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पुलिस आरक्षी भर्ती: सॉल्वर गैंग का सरगना गिरफ्तार, हिस्ट्री जानकर पुलिस हैरान; चला रहा था कंप्यूटर सेंटर
Sun, 18 Feb 2024 02:12 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sun, 18 Feb 2024 02:12 PM IST
सार
पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा में सॉल्वर गैंग का सरगना पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस ने जब उसकी हिस्ट्री खंगाली तो पता चला कि वो नाम के लिए कंप्यूटर सेंटर चलाता है। आरोपी हत्या और अवैध असलाह के मुकदमे में जेल जा चुका है।
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सॉल्वर गैंग।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पुलिस भर्ती परीक्षा में सॉल्वर गैंग का सरगना महज दिखावे के लिए कंप्यूटर सेंटर संचालित करता है। वह प्रतियोगी परीक्षा में बैठने के लिए कंप्यूटर सेंटर पर आने जाने वाले लोगों से बात करता था। वहीं पर अभ्यर्थियों को अपनी बातचीत में फंसाता था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 2014 में थाना दक्षिण से हत्या के एक मुकदमे में जेल जा चुका है। इसके साथ ही शिकोहाबाद थाना क्षेत्र से अवैध शस्त्र फैक्टरी संचालित करते हुए भी पकड़ा जा चुका है। कई अन्य परीक्षा में भी इसने सॉल्वर का काम किया है। पुलिस गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।
परीक्षार्थी नितिन व अभिषेक ने पूछताछ में बताया कि वह दोस्त है। नितिन के एक रिश्तेदार ने सरगना नगला गोकुल निवासी हरिशंकर उर्फ हरिओम से बात की थी। सरगना का कहना था कि सारी जिम्मेदारी हमारी है, हम परीक्षा तुमको पास करा देंगे। थाना प्रभारी वैभव सिंह ने बताया कि हरिशंकर पहले से ही शातिर किस्म का अपराधी है। पूछताछ में पता चला है कि वह महज दिखावे के लिए कंप्यूटर सेंटर चलाता है। कंप्यूटर सेंटर पर ही वह पूरी सेटिंग करता है। इस काम में उसका पूरा साथ रमनेश देता है।
अभ्यर्थी से पूरी बात होने के बाद किसी अन्य स्थान पर बुलाते हैं। हरिशंकर 2014 में थाना दक्षिण से हत्या के मामले में और फिर थाना शिकोहाबाद से अवैध शस्त्र फैक्टरी संचालित करने के मामले में जेल जा चुका है।
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फर्जी आधारकार्ड और फिंगरप्रिंट से कराते थे प्रवेश
हरिशंकर और रमनेश ने कंप्यूटर सेंटर संचालित करने की आड़ में कई तरह के फर्जी दस्तावेज तैयार करने का काम करता है। इसमें वह मुंह मांगी रकम वसूलते थे। पुलिस भर्ती परीक्षा में भी उन दोनों यही पैतरा आजमाया। अभ्यर्थी से 57 हजार रुपये एडवांस आने के बाद दोनों के स्थान पर जिन मुन्ना भाइयों को परीक्षा में बैठाना था। उनके फर्जी आधारकार्ड तैयार करने के साथ सिलिकॉन पेपर से फिंगरप्रिंट भी तैयार किए थे। इससे बायोमेट्रिक आसानी से होने के बाद प्रवेश मिल जाए। बाकी की रकम परीक्षा से पहले देनी थी।
अतिरिक्त नंबर दिलाने का हुआ था सौदा
दोनों अभ्यर्थियों ने गिरफ्तारी के बाद बताया कि पढ़ाई में तो दोनों होशियार हैं, लेकिन पता नहीं कहां ध्यान भटक गया। काफी दिनों बाद भर्ती निकली थी, यह मौका हाथ से जाने देना नहीं चाहता थे। इसके लिए तनाव था कि कहीं परीक्षा में अटक न जाए। परीक्षार्थी नितिन ने बताया कि उसके एक रिश्तेदार के जरिए हमारी मुलाकात हरिशंकर उर्फ हरिओम से हुई थी। हरिशंकर उर्फ हरिओम ने राजा का ताल क्षेत्र में किसी होटल में मिलने बुलाया था। जहां पूरी बात हुई थी। कहा था कि अगर तुम होशियार हो या हम, देख लो, एक टेस्ट देकर देख लो, वरना तुम खुद परीक्षा में बैठ जाना। सरगना हरिशंकर ने दोनों से 5-5 लाख रुपये में सौदा किया था।
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परीक्षार्थी नितिन व अभिषेक ने पूछताछ में बताया कि वह दोस्त है। नितिन के एक रिश्तेदार ने सरगना नगला गोकुल निवासी हरिशंकर उर्फ हरिओम से बात की थी। सरगना का कहना था कि सारी जिम्मेदारी हमारी है, हम परीक्षा तुमको पास करा देंगे। थाना प्रभारी वैभव सिंह ने बताया कि हरिशंकर पहले से ही शातिर किस्म का अपराधी है। पूछताछ में पता चला है कि वह महज दिखावे के लिए कंप्यूटर सेंटर चलाता है। कंप्यूटर सेंटर पर ही वह पूरी सेटिंग करता है। इस काम में उसका पूरा साथ रमनेश देता है।
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अभ्यर्थी से पूरी बात होने के बाद किसी अन्य स्थान पर बुलाते हैं। हरिशंकर 2014 में थाना दक्षिण से हत्या के मामले में और फिर थाना शिकोहाबाद से अवैध शस्त्र फैक्टरी संचालित करने के मामले में जेल जा चुका है।
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फर्जी आधारकार्ड और फिंगरप्रिंट से कराते थे प्रवेश
हरिशंकर और रमनेश ने कंप्यूटर सेंटर संचालित करने की आड़ में कई तरह के फर्जी दस्तावेज तैयार करने का काम करता है। इसमें वह मुंह मांगी रकम वसूलते थे। पुलिस भर्ती परीक्षा में भी उन दोनों यही पैतरा आजमाया। अभ्यर्थी से 57 हजार रुपये एडवांस आने के बाद दोनों के स्थान पर जिन मुन्ना भाइयों को परीक्षा में बैठाना था। उनके फर्जी आधारकार्ड तैयार करने के साथ सिलिकॉन पेपर से फिंगरप्रिंट भी तैयार किए थे। इससे बायोमेट्रिक आसानी से होने के बाद प्रवेश मिल जाए। बाकी की रकम परीक्षा से पहले देनी थी।
अतिरिक्त नंबर दिलाने का हुआ था सौदा
दोनों अभ्यर्थियों ने गिरफ्तारी के बाद बताया कि पढ़ाई में तो दोनों होशियार हैं, लेकिन पता नहीं कहां ध्यान भटक गया। काफी दिनों बाद भर्ती निकली थी, यह मौका हाथ से जाने देना नहीं चाहता थे। इसके लिए तनाव था कि कहीं परीक्षा में अटक न जाए। परीक्षार्थी नितिन ने बताया कि उसके एक रिश्तेदार के जरिए हमारी मुलाकात हरिशंकर उर्फ हरिओम से हुई थी। हरिशंकर उर्फ हरिओम ने राजा का ताल क्षेत्र में किसी होटल में मिलने बुलाया था। जहां पूरी बात हुई थी। कहा था कि अगर तुम होशियार हो या हम, देख लो, एक टेस्ट देकर देख लो, वरना तुम खुद परीक्षा में बैठ जाना। सरगना हरिशंकर ने दोनों से 5-5 लाख रुपये में सौदा किया था।