अब पुलिस की लिखापढ़ी में हिंदी के शब्दों का इस्तेमाल बढ़ा है। उर्दू अनुवादकों की नई भर्ती नहीं हो रही है।

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ये हैं कठिन शब्द की हिंदी

फर्द : उर्दू है : ज्ञाप्ति सूची
फर्द बरामदगी : बरामद सामान की सूची
फर्द हवालगी : हवाले करने की सूची
तामीला : पालन करना
तस्दीक : सत्यापित
अदम तहरीर : जांच की प्रक्रिया में
रुखसत : रवाना किया जाना।
मुजरिम : अपराधी
अदम शनाख्त : शिनाख्त नहीं होना।
अदम तामील : पता सत्यापित नहीं हुआ।
मजरूब : जख्मी, घायल
नामजद : नामित
नजरी : आंखों देखा।
नजरबंद : रोके रखना, कैद करना
वारदात : घटना
आमद : फारसी : आना
मुखबिर : फारसी : गुप्तचर
कलमबंद : फारसी : बयान लिखना
पाकसाफ : फारसी : मुल्जिम को गिरफ्तारी के समय देखा गया, कोई चोट का निशान नहीं था
 

आसान शब्द होने चाहिए

वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप शर्मा ने बताया कि केस डायरी में उर्दू के शब्दों का प्रयोग अक्सर पुलिस की लिखापढ़ी में किया जाता है। इसे आम लोग नहीं समझ पाते हैं। पुलिस की लिखापढ़ी में सामान्य शब्दों का प्रयोग होना चाहिए, जिससे लोगों को समझने में दिक्कत न हो।


चलन वाली भाषा लिख रहे

पुलिस आयुक्त डाॅ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि पुलिस की लिखापढ़ी में वही भाषा लिखी जा रही है, जो कि पहले से चलन में है। कुछ शब्द दूसरी भाषाओं के होते हैं, यह पुरानी व्यवस्था के तहत ही हैं।
 

हर थाने में लगे हैं कंप्यूटर

पांच साल से जीडी और केस डायरी कंप्यूटर पर लिखी जाने लगी है। हर काम ऑनलाइन होता है। इसके लिए थानों में कंप्यूटर रखे गए हैं। आपरेटर की भी भर्ती हुई हैं। शब्द भले ही उर्दू, फारसी के होते हैं। मगर, उन्हें हिंदी में भी लिखा जा रहा है।

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