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Gaganyaan Mission: आसमान में मोर्टार से खोला 'गगनयान' का पैराशूट, एडीआरडीई की टीम ने किया सफल ट्रायल
Sat, 19 Nov 2022 09:10 AM IST
आगरा ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 19 Nov 2022 09:10 AM IST
सार
गगनयान मिशन का पैराशूट आगरा स्थित एडीआरडीई में तैयार किया जा रहा है। इसकी मदद से परिक्रमा के बाद अंतरिक्ष यात्री क्रू माड्यूल से धरती पर लौट सकेंगे।
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गगनयान का पैराशूट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के गगनयान मिशन का पैराशूट रिकवरी सिस्टम आगरा स्थित हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास संस्थापन (एडीआरडीई) में तैयार किया जा रहा है। एडीआरडीई की टीम ने शुक्रवार को झांसी के पास ड्रॉपिंग जोन में पैराशूट रिकवरी सिस्टम का परीक्षण (ट्रायल) किया।
आईएल-76 विमान से आसमान में मोर्टार से पैराशूट दागा गया। यह परीक्षण सफल रहा। 5000 किलोग्राम वजन के पेलोड को सही तरीके से जमीन पर उतार दिया गया। इसकी मदद से परिक्रमा के बाद अंतरिक्ष यात्री क्रू माड्यूल से धरती पर लौट सकेंगे।
एडीआरडीई के निदेशक डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि गगनयान पैराशूट के अब तक किए गए सारे परीक्षण सफल रहे हैं। शुक्रवार को गगन यान के सबसे बड़े पैराशूट को क्लस्टर मोड में मोर्टार से छोटे पैराशूट की सहायता से सफलतापूर्वक आसमान में खोला गया।
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आईएल-76 विमान से आसमान में मोर्टार से पैराशूट दागा गया। यह परीक्षण सफल रहा। 5000 किलोग्राम वजन के पेलोड को सही तरीके से जमीन पर उतार दिया गया। इसकी मदद से परिक्रमा के बाद अंतरिक्ष यात्री क्रू माड्यूल से धरती पर लौट सकेंगे।
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एडीआरडीई के निदेशक डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि गगनयान पैराशूट के अब तक किए गए सारे परीक्षण सफल रहे हैं। शुक्रवार को गगन यान के सबसे बड़े पैराशूट को क्लस्टर मोड में मोर्टार से छोटे पैराशूट की सहायता से सफलतापूर्वक आसमान में खोला गया।
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मिशन ट्रायल के लिए तैयार होगा
निदेशक ने बताया कि यह ह्यूमन रेटेड पैराशूट सिस्टम है, जो यात्रा के दौरान किसी भी इमरजेंसी में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित वापस लाने में सक्षम है। ऐसे एक और परीक्षण के बाद ये पैराशूट सिस्टम मिशन ट्रायल के लिए तैयार हो जाएगा।
क्रू माड्यूल में पैराशूट रिकवरी सिस्टम
भारतीय मानवयुक्त अंतरिक्ष यान (गगन यान) भेजने की तैयारी चल रही है। अंतरिक्ष कैप्सूल में तीन यात्री होंगे। यात्री 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करेंगे। परिक्रमा पूरी करने के बाद क्रू माड्यूल से धरती पर लौटेंगे। इसमें पैराशूट रिकवरी सिस्टम लगा होगा। इसके कई ट्रायल हो चुके हैं।