पुलिस का वसूली खेल: चौकी में थर्ड डिग्री, वीडियो बनाया, सदमे से मर गई पत्नी, होशियारी से बचा लिए गए पुलिसकर्मी
आगरा में पुलिस ने मनोज शर्मा को चौकी में अवैध हिरासत में रखा। उसे थर्ड डिग्री भी दी। उससे पत्नी को फोन कराकर रकम मांगी गई। पत्नी ने सदमे में आकर जहर का लिया। उसकी मौत हो गई। इसके बाद भी दोषी पुलिसकर्मी आसानी से बचा लिए गए। मुकदमे में उनका कोई जिक्र नहीं है।
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के आगरा में मनोज शर्मा को पुलिस ने चौकी में अवैध हिरासत में रखा। थर्ड डिग्री दी गई। फोन स्विच आफ करा दिया। पुलिस के गुर्गे भी चौकी में बैठे रहे। पत्नी को फोन कराकर रकम मांगी गई। पत्नी की मौत के बाद मनोज को रिहा किया गया। इससे पहले वीडियो बनाया गया। इसमें कबूल कराया कि अब सट्टा नहीं खेलेगा।
इसके अलावा मुकदमा लिखा गया तो पुलिसकर्मियों का कहीं नाम नहीं लिखा गया। पुलिस को बुलाने वाले ही नामजद किए गए। परिवार के लोगों की कई बार तहरीर बदलवा कर मुकदमे में सिर्फ गुर्गे ही नामजद हुए। पुलिसकर्मियों को बचा लिया गया।
दो लाख वसूलना चाहती थी पुलिस
मामला जगनेर थाना क्षेत्र के नौनी गांव का है। गांव निवासी मनोज के परिवार के लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस चौकी में ले जाकर दो लाख रुपये वसूल करना चाहती थी। इस वसूली की वजह से मनोज की पत्नी की जान चली गई। इसके बावजूद अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों का ही बचाव किया। सूत्रों की मानें तो मनोज पर दबाव बनाया गया।
कहा गया कि वो सट्टा कराता है। पुलिस के पास गवाह आ जाएंगे। उसे जेल भेज दिया जाएगा। परिवार के लोग तहरीर में पुलिसकर्मियों को भी नामजद करना चाहते थे। मगर, तहरीर को कई बार बदलवा दिया गया। ऐसी तहरीर लिखवाई गई कि पुलिसकर्मी बच गए। परिवार वालों को ऐसा दर्शाया कि पुलिस को छोड़कर काकी और रवि ही मुख्य आरोपी हैं। उन्होंने ही साजिश की थी।
दो नामजद व चार अज्ञात के खिलाफ मुकदमा
मनोज की तहरीर पर काकी परमार, रवि पचौरी और चार अज्ञात के खिलाफ अपहरण और आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है। दोनों को मुख्य आरोपी बताया गया। यह भी आरोप लगाया कि मनोज की पत्नी को कालभी रवि पचौरी ने किया था। दो लाख रुपये की मांग की थी। सूत्रों ने बताया कि काकी और रवि पुलिस के गुर्गे हैं। उन्होंने ही पुलिस के साथ साजिश की थी। मनोज शर्मा को पकड़वाकर वसूली करना चाहते थे। मगर, मनोज का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था तो उसे पकड़ा क्यों गया।
मौत की खबर से पुलिसकर्मियों के उड़े होश
मनोज ने बताया कि गाड़ी में जबरन बैठाकर ले गए थे। चौकी में डेढ़ घंटे तक मारपीट की गई। कहा कि दो लाख रुपये दो या फिर तुम्हें छोड़ेंगे नहीं। तीन साल के लिए जेल में भिजवा देंगे। उन्होंने मना कर दिया। इसके बावजूद मारपीट की। पत्नी की मौत की खबर पुलिस कर्मियों को रात 2:30 बजे मिली। उनके होश उड़ गए। इस पर दरोगा ने घर फोन किया। मारपीट करके मोबाइल से वीडियो बनाया। उनसे बुलवाया कि जुआ सट्टा खेलता हूं। आज के बाद नहीं खेलूंगा।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
पुलिस की अवैध हिरासत का यह कोई पहला मामला नहीं है। इस बार हिरासत में रखे गए व्यक्ति की नहीं, बल्कि उसकी पत्नी की जान गई। इससे पहले लोगों की जान जा चुकी है। चार साल पहले थाना सिकंदरा पुलिस की हिरासत में राजू गुप्ता की मौत हो गई थी। मुकदमा दर्ज हुआ। एक दरोगा और दो युवक पकड़े गए। पुलिस ने हत्या की धारा को गैर इरादतन हत्या की धारा में तरमीम कर दिया। इसके बाद चार्जशीट लगा दी। मामले की जांच सीबीसीआईडी कर रही है।
जगदीशपुरा थाना पुलिस की हिरासत में सफाई कर्मी की मौत हुई थी। उस पर चोरी का आरोप था। पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। मगर, कोई गिरफ्तार नहीं हुआ। विवेचना के बाद केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई। इससे पहले भी हिरासत में मौत हो चुकी हैं। इरादतनगर में मध्य प्रदेश के आकाश की पुलिस एनकाउंट में गोली लगने से मौत हुई थी। परिजन ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमे के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने मुकदमे के आदेश किए हैं।
दो बच्चों के सिर से उठाया मां का साया
अनीता की मौत से परिवार के कोहराम मचा हुआ है। परिवार के लोगों ने बताया कि अनीता की शादी 17 साल पहले मनोज से हुई थी। मनोज दो भाइयों में छोटा है। उसके दो बेटे 17 साल का अजय और 12 साल का बिट्टू है।
परिवार के सवाल:-
- थाने की जगह चौकी पर क्यों ले गए?
- क्या थाने ले जाकर जीडी में दर्ज किया?
- पत्नी को रवि पचौरी ने क्यों काल किया? पुलिस ने क्यों नहीं?
- पुलिस के पास ऐसा कौन सा सबूत था, जो मनोज को पकड़ा गया?
- किसी की शिकायत पर पुलिस ने चौकी पर ले जाकर क्यों पीटा?