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SN Medical College: बच्चे की सांस नली में फंस गई प्लास्टर की पपड़ी, चिकित्सकों ने ऐसे बचाई जान
Sat, 28 Dec 2024 01:20 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 28 Dec 2024 01:20 PM IST
सार
एसएन मेडिकल कॉलेज में एक ऐसा बच्चा आया, जिसकी सांस नली में प्लास्टर की पपड़ी फंस गई। एसएन मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ब्रोंकोस्कोपी कर इस पपड़ी को निकाला।
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बच्चे की सांस नली में फसी प्लास्टर की पपड़ी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा के अछनेरा के 18 महीने के बच्चे यश ने घर की दीवार से प्लास्टर की पपड़ी निकालकर खा ली। यह पपड़ी उसकी सांस की नली में फंस गई। सांस लेने में दिक्कत आई तो परिजन बृहस्पतिवार रात 3:30 बजे एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने रात में ही ब्रोंकोस्कोपी करके पपड़ी निकाली। हालत में सुधार के बाद शुक्रवार शाम को उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।
एसएन मेडिकल कॉलेज के ईएनटी सर्जन डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि 18 महीने के यश को सांस लेने में परेशानी हो रही थी। बालक का एक्सरे कराया गया। इसमें सब-कुछ ठीक मिला। सीटी स्कैन के लिए भेजा गया लेकिन बालक को सांस लेने में परेशानी हो रही थी इसलिए सीटी स्कैन नहीं हो सका।
तबीयत बिगड़ने पर इमरजेंसी ब्राेंकोस्कोपी की गई। इसमें सांस की नलिका में बाहरी वस्तु फंसी हुई दिखाई दी, इसे बाहर निकाला गया। यह घर की दीवारों से गिरने वाले प्लास्टर की पपड़ी थी। पिता विष्णु ने बताया कि बच्चे ने बाहर खेलते हुए पपड़ी खा ली थी, जो पेट में जाने की जगह सांस की नली में फंस गई। समय पर ब्रोंकोस्कोपी नहीं की जाती तो जान का खतरा था।
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सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सक के पास जाएं
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एसएन मेडिकल कॉलेज के ईएनटी सर्जन डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि 18 महीने के यश को सांस लेने में परेशानी हो रही थी। बालक का एक्सरे कराया गया। इसमें सब-कुछ ठीक मिला। सीटी स्कैन के लिए भेजा गया लेकिन बालक को सांस लेने में परेशानी हो रही थी इसलिए सीटी स्कैन नहीं हो सका।
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तबीयत बिगड़ने पर इमरजेंसी ब्राेंकोस्कोपी की गई। इसमें सांस की नलिका में बाहरी वस्तु फंसी हुई दिखाई दी, इसे बाहर निकाला गया। यह घर की दीवारों से गिरने वाले प्लास्टर की पपड़ी थी। पिता विष्णु ने बताया कि बच्चे ने बाहर खेलते हुए पपड़ी खा ली थी, जो पेट में जाने की जगह सांस की नली में फंस गई। समय पर ब्रोंकोस्कोपी नहीं की जाती तो जान का खतरा था।
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बच्चे क्या खा रहे हैं, इस पर निगाह रखें
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