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एसएन मेडिकल काॅलेज: ऑडिट में खुली भवनों की, छत से झांक रहीं सरिया, छत पर भरा पानी; मासूम पर गिरा था प्लास्टर
Sun, 30 Aug 2026 11:59 AM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sun, 30 Aug 2026 11:59 AM IST
सार
एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी और मेडिसिन विभाग की इमारतों में ऑडिट के दाैरान चाैंकाने वाली तस्वीरें सामने आ रहीं हैं। जगह प्लास्टर उखड़ रहा है। छत की हालत भी खराब मिल रही है।
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एसएन मेडिकल काॅलेज में जर्जर भवन।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी और मेडिसिन विभाग (घड़ी वाली इमारत) में 10-12 जगह प्लास्टर उखड़ रहा है। छत की हालत भी खराब है। कई जगह सीलन भी है। इन दो भवनों का सर्वे हो चुका है। बाकी छह भवनों का सर्वे बाकी है।
बीते 21 अगस्त को इमरजेंसी में भर्ती खंदारी निवासी आमिर रिजवी के 10 साल के बेटे उमेर पर प्लास्टर गिर गया था। अगले दिन उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद पांच सदस्यीय टीम ने पुराने भवनों का ऑडिट शुरू किया है। इसमें 40 साल पुरानी इमरजेंसी और 70 साल पुरानी घड़ी वाली इमारत शामिल है। इसमें कई जगह सरिया भी नजर आ रही हैं। छत पर पानी भर जाता है। रंगाई-पुताई भी कई वर्षों से नहीं हुई है। ऐसे में इन दो भवनों की रिपोर्ट बनाकर मरम्मत और रंगाई-पुताई की संस्तुति की है। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि पुराने भवनों का चरणबद्ध ऑडिट किया जा रहा है। दो का हो चुका है, जिसे शासन को भेज दिया है।
सीलन से छत और दीवारें हो रहीं कमजोर
अभी बाल रोग विभाग, एकेडमिक ब्लॉक, गेस्ट हाउस, पुस्तकालय, नेत्र रोग विभाग, ओपीडी नंबर दो का ऑडिट किया जाना है। इनकी भी हालत जर्जर है। यहां कई जगह से प्लास्टर गिरने से ईंट भी कमजोर हो गई हैं। सरिया भी उखड़ी हुई हैं। इनकी एक-एक कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इनमें सबसे जर्जर बाल रोग विभाग है, जिसे क्रिटिकल केयर बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाएगा। इसमें अभी 6-8 महीने लग सकते हैं। टीम में उप प्राचार्य डॉ. टीपी सिंह, डॉ. मनीष बंसल, डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह और लोक निर्माण विभाग के दो इंजीनियर शामिल हैं।
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बीते 21 अगस्त को इमरजेंसी में भर्ती खंदारी निवासी आमिर रिजवी के 10 साल के बेटे उमेर पर प्लास्टर गिर गया था। अगले दिन उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद पांच सदस्यीय टीम ने पुराने भवनों का ऑडिट शुरू किया है। इसमें 40 साल पुरानी इमरजेंसी और 70 साल पुरानी घड़ी वाली इमारत शामिल है। इसमें कई जगह सरिया भी नजर आ रही हैं। छत पर पानी भर जाता है। रंगाई-पुताई भी कई वर्षों से नहीं हुई है। ऐसे में इन दो भवनों की रिपोर्ट बनाकर मरम्मत और रंगाई-पुताई की संस्तुति की है। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि पुराने भवनों का चरणबद्ध ऑडिट किया जा रहा है। दो का हो चुका है, जिसे शासन को भेज दिया है।
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सीलन से छत और दीवारें हो रहीं कमजोर
अभी बाल रोग विभाग, एकेडमिक ब्लॉक, गेस्ट हाउस, पुस्तकालय, नेत्र रोग विभाग, ओपीडी नंबर दो का ऑडिट किया जाना है। इनकी भी हालत जर्जर है। यहां कई जगह से प्लास्टर गिरने से ईंट भी कमजोर हो गई हैं। सरिया भी उखड़ी हुई हैं। इनकी एक-एक कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इनमें सबसे जर्जर बाल रोग विभाग है, जिसे क्रिटिकल केयर बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाएगा। इसमें अभी 6-8 महीने लग सकते हैं। टीम में उप प्राचार्य डॉ. टीपी सिंह, डॉ. मनीष बंसल, डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह और लोक निर्माण विभाग के दो इंजीनियर शामिल हैं।
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