UP: सेना को सप्लाई होने वाली दवाओं का जखीरा बरामद, सात आरोपी गिरफ्तार; गैंगस्टर के तहत होगी कार्रवाई
आगरा में पुलिस ने सेना को सप्लाई होने वाली दवाओं का जखीरा बरामद किया है। साथ ही सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके खिलाफ गैंगस्टर के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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उत्तर प्रदेश के आगरा में पुलिस सेना को सप्लाई होने वाली दवाओं का जखीरा बरामद किया। इन दवाओं की कीमत 40 रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से ही दवाओं का जखीरा बरामद हुआ है। गैंग के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए टीम का गठन किया गया है। इन आरोपियों के खिलाफ पुलिस गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई कर रही है।
सैन्य आपूर्ति की दवाओं की कालाबाजारी सामने आने पर औषधि विभाग भी सक्रिय हो गया। टीम ने बुधवार को छह मेडिकल स्टोरों पर छापा मारा। इसमें से चार संचालक स्टोर बंद कर भाग गए। दो स्टोरों पर दवाओं की खरीद-बिक्री के बिल नहीं मिले हैं। पांच दवाओं के नमूने लेकर जांच को भेज दिए हैं। इन स्टोरों के कर्मचारियों को पुलिस ने पकड़ा है।
सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि सेना की दवाओं की कालाबाजारी के मामले में छह मेडिकल स्टोरों की सूची बनाकर औषधि निरीक्षक नवनीत कुमार यादव और कपिल शर्मा को छापे के लिए भेजा। इसमें फव्वारा स्थित बृजवासी मेडिकल स्टोर में टीम को संचालक अनीता गर्ग के पति प्रदीप गर्ग मिले।
इनके दवाओं की खरीद-बिक्री के बिल खंगाले तो ये सभी के दिखा नहीं पाए। इनके यहां से सीरोफ्लो काइफलर (सांस रोग) और पैंटोप्राजोल (एसिडिटी) का नमूना लिया है। इसी बाजार में स्थित बंसल मेडिकल स्टोर पर टीम को संचालक संजय बंसल मिले। इनके यहां दवाओं की खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड खंगाले तो ये भी सभी बिल नहीं दिखा पाए हैं।
इनके यहां से इंजेक्शन डायनापार एक्यू (दर्द निवारक), सीरोफ्लो रोटाकैप (सांस रोग) और एजिथ्रल-500 (एंटी एलर्जिक ) के नमूने लिए हैं। इनको नोटिस देकर तीन दिन में दवाओं के बिल मांगे हैं। ऐसा नहीं करने पर इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इन मेडिकल स्टोरों पर लगा मिला ताला
सहायक आयुक्त औषधि ने बताया कि सेना की दवाओं की कालाबाजारी की कार्रवाई में औषधि विभाग की टीम फव्वारा स्थित दवा बाजार स्थित श्री कलकत्ता ड्रग हाउस, दर्श फार्मा, कनिष्क मेडिको एंड सर्जिकल और मां चामुंडा मेडिकल स्टोर पर भी छापा मारा। ये बंद मिले। आसपास पूछने पर टीम को बताया कि छापे के चलते ये बंद कर भाग गए हैं। इनके खिलाफ पुलिस को नाेटिस दिया है। दुकान पर भी नोटिस लगाया जा रहा है, जिसमें इसे खोलने से पहले पुलिस-औषधि विभाग को जानकारी देना अनिवार्य होगा।
औषधि विभाग की लापरवाही, मिली भगत की हो जांच
जिला आगरा केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशु शर्मा का कहना है कि स्थानीय औषधि विभाग गैंग को नहीं पकड़ पाता, जबकि दूसरे राज्यों की टीम और पुलिस दवा माफिया पकड़ कर ले जा रही है। विभाग का कार्यालय तक रोज नहीं खुलता है। विभाग की मिलीभगत की भी जांच कराई जाए, इसके लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिख रहे हैं।
नकली, नशे, सरकारी दवाओं की भी कालाबाजारी
आगरा में नकली, नशे की दवाओं और सरकारी दवाओं की कालाबाजारी भी की जा रही है। यहां बीते सात साल में 250 करोड़ की दवाएं जब्त हुई हैं। इसमें अंंतरराष्ट्रीय गैंग है। इसमें मध्यप्रदेश, राजस्थान की सरकारी दवाएं, नकली दवा-सिरप बनाने की फैक्टरी और नशे के लिए प्रयोग होने वाली दवाओं के गोदाम भी पकड़े जा चुके हैं।