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पितरों की याद में तीर्थ नगरी में देवस्थान बनवाते हैं श्रद्धालु

Sun, 13 Sep 2020 10:46 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 13 Sep 2020 10:46 PM IST
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pitr paksh
कासगंज की सोरों तीर्थनगरी में श्रद्धालुओं द्वारा अपने पितरों की याद में बनवाये गए देवस्थान - फोटो : KASGANJ
सोरों(कासगंज)। श्राद्ध पक्ष में तीर्थनगरी में पितृों को तर्पण करने का विशेष महत्व है । इसी महत्व के तहत यहां प्रतिदिन श्रद्धालु दूरदराज से पहुंच रहे हैं। यहां श्रद्धालु पितृों की याद में हरिपदी किनारे छोटे-छोटे बनवाए गए देवस्थानों में जलदान कर याद कर रहे हैं।
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रविवार को एकादशी पर भी श्रद्धालुओं ने श्राद्ध कर्म किए। इन देव स्थानों में श्रद्धालुओं ने अपने पितृों की पट्टिका लगवा रखी है। सोरों में रविवार को एकादशी पर दिवंगत पितृों को नम आंखों से याद करते हुए श्रद्धालुओं ने जलदान कर श्राद्धपूजा कराई। जगह जगह कुल पुरोहितों ने वेद मंत्र पढ़कर धार्मिक कर्मकांड कराए। तीर्थनगरी के भागीरथी गंगा घाट, वाराह घाट, सोमेश्वर मंदिर घाट, बरी वाले घाट, लाल घाट पर श्रद्धालुओं की सर्वाधिक भीड़ रही।
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पुरोहितों की बात-
- श्राद्ध पूजा कराते समय पितृों से प्रार्थना की जाती है के वे अपने वंशजों के निकट आएं। उनका आसन ग्रहण करें, पूजा स्वीकार करें और उनके क्षुद्र अपराधों से अप्रसन्न न हों। उनका आह्वान व्योम में नक्षत्रों के रचयिता के रूप में किया गया है। परलोक में दो ही मार्ग हैं देवयान अथवा पितृयान। पितृगणों से प्रार्थना है कि देवयान से मर्त्यो (मृत्यु लोक में निवास करने वाले अपने वशंजों) की सहायता के लिए अग्रसर हों।
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-पंडित वीरेंद्र व्यास
- श्रद्धालु अपने पितृों की याद को अक्षुण्ण रखने के लिए तीर्थनगरी में हरिपदी किनारे देवस्थान बनवाते हैं। इन देवस्थानों में पत्थर पर अपने पूर्वजों का नाम अंकित कराकर रखते हैं। नरगरपालिका द्वारा देवस्थान बनवाने के लिए हरिपदी किनारे भूमि निश्चित की गई है। पालिका प्रतिदिन इस स्थान की धुलाई सफाई कराती है। तीर्थनगरी में पालिका द्वारा चिह्नित स्थान पर पांच सौ से अधिक देवस्थान बने हैं। कुछ श्रद्धालु अपने पितृों की याद में कमरा बनवाने, फर्श बनवाने, प्याऊ लगाने आदि का संकल्प पूरा कर पितृों के प्रति कृतज्ञता का भाव प्रकट करते हैं।
- पंडित अंशुल भारद्वाज।
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