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इलाज को तरसते मरीजः आइसोलेशन वार्ड में पांच घंटे तड़पी महिला, बुजुर्ग की गई जान

Mon, 11 May 2020 12:00 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Mon, 11 May 2020 12:00 AM IST
सार

भगंदर के मरीज को जबरन किया डिस्चार्ज, फैला संक्रमण

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Patient was Suffering For Five Hours In Isolation Ward Sn Medical
एसएन मेडिकल कालेज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एसएन मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में चिकित्सकों की लापरवाही सामने आई है। आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीज पांच घंटे तक दर्द से कराहती रही, लेकिन कोई नहीं आया। जब उसने वीडियो बनाकर डाला तब कहीं जाकर उसे इंजेक्शन लगाने चिकित्सक पहुंचे।
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न्यू आगरा रहने वाली शमा बानो (32) को पित्त की थैली में पथरी है। निजी लैब में कोरोना वायरस पॉजीटिव आने के बाद नौ मई को एसएन में भर्ती है। आरोप है कि बीते दिन रात करीब सात बजे से तेज दर्द हुआ। चिकित्सक और स्टॉफ नर्स को बुलाने के लिए वार्ड में लगे फोन मिलाती रहीं, लेकिन कोई नहीं आया।
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करीब पांच घंटे के बाद चिकित्सक आए और इंजेक्शन लगाकर चले गए। ऐसे में उसने पति को फोन कर जानकारी दी, इस पर उन्होंने वीडियो बनाकर भेजने के लिए कहा। पति आसिफ खान का आरोप है कि पत्नी पांच घंटे तक दर्द से तड़पती रही, लेकिन कोई देखने नहीं आया। इसका ऑपरेशन भी नहीं किया जा रहा है। कई बार ऑपरेशन के लिए कह चुके हैं, खून की भी कमी है। ऐसे में मुख्यमंत्री के नाम वीडियो बनाया है।
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निजी अस्पताल में भी नहीं किया ऑपरेशन
आसिफ का कहना है कि एमजी रोड स्थित निजी अस्पताल में पत्नी का इलाज चल रहा था। चिकित्सक ने पित्त की थैली के ऑपरेशन की बात कही थी, इसके लिए उन्होंने प्राइवेट पैथोलॉजी लैब में कोरोना वायरस की जांच कराई, साढ़े चार हजार रुपये देकर जांच हुई, इसमें पॉजीटिव रिपोर्ट आई, इसके बाद डॉक्टर ने ऑपरेशन करने से मना कर दिया और पुलिस को सूचना दी पुलिस मरीज को लेकर एसएन में भर्ती कराने आई। 

भगंदर के मरीज को जबरन किया डिस्चार्ज, फैला संक्रमण

एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी से भगंदर के मरीज को जबरन डिस्चार्ज कर दिया। इलाज न मिलने से मरीज के पैर तक संक्रमण फैल गया है। घर पर ही मरीज दर्द से कराह रहा है।

अवधपुरी निवासी विष्णु कुमार (32) मशीन ऑपरेशन का कार्य करता है। इसे भंगदर की परेशानी है, बीते सप्ताह इसके कूल्हे पर फोड़ा हो गया। इसमें मवाद रिसने के बाद एसएन इमरजेंसी दिखाने गया। यहां चिकित्सकों ने दवा लिख दी और कहा कि तीन मई के बाद आ जाना ऑपरेशन कर दिया जाएगा।

दवा से आराम नहीं मिला और जख्म बढ़ने लगा। दर्द होने पर इसे आठ मई को इमरजेंसी लेकर गए जहां उसे भर्ती कर लिया। इसके भाई संतोष कुमार का आरोप है कि जख्म लगातार बढ़ रहा है, इस पर चिकित्सकों ने कहा कि यहां इलाज नहीं हो पाएगा, इसे दिल्ली या फिर अन्य अस्पताल लेकर चले जाओ।

शनिवार की रात को ही जबरन डिस्चार्ज करने लगे, मना करने पर धमकाने लगे, ऐसे में रविवार की सुबह डिस्चार्ज कर दिया। रुपये न होने पर वह मरीज को घर ले गया, यहां अब उसके पैर में संक्रमण फैल गया है। दर्द से कराह रहा है, कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से इस मामले में पक्ष जानने के लिए कई बार फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। उनको मैसेज भी किया, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया।

उपचार में देरी से बुजुर्ग की जान गई
शमसाबाद ग्राम पंचायत कोलार झील के निवासी सत्य प्रकाश शर्मा (67) की उपचार मिलने में देरी के कारण मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि निजी अस्पतालों ने भर्ती नहीं किया।

सात मई को दोपहर करीब दो बजे उन्हें बात करते-करते बहुत तेज पसीना आया और देखते ही देखते वे बेहोश हो गए। परिजनों ने बताया कि वे उन्हें लेकर कई निजी अस्पतालों में गए। किसी ने भी भर्ती नहीं किया गया। काफी देर के बाद एक चिकित्सक ने उन्हें देखते ही आगरा ले जाने की सलाह दी। इसमें दिक्कत यह आई कि प्राइवेट टैक्सी वाले लॉकडाउन के कारण राजी नहीं हुए।

108 नंबर पर कॉल किया तो उन्होंने बताया कि डॉक्टर के द्वारा सरकारी अस्पताल के लिए रेफर किए जाने पर ही यह सेवा मिल सकती है। इस पर वे फिर से डॉक्टर के पास गए। उन्होंने आगरा के लिए रेफर किया। वे जिला अस्पताल पहुंचे। यहां चिकित्सक ने बताया कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा है। तब तक तबीयत बहुत बिगड़ चुकी थी। उसी रात को उपचार के दौरान दो बजे उनकी मृत्यू हो गई।
 

शव के लिए काटने पड़े चक्कर 
पोस्टमार्टम हाउस पर कर्मचारी ने कहा कि कोरोना जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही पोस्टमार्टम होगा। रिपोर्ट लेने के लिए उनके बेटे जालमा तक (लगभग 10 किमी) पैदल चलकर गए। वहां से जिला अस्पताल भेज दिया। इसी तरह आठ मई को पूरा दिन बीता। नौ मई को रिपोर्ट आई। तब शव दिया गया।
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