रावण दहन का विरोध: सारस्वत समाज बोला- लंकेश प्रकांड विद्वान, श्रीराम के आचार्य थे; पुतला जलाने पर लगे रोक
ओमवीर सारस्वत ने कहा कि हर साल बड़े पैमाने पर रावण का पुतला दहन किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद समाज से बुराइयां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि असल मायनों में बुराइयों का दहन करने के लिए लोगों को समाज को कोसने के बजाय अपने भीतर झांकने की जरूरत है।
विस्तार
विजयदशमी के पावन पर्व पर उत्तर प्रदेश के मथुरा शहर में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। एक तरफ जहां रावण दहन की तैयारियां जोरों पर थीं, वहीं दूसरी ओर यमुना किनारे स्थित 'जयश्री लंकेश मंदिर' में सारस्वत समाज के लोगों ने रावण (लंकेश) की पूजा-अर्चना कर जगह-जगह हो रहे पुतला दहन का कड़ा विरोध किया।
'रावण कोई साधारण पात्र नहीं'
लंकेश भक्त मंडल के संरक्षक ओमवीर सारस्वत ने इस दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा कि रावण कोई साधारण पात्र नहीं, बल्कि एक प्रकांड विद्वान और भगवान श्रीराम के आचार्य थे। उनका मानना है कि ऐसे महाज्ञानी का पुतला जलाना भगवान श्रीराम के आदर्शों और मर्यादा के बिल्कुल विपरीत है।
रावण दहन के बावजूद नहीं हुईं समाज से बुराइयां खत्म
सारस्वत ने सवाल उठाया कि हर साल बड़े पैमाने पर रावण का पुतला दहन किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद समाज से बुराइयां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि असल मायनों में बुराइयों का दहन करने के लिए लोगों को समाज को कोसने के बजाय अपने भीतर झांकने की जरूरत है।
रामलीला मंचन तक सीमित हो रावण का वध
अंत में लंकेश भक्तों ने मांग की कि रावण वध की परंपरा को केवल रामलीला के मंचन तक ही सीमित रखा जाना चाहिए और सार्वजनिक स्थलों पर होने वाले पुतला दहन पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए।
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