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पंडित जसराज: ताजमहल के साए में चार बार चला सुरों को जादू, यह ख्वाहिश रह गई अधूरी
Tue, 18 Aug 2020 01:38 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 18 Aug 2020 01:38 AM IST
सार
- ताजमहोत्सव में किया गया था आमंत्रित, एएसआई ने नहीं दी थी अनुमति
- जताई थी नाराजगी, शिल्पग्राम के मुख्य मंच पर कराया गया था कार्यक्रम
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पंडित जसराज के साथ ग़ज़ल गायक सुधीर नारायण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सुरों के सरताज पंडित जसराज आगरा में ताजमहल के साए तले चार बार अपने सुरों का जादू चलाने के लिए आए, लेकिन उनकी फतेहपुर सीकरी में तानसेन चबूतरे पर शास्त्रीय गायन की ख्वाहिश अधूरी ही रही। उन्हें ताज महोत्सव में खासतौर पर अनूप तालाब के तानसेन चबूतरे पर गाने के लिए आमंत्रित किया गया था।
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लेकिन तब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से अनुमति न मिल पाने के कारण उनका कार्यक्रम नहीं हो पाया। इसके बाद शिल्पग्राम के मुख्य मंच पर कार्यक्रम कराया गया। पंडित जसराज तानसेन चबूतरे पर प्रस्तुति देने के लिए ही सहमत हुए थे, लेकिन उनकी इच्छा पूरी न होने पर नाराजगी भी जताई।
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आगरा से पंडित जसराज का नाता सबसे पहले 1975 में तानसेन संगीत सम्मेलन से जुड़ा था। यह समारोह आंबेडकर विश्वविद्यालय परिसर में हुआ था। तभी से उनके मन में यह ख्वाहिश थी कि जिस जगह तानसेन ने फतेहपुर सिकरी में शहंशाह अकबर के सामने सुरों की सरिता बहाई, उसी जगह उन्हें प्रस्तुति देनी है। ऐसा मौका उनके सामने आया भी लेकिन एएसआई की अनुमति न मिल पाने के कारण उन्हें मायूस होना पड़ा।
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जताई थी नाराजगी
गजल गायक सुधीर नारायण बताते हैं कि अनुमति न मिलने पर पंडित जसराज नाराज भी हुए। पूरा दिन उन्हें आयोजक और अधिकारी मनाते रहे थे। पंडित जसराज के निधन की खबर सुनकर शहर के शास्त्रीय संगीत प्रशंसक बेहद दुखी हुए। ताज महोत्सव में वो एक बार शिल्पग्राम के मुक्ताकाशीय मंच और एक बार सूरसदन में प्रस्तुति दे चुके हैं।
सुधीर नारायण बताते हैं कि दो साल पहले न्यूजर्सी में 17 जुलाई को पंडित जसराज की पुस्तक रसराज का विमोचन काउंसलेट जनरल संदीप चक्रवर्ती ने किया था। उसमें पंडित जसराज ने उन्हें भी आमंत्रित किया था। उस किताब के विमोचन पर उनकी आखिरी मुलाकात हुई थी। हालांकि वह उनसे ताज महोत्सव में भी मिल चुके थे। उनके आगरा में चार बार कार्यक्रम हुए हैं। चारों बार सुधीर नारायण को उनके साथ रहने का मौका मिला।
1975 में दी थी शानदार प्रस्तुति
संगीतज्ञ पंडित केशव तलेगांवकर ने पंडित जसराज के निधन पर श्रद्धांजलि दी और बताया कि 1975 में होटल मुगल के हॉल में उन्होंने शानदार प्रस्तुति दी थी जिसके बाद लोगों का रुझान शास्त्रीय संगीत के प्रति बढ़ने लगा। संगीत कला केंद्र की निर्देशिका प्रतिभा तलेगांवकर, गजेंद्र सिंह, रविन्द्र तलेगांवकर, रवि भटनागर, नीलू शर्मा, देवाशीष गांगुली, सुभाष सक्सेना ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
सुधीर नारायण बताते हैं कि दो साल पहले न्यूजर्सी में 17 जुलाई को पंडित जसराज की पुस्तक रसराज का विमोचन काउंसलेट जनरल संदीप चक्रवर्ती ने किया था। उसमें पंडित जसराज ने उन्हें भी आमंत्रित किया था। उस किताब के विमोचन पर उनकी आखिरी मुलाकात हुई थी। हालांकि वह उनसे ताज महोत्सव में भी मिल चुके थे। उनके आगरा में चार बार कार्यक्रम हुए हैं। चारों बार सुधीर नारायण को उनके साथ रहने का मौका मिला।
1975 में दी थी शानदार प्रस्तुति
संगीतज्ञ पंडित केशव तलेगांवकर ने पंडित जसराज के निधन पर श्रद्धांजलि दी और बताया कि 1975 में होटल मुगल के हॉल में उन्होंने शानदार प्रस्तुति दी थी जिसके बाद लोगों का रुझान शास्त्रीय संगीत के प्रति बढ़ने लगा। संगीत कला केंद्र की निर्देशिका प्रतिभा तलेगांवकर, गजेंद्र सिंह, रविन्द्र तलेगांवकर, रवि भटनागर, नीलू शर्मा, देवाशीष गांगुली, सुभाष सक्सेना ने श्रद्धांजलि अर्पित की।