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Agra News: पुलिस की लचर जांच ने छीना न्याय, 11वीं के छात्र के अपहरण-हत्या के 6 आरोपी छूटे

Fri, 16 May 2025 11:28 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Updated Fri, 16 May 2025 11:28 PM IST
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Police's poor investigation robbed justice, 6 accused of kidnapping and murder of 11th class student released
मैनपुरी। एक दशक पुराने सनसनीखेज घिरोर अपहरण और हत्या मामले में पीड़ित परिवार को करारा झटका लगा है। अपर जिला जज (एडीजे) न्यायालय ने फिरौती के लिए 17 वर्षीय छात्र राहुल के अपहरण और हत्या के मामले में नामजद सभी छह आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।
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इस मामले में कुल सात आरोपी थे, जिनमें से एक की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। न्यायालय ने पुलिस की दोषपूर्ण विवेचना और ठोस गवाहों व साक्ष्यों की कमी को आरोपियों के बरी होने का मुख्य कारण बताया है। वर्ष 2012 में घटी इस घटना ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था। खेरी गांव के निवासी सुरेशचंद्र ने घिरोर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनका 11वीं कक्षा में पढ़ने वाला 17 वर्षीय बेटा राहुल 12 सितंबर 2012 की सुबह साइकिल से स्कूल के लिए निकला था।
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राहुल घिरोर कस्बे में लक्ष्मण के यहां साइकिल खड़ी करके बस से शिकोहाबाद के पाली इंटर कॉलेज जाता था। लेकिन उस दिन वह न तो स्कूल पहुंचा और न ही घर लौटा। पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट 15 सितंबर को दर्ज की। इसके बाद 23 सितंबर को सुरेशचंद्र को बदमाशों का फोन आया, जिसमें राहुल को छोड़ने के बदले 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। पुरानी रंजिश के चलते सुरेशचंद्र ने गांव के ही राजू उर्फ राजीव कुमार और सुभाष चंद्र पर शक जताया।
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फिरौती की रकम के तौर पर 6 अक्तूबर 2012 को चार लाख रुपये देने की योजना बनी। पुलिस ने जाल बिछाकर सुरेशचंद्र को फिरौती की रकम देने नगला भवानी भेजा। वहां पुलिस ने घेराबंदी की और मुठभेड़ के बाद सुभाष, प्रेम सिंह, रजनेश, राजू और जयकुमार को हथियार और गाड़ियों के साथ गिरफ्तार करने का दावा किया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार जयकुमार की निशानदेही पर फिरौती के 3.17 लाख रुपये बरामद हुए। इसके अतिरिक्त, अपहृत छात्र राहुल का शव कंकाल के रूप में इच्छापुर मार्ग, बरनाहल में सत्यराम के खेत से बरामद दिखाया गया। मुठभेड़ में गिरफ्तार आरोपियों के बयानों के आधार पर सुनील और श्याम सुंदर को भी मामले में आरोपी बनाया गया और सभी सात के खिलाफ अपहरण, हत्या और साक्ष्य छुपाने समेत अन्य धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किया गया।

हालांकि, अदालत में पुलिस की कहानी टिक नहीं पाई। न्यायालय ने पुलिस की जांच में कई गंभीर कमियां पाईं, जिसका लाभ आरोपियों को मिला। मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी श्याम सुंदर की मृत्यु हो गई थी। शेष छह आरोपियों सुभाष, प्रेम सिंह, रजनेश, राजू, सुनील और जयकुमार को न्यायालय ने साक्ष्यों और गवाहों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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