गैस रिसाव हादसा: मौत की पुष्टि नहीं, पुलिस ने कारीगरों को भेज दिया पोस्टमार्टम हाउस; विरोध के बाद लाए अस्पताल
चांदी प्लांट हादसे के बाद पुलिस ने मौत की पुष्टि के बिना ही कारीगरों को पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया। परिजन के विरोध के बाद अस्पताल लेकर आए।
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उत्तर प्रदेश के आगरा में कमिश्नरेट पुलिस ने एक बार फिर लापरवाही की। नमक की मंडी में गैस रिसाव से दो कारीगरों बेसुध मिले। पुलिस दोनों को इमरजेंसी ले जाने की बजाय लोडिंग टेंपो से सीधे पोस्टमार्टम गृह पहुंचा दिया। परिजन के हंगामा करने पर वहां से इमरजेंसी लाया गया। दोनों की मौत की पुष्टि होने पर दोबारा पोस्टमार्टम गृह भेजा गया।
यह कोई पहला मामला नहीं है, जब शवों को लोडिंग टेंपो से ले जाया गया। लॉयर्स कॉलोनी में पाइप कंपनी के मैनेजर तरुण चौहान ने बेटे और मां की हत्या के बाद आत्महत्या कर ली थी। तीन शवों को ले जाने के लिए पुलिस ने लोडिंग टेंपो को बुलाया था। मामले में अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने शिकायत की थी। शवों को ले जाने के लिए किसी वाहन की व्यवस्था का मुद्दा उठाया गया था। इसके बावजूद हालात नहीं बदले।
इस बार नमक की मंडी में मंगलवार को हादसा हुआ था। महल कॉम्प्लेक्स की तीसरी मंजिल पर कारीगर रवि और आकाश पड़े थे। उन्हें पुलिस भूतल पर लेकर आई। इसके बाद एक लोडिंग टेंपो को बुलाया गया। उनमें दोनों को रखा गया। उन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी ले जाना चाहिए था। मगर, पोस्टमार्टम गृह पहुंचा दिया गया।
चालक दोनों को उतारकर चला गया। परिजन पहुंचे तो हंगामा करने लगे। पुलिस से सवाल किया कि मौत की पुष्टि किसने की है। अस्पताल में क्यों नहीं ले गए। तब पुलिस को याद आई। दोनों को एंबुलेंस से इमरजेंसी लेकर पहुंची। इसके बाद चिकित्सक ने जांच की। ईसीजी किया। चिकित्सक ने मौत की पुष्टि की। इस पर एक घंटे बाद दोबारा पोस्टमार्टम गृह भेजा गया।
बड़ा सवाल, पुलिस ने कैसे मान लिया मृत?
नमक की मंडी से एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी की दूरी तकरीबन ढाई किलोमीटर है। गैस रिसाव की चपेट में आए कारीगरों को तत्काल इमरजेंसी लेकर आना चाहिए। मगर, पुलिस पहुंची तो दोनों को मृत मान लिया गया। इसके बाद सीधे पोस्टमार्टम गृह पहुंचा दिया।