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Agra News: अधर में लटकी अटेर पुल की अनुमति, जान जोखिम में डालकर सफर

Sun, 13 Sep 2026 02:18 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Updated Sun, 13 Sep 2026 02:18 AM IST
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Permission for Ater bridge hanging in the balance, traveling at risk of life
बाह: अटेर पुल पर लोहे की सीढ़ी से जान जो​खिम में डाल कर चढ़ते लोग
बाह। मध्य प्रदेश के भिंड जिले के अटेर और उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के जैतपुर के बीच चंबल नदी पर बन रहा अटेर पुल वर्षों बाद भी अधूरा पड़ा है। उत्तर प्रदेश की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) न मिलने के कारण परियोजना का विस्तार कार्य अटका हुआ है, जिसके चलते दोनों राज्यों के 100 से अधिक गांवों के ग्रामीण जान जोखिम में डालकर लोहे की सीढ़ी के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं।
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चंबल नदी के अटेर घाट पर वर्ष 2016 में पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। साल 2022 में आई बाढ़ में पुल के पिलर डूब गए थे। बाढ़ के मद्देनजर पुल की लंबाई में 300 मीटर का अतिरिक्त विस्तार करने के साथ ही ऊंचाई बढ़ाने का निर्णय लिया था। इसके लिए शासन स्तर पर 43.46 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हुआ था। मध्य प्रदेश की ओर करीब 50 मीटर हिस्से के निर्माण के लिए पहुंच मार्ग काट दिया गया है, जिसकी वजह से ग्रामीणों को मजबूरन सीढ़ी चढ़कर जैतपुर क्षेत्र में पैदल आना जाना पड़ रहा है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश की सीमा में 250 मीटर का काम होना है। उत्तर प्रदेश के हिस्से में वन विभाग से राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के इको-सेंसिटिव जोन के नियमों के तहत औपचारिक अनुमति नहीं मिल पाई है। अटेर पुल पर आवागमन के लिए लोहे की सीढ़ी लगाई गई है। सीढ़ी पर चढ़ कर दोनों राज्यों के ग्रामीण पुल पर पहुंचते हैं, फिर पैदल चलकर अपने गंतव्य के लिए ऑटो, टैक्सी का सहारा लेने को मजबूर हैं। पुल का निर्माण पूरा कराने के लिए ग्रामीणों ने अटेर का बाजार बंद कर धरना प्रदर्शन किया, आश्वासन तो मिला, लेकिन निर्माण कार्य अधर में लटका है। भाकियू नेता भानु प्रताप सिंह चौहान ने बताया कि नंदगवां में धरना प्रदर्शन में पुल की एनओसी मिलने का आश्वासन मिला था। यदि जल्द ही एनओसी नहीं मिली तो फिर से आंदोलन को मजबूर होंगे।
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उत्तर प्रदेश की ओर से एनओसी न मिलने के कारण फिलहाल निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। उच्चाधिकारियों के माध्यम से पत्र लिखकर अनुमति प्रक्रिया में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि मध्य प्रदेश सीमा के अंतर्गत लगभग 20 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है।- जोगिंदर सिंह, कार्यपालन इंजीनियर, सेतु निर्माण संभाग, ग्वालियर
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