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'श्रीकृष्ण विराजमान' पहुंचे अदालतः लाठीचार्ज से भड़की थी जन्मभूमि मुक्ति की आग
Mon, 28 Sep 2020 04:42 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 28 Sep 2020 04:42 AM IST
सार
पंकज शर्मा ने बताया कि उस दौरान यात्रा में कम लोगों की उपस्थिति का लोगों ने मजाक तक उड़ाया था। अशोक सिंघल के नेतृत्व में 1989 में रामशिला पूजन शुरू हुआ। मथुरा में शिलाओं का भव्य स्वागत हो रहा था। इसी दौरान होली गेट पर पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज कर दिया।
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रामशिला पूजन के लिए आए संत (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुरादाबाद के हिंदू सम्मेलन में पहली बार अयोध्या, मथुरा, काशी की मुक्ति का नारा लगा। इस आंदोलन की बागडोर विश्व हिंदू परिषद के अशोक सिंघल को सौंप दी गई। इसी के तहत रामशिला पूजन शुरू हुआ और 1989 में जब रामशिलाएं मथुरा पहुंचीं तो पुलिस ने रामभक्तों पर लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति की आग और भड़क गई।
1986 के बाद से ही अयोध्या, मथुरा, काशी की मुक्ति को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने आंदोलन की बागडोर संभाल ली थी। इस दौरान कुछ संत रामजानकी यात्रा लेकर मथुरा पहुंचे। उस समय के सक्रिय हिंदूवादी नेता चंद्रभान गुप्ता, रोशन लाल अग्रवाल, रविंद्र पांडे, हरीश गौड़, अमित अग्रवाल, पंकज शर्मा, आनंद स्वामी, गोपेश्वर चतुर्वेदी ने यात्रा का स्वागत किया।
पंकज शर्मा ने बताया कि उस दौरान यात्रा में कम लोगों की उपस्थिति का लोगों ने मजाक तक उड़ाया था। अशोक सिंघल के नेतृत्व में 1989 में रामशिला पूजन शुरू हुआ। मथुरा में शिलाओं का भव्य स्वागत हो रहा था। इसी दौरान होली गेट पर पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज कर दिया।
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1986 के बाद से ही अयोध्या, मथुरा, काशी की मुक्ति को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने आंदोलन की बागडोर संभाल ली थी। इस दौरान कुछ संत रामजानकी यात्रा लेकर मथुरा पहुंचे। उस समय के सक्रिय हिंदूवादी नेता चंद्रभान गुप्ता, रोशन लाल अग्रवाल, रविंद्र पांडे, हरीश गौड़, अमित अग्रवाल, पंकज शर्मा, आनंद स्वामी, गोपेश्वर चतुर्वेदी ने यात्रा का स्वागत किया।
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पंकज शर्मा ने बताया कि उस दौरान यात्रा में कम लोगों की उपस्थिति का लोगों ने मजाक तक उड़ाया था। अशोक सिंघल के नेतृत्व में 1989 में रामशिला पूजन शुरू हुआ। मथुरा में शिलाओं का भव्य स्वागत हो रहा था। इसी दौरान होली गेट पर पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज कर दिया।
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जनसभा करते अशोक सिंघल की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस की कार्रवाई से कार्यक्रम के संयोजक रविंद पांडे के कान का पर्दा फट गया था। बाद में मुलायम सिंह यादव की सरकार के खिलाफ आंदोलन किया गया। करीब 70 हजार लोग गिरफ्तार कर अस्थायी जेलों में भरे गए। सतीश डाबर, ब्रिजेंद्र नागर, ठा.ओमप्रकाश सिंह, रविकांत गर्ग आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे।
पंकज बताते हैं कि उन्होंने अपना भेष बदला और अपना नाम डॉ. नैपाल सिंह रख लिया। हिंदूवादी नेता गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी बताते हैं कि रामशिला पूजन के दौरान चले आंदोलन के बाद 1990 में सेठ बीएन पोद्दार इंटर कॉलेज में ऐतिहासिक हिंदू समागम हुआ था। जिसमें उमा भारती के उद्बोधन को सुनने के लिए सड़कें जाम हो गई थीं।
प्लेसेस ऑफ वर्सेस एक्ट बड़ी बाधा
मथुरा और काशी की मुक्ति के लिए सबसे बड़ी बाधा 1991 में बना प्लेसेस ऑफ वर्सेस एक्ट 1991 है। जब तक इस कानून को निरस्त नहीं किया जाएगा तब तक मथुरा-काशी जैसे किसी भी स्थान को मुक्त कराना संभव नहीं है। धर्म रक्षा संघ बहुत जल्द सुप्रीम कोर्ट में इस कानून को निरस्त करने के लिए अपनी याचिका दायर करने वाला है। इस कार्य में पहले से ही धर्म रक्षा संघ की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वकीलों का एक पैनल लगा हुआ है। - सौरभ गौड़, अध्यक्ष धर्म रक्षा संघ।
पंकज बताते हैं कि उन्होंने अपना भेष बदला और अपना नाम डॉ. नैपाल सिंह रख लिया। हिंदूवादी नेता गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी बताते हैं कि रामशिला पूजन के दौरान चले आंदोलन के बाद 1990 में सेठ बीएन पोद्दार इंटर कॉलेज में ऐतिहासिक हिंदू समागम हुआ था। जिसमें उमा भारती के उद्बोधन को सुनने के लिए सड़कें जाम हो गई थीं।
प्लेसेस ऑफ वर्सेस एक्ट बड़ी बाधा
मथुरा और काशी की मुक्ति के लिए सबसे बड़ी बाधा 1991 में बना प्लेसेस ऑफ वर्सेस एक्ट 1991 है। जब तक इस कानून को निरस्त नहीं किया जाएगा तब तक मथुरा-काशी जैसे किसी भी स्थान को मुक्त कराना संभव नहीं है। धर्म रक्षा संघ बहुत जल्द सुप्रीम कोर्ट में इस कानून को निरस्त करने के लिए अपनी याचिका दायर करने वाला है। इस कार्य में पहले से ही धर्म रक्षा संघ की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वकीलों का एक पैनल लगा हुआ है। - सौरभ गौड़, अध्यक्ष धर्म रक्षा संघ।
मथुरा के संत
- फोटो : अमर उजाला
राम मंदिर जैसा आंदोलन कर सकते हैं संत
जिस प्रकार अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मुक्त होकर भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है। इसी प्रकार हर हिंदू की भावना है कि जल्द से जल्द मथुरा और काशी में भी भव्य मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए। इस बात के पूरे साक्ष्य मौजूद हैं कि मुस्लिम आक्रांताओं ने अयोध्या, मथुरा, काशी समेत हजारों मंदिरों को तोड़कर हिंदुओं को अपमानित करने के लिए मस्जिदें बनाईं।
अब समय आ गया है कि इन गुलामी के प्रतीक चिह्नों को हमेशा के लिए समाप्त किया जाए। इसके लिए हिंदू समाज पूरी तरह से तैयार है। आवश्यकता पड़ने पर सभी संत मिलकर राम मंदिर के लिए किए गए अयोध्या आंदोलन जैसा आंदोलन भी कर सकते हैं। - महामंडलेश्वर स्वामी भाष्करानंद महाराज।
मथुरा-काशी में मंदिर निर्माण होना चाहिए
श्रीराम जन्मभूमि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मुक्त हुई है। उसी प्रकार कानूनी कार्रवाई करके श्रीकृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ भी मुक्त होने चाहिए। सारे सबूत हिंदुओं के इन मंदिरों के पक्ष में हैं। प्रत्येक हिंदू चाहता है कि जल्द से जल्द मथुरा और काशी में भी भव्य मंदिर का निर्माण हो। - महामंडलेश्वर स्वामी चित्तप्रकाशानंद महाराज।
जिस प्रकार अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मुक्त होकर भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है। इसी प्रकार हर हिंदू की भावना है कि जल्द से जल्द मथुरा और काशी में भी भव्य मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए। इस बात के पूरे साक्ष्य मौजूद हैं कि मुस्लिम आक्रांताओं ने अयोध्या, मथुरा, काशी समेत हजारों मंदिरों को तोड़कर हिंदुओं को अपमानित करने के लिए मस्जिदें बनाईं।
अब समय आ गया है कि इन गुलामी के प्रतीक चिह्नों को हमेशा के लिए समाप्त किया जाए। इसके लिए हिंदू समाज पूरी तरह से तैयार है। आवश्यकता पड़ने पर सभी संत मिलकर राम मंदिर के लिए किए गए अयोध्या आंदोलन जैसा आंदोलन भी कर सकते हैं। - महामंडलेश्वर स्वामी भाष्करानंद महाराज।
मथुरा-काशी में मंदिर निर्माण होना चाहिए
श्रीराम जन्मभूमि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मुक्त हुई है। उसी प्रकार कानूनी कार्रवाई करके श्रीकृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ भी मुक्त होने चाहिए। सारे सबूत हिंदुओं के इन मंदिरों के पक्ष में हैं। प्रत्येक हिंदू चाहता है कि जल्द से जल्द मथुरा और काशी में भी भव्य मंदिर का निर्माण हो। - महामंडलेश्वर स्वामी चित्तप्रकाशानंद महाराज।
मथुरा के संत
- फोटो : अमर उजाला
मुस्लिम समाज को दावा छोड़ देना चाहिए
जिस प्रकार शांतिपूर्ण तरीके से लंबी लड़ाई के बाद श्रीराम जन्मभूमि मुक्त हुई है। इसी प्रकार सौहार्दपूर्ण वातावरण में मुस्लिम समाज को मथुरा और काशी की मस्जिदों पर अपना दावा छोड़ देना चाहिए। जिससे हिन्दू-मुस्लिम समाज में एक ऐसा उदाहरण स्थापित होगा जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ाएगा। हर हिंदू अब यही चाहता है जल्द से जल्द मथुरा और काशी में भव्य मंदिर का निर्माण हो। - महंत डॉ. आदित्यानंद महाराज।
1992 जैसी स्थिति न बने
पांच सौ वर्ष से श्रीराम जन्मभूमि, कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ का विवाद चला। इन आंदोलनों में लाखों लोगों का बलिदान भी हो चुका। इतने लोगों के बलिदान के बाद भी यह स्थान हमें नहीं मिला। 1992 में अयोध्या में कलंक को आखिर राम भक्तों ने हटा दिया। वह हिंदुओं का आक्रोश ही तो था। अब 28 वर्ष के बाद मंदिर का निर्माण हो रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने कहा कि तीन को छोड़कर हिंदू किसी और स्थान पर दावा नहीं करेंगे।
अब मुसलमानों को चाहिए कि काशी और मथुरा में अपने कब्जे को स्वेछा से हटा लें और अन्य स्थान पर मस्जिद का निर्माण कराएं। हम नहीं चाहते कि देश में किसी प्रकार की अशांति फैले। हिंदू और मुसलमान मिलकर रहें और देश के विकास के सहभागी बनें। मुस्लिम धर्मावलंबी इसके लिए पहल करें। कोर्ट में इस मामले को ले जाने वाले बधाई के पात्र हैं। हम चाहते हैं कि ऐसी स्थिति न बने जो 1992 में हुई। - उमापीठाधीश्वर स्वामी रामदेवानंद सरस्वती, राम मंदिर आंदोलन में रहे शामिल।
जिस प्रकार शांतिपूर्ण तरीके से लंबी लड़ाई के बाद श्रीराम जन्मभूमि मुक्त हुई है। इसी प्रकार सौहार्दपूर्ण वातावरण में मुस्लिम समाज को मथुरा और काशी की मस्जिदों पर अपना दावा छोड़ देना चाहिए। जिससे हिन्दू-मुस्लिम समाज में एक ऐसा उदाहरण स्थापित होगा जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ाएगा। हर हिंदू अब यही चाहता है जल्द से जल्द मथुरा और काशी में भव्य मंदिर का निर्माण हो। - महंत डॉ. आदित्यानंद महाराज।
1992 जैसी स्थिति न बने
पांच सौ वर्ष से श्रीराम जन्मभूमि, कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ का विवाद चला। इन आंदोलनों में लाखों लोगों का बलिदान भी हो चुका। इतने लोगों के बलिदान के बाद भी यह स्थान हमें नहीं मिला। 1992 में अयोध्या में कलंक को आखिर राम भक्तों ने हटा दिया। वह हिंदुओं का आक्रोश ही तो था। अब 28 वर्ष के बाद मंदिर का निर्माण हो रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने कहा कि तीन को छोड़कर हिंदू किसी और स्थान पर दावा नहीं करेंगे।
अब मुसलमानों को चाहिए कि काशी और मथुरा में अपने कब्जे को स्वेछा से हटा लें और अन्य स्थान पर मस्जिद का निर्माण कराएं। हम नहीं चाहते कि देश में किसी प्रकार की अशांति फैले। हिंदू और मुसलमान मिलकर रहें और देश के विकास के सहभागी बनें। मुस्लिम धर्मावलंबी इसके लिए पहल करें। कोर्ट में इस मामले को ले जाने वाले बधाई के पात्र हैं। हम चाहते हैं कि ऐसी स्थिति न बने जो 1992 में हुई। - उमापीठाधीश्वर स्वामी रामदेवानंद सरस्वती, राम मंदिर आंदोलन में रहे शामिल।
मंदिर तोड़ने के औरंगजेब के आदेश का याचिका में है जिक्र
मथुरा। मुगल शासक औरंगजेब ने वर्ष 1670 में हिंदू राजा वीर बुंदेला द्वारा 1618 में 33 लाख की लागत से बनवाए गए भव्य मंदिर को तोड़वा दिया था। आदेश दिया था कि मंदिर में लगी मूर्ति को आगरा की जहांनारा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दबा दिया जाए।
औरंगजेब के इस आदेश का जिक्र अधिवक्ता हरीशंकर जैन ने अपनी याचिका में किया है। बताया है कि यह आदेश जादूनाथ सरकार ने 1917 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘एनिक डोट्स ऑफ औरंगजेब’ में पारसी में वर्णित आदेश का अंग्रेजी रूपांतरण कर उल्लिखित किया है। उन्होंने याचिका के पैरा 19 में बताया है कि औरंगजेब ने इस दौरान न केवल मथुरा में उद्धव वैरागी संत को जेल में डलवा दिया था बल्कि काशी विश्वनाथ मंदिर को भी तोड़ने का आदेश दिया था। यह काम औरंगजेब ने रमजान के महीने में किया था।
22 लाख की है केस वेल्यू
52 पेज की याचिका की न्यायालय में केस वेल्यू 22 लाख तय की गई है। इसी आधार पर वादीगण द्वारा कोर्ट फीस भी जमा की गई है।
सखी भाव से आई हैं अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री
श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर विराजमान श्रीकृष्ण बाल स्वरूप में हैं और बालक अपना केस स्वयं नहीं लड़ सकता है इसलिए उन्होंने अपनी सखी अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री तथा अन्य भक्तगणों के माध्यम से यह याचिका दाखिल की है।
मथुरा। मुगल शासक औरंगजेब ने वर्ष 1670 में हिंदू राजा वीर बुंदेला द्वारा 1618 में 33 लाख की लागत से बनवाए गए भव्य मंदिर को तोड़वा दिया था। आदेश दिया था कि मंदिर में लगी मूर्ति को आगरा की जहांनारा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दबा दिया जाए।
औरंगजेब के इस आदेश का जिक्र अधिवक्ता हरीशंकर जैन ने अपनी याचिका में किया है। बताया है कि यह आदेश जादूनाथ सरकार ने 1917 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘एनिक डोट्स ऑफ औरंगजेब’ में पारसी में वर्णित आदेश का अंग्रेजी रूपांतरण कर उल्लिखित किया है। उन्होंने याचिका के पैरा 19 में बताया है कि औरंगजेब ने इस दौरान न केवल मथुरा में उद्धव वैरागी संत को जेल में डलवा दिया था बल्कि काशी विश्वनाथ मंदिर को भी तोड़ने का आदेश दिया था। यह काम औरंगजेब ने रमजान के महीने में किया था।
22 लाख की है केस वेल्यू
52 पेज की याचिका की न्यायालय में केस वेल्यू 22 लाख तय की गई है। इसी आधार पर वादीगण द्वारा कोर्ट फीस भी जमा की गई है।
सखी भाव से आई हैं अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री
श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर विराजमान श्रीकृष्ण बाल स्वरूप में हैं और बालक अपना केस स्वयं नहीं लड़ सकता है इसलिए उन्होंने अपनी सखी अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री तथा अन्य भक्तगणों के माध्यम से यह याचिका दाखिल की है।