एक साल बीता: सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों के खाते साफ करने वाले साइबर अपराधी नहीं पकड़ पाई पुलिस
एक साल बीत गया, लेकिन आगरा रेंज पुलिस उन साइबर अपराधियों को नहीं पकड़ पाई, जिन्होंने सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को धोखाधड़ी का शिकार बनाया। उनके खातों से लाखों रुपये निकाल लिए।
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साइबर अपराधियों ने ट्रेजरी अफसर बनकर आगरा जोन में पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त हुए तीन कर्मचारियों के खाते से लाखों की रकम निकाली थी। पुलिस ने मुकदमे भी दर्ज किए। मगर, सालभर में एक भी अपराधी को पुलिस नहीं पकड़ सकी। पीड़ित पेंशन धारक भटकने को मजबूर हैं। उनकी जमा पूंजी साइबर अपराधी धोखाधड़ी से हड़प चुके हैं।
केस : 1
अलीगढ़ के रहने वाले एचसीपी अक्तूबर 2020 में सेवानिवृत्त हुए थे। नवंबर में साइबर अपराधियों ने उन्हें कॉल किया था। खुद को कोषागार का कर्मचारी बताया था। पेंशन लाभ दिलाने के नाम पर खातों की जानकारी ली थी। उनके खाते से 96 हजार रुपये निकाल लिए गए थे।
केस : 2
दिसंबर 2020 में अग्निशमन विभाग से सेवानिवृत्त हुए फिरोजाबाद निवासी श्रीकिशन के खाते से रकम निकली थी। उनके खाते में फंड सहित अन्य देय की राशि आई थी। साइबर अपराधी ने खुद को ट्रेजरी अफसर बताकर संपर्क किया था। पेंशन जल्दी दिलाने का लालच देकर खाते की जानकारी ली गई। इसके बाद नेट बैंकिंग से 26 लाख रुपये निकाले गए थे।
पुलिस लाइन स्थित आवास में रहने वाले रामनरेश 30 जून को फालोअर पद से सेवानिवृत्त हुए थे। 29 जुलाई को उनके पास एक कॉल आया था। खुद को ट्रेजरी अफसर बताया। इसके बाद ओटीपी पूछ लिया। 15 लाख रुपये निकाल लिए थे। उन्होंने एडीजी से शिकायत की। इसके बाद मुकदमा दर्ज किया गया था।
यह है तरीका
साइबर अपराधी अपने पास सेवानिवृत्त कर्मचारियों का डाटा रखते हैं। कॉल करने पर खुद को कोषागार का अधिकारी बताते हैं। पहले नाम बोलते हैं। इसके बाद सेवानिवृत्ति की तिथि बताते हैं। इससे सेवानिवृत्त कर्मी विश्वास करने लगता है। खाते की जानकारी लेते हैं। एटीएम कार्ड की जानकारी और ओटीपी पूछते हैं। कई बार इंटरनेट बैंकिंग चालू करके खाते से रकम निकाल लेते हैं।
कोषागार कर्मचारी फोन पर नहीं लेते जानकारी
एडीजी जोन राजीव कृष्ण के मुताबिक, फोन पर बैंक खाते और विभाग की जानकारी लेने वालों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। कोषागार की तरफ से फोन करके खाते की जानकारी नहीं ली जाती है। अपनी निजी जानकारी कोषागार पहुंचकर खुद ही देनी चाहिए।
किसी अनजान व्यक्ति को अपने मोबाइल पर आने वाले ओटीपी शेयर नहीं करना चाहिए। परिचित बनकर अगर, कोई कॉल करता है तो विश्वास नहीं करें। अगर, कोई कॉल करके जानकारी मांगता है, रुपये भेजने का झांसा देता है तो समझ जाएं साइबर अपराधी हो सकता है। साइबर ठगी होने पर पुलिस से करें शिकायत।
झारखंड-बिहार से जुड़े हैं तार
पुलिस की जांच में पता चला है कि पेंशनर्स के खाते से रकम निकालने के लिए कॉल झारखंड और बिहार से किए गए हैं। जिन खातों में रकम ट्रांसफर की गई, वह भी इन्हीं राज्यों के हैं। अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर करके निकाली गई। इस कारण ही पुलिस आरोपियों को नहीं पकड़ पा रही है। रेंज साइबर सेल के दरोगा चेतन भारद्वाज ने बताया कि मामले में विवेचना चल रही है।