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गो माता का दर्द: इनके लिए तमाम हैं योजनाएं...फिर भी ऐसी हो रही दुर्दशा, देखकर रो पड़ेंगे
Fri, 11 Jul 2025 12:10 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 11 Jul 2025 12:10 PM IST
सार
गोवंश संरक्षण के दावे सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गए हैं। इनके लिए प्रदेश की सरकार पानी की तरह पैसा तो बहा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
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घायल गाय
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में गोवंश का दर्द किसी को दिखाई नहीं दे रहा है। चौंकाने वाला दृश्य है बेवर क्षेत्र का, जहां घायल गोवंशों की दुर्दशा हो रही है। घायल गोवंश बेसहारा होकर खेतों में और सड़कों पर घूमते नजर आते हैं। गोवंश संरक्षण के लिए सरकार द्वारा काफी बजट खर्च कर बनाई गई गोशालाएं भी बेअसर साबित हो रही हैं।
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प्रशासनिक अधिकारियों को विभिन्न अभियानों के माध्यम से गोवंशों को गोशालाओं में रखकर देखभाल करने के तमाम दावे कागजी साबित हो रहे हैं। अभी भी बड़े पैमाने पर क्षेत्र में घायल गोवंशेां को सड़कों पर तथा खेतों में विचरण करते देखा जा सकता है। गोशाला संचालक और ग्राम प्रधान इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। अधिकारियों के निरीक्षण भी बेअसर साबित हो रहे हैं।
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विकासखंड क्षेत्र के ग्राम परौखा में कई दिनों से दो गोवंश मेडिकल सहायता उपलब्ध न होने से घायल हालत में घूम रहे हैं। क्षेत्र में पशुओं को मेडिकल सुविधाएं दिलाने के लिए पशु चिकित्सक हैं। कस्बा में वेटनरी वैन भी है। लेकिन घायल गोवंशों को मेडिकल सुविधा नहीं मिल रही है।
बझेरा रोड तिराहा पर भी एक पैर से चोटिल गाय लंबे समय से क्षेत्र में घूम रही है। बझेरा रोड तिराहे से कुछ ही दूरी पर नगर पंचायत द्वारा संचालित कान्हा पशु आश्रय गृह भी संचालित है। कस्बे के लोगों ने घायल घूम रहे गोवंशों को गोशाला में पहुंचाकर उनका उपचार कराने की मांग की है।