{"_id":"5e2f1fa88ebc3e4add5fe3f0","slug":"padam-bhushan-dp-sinha-kasganj-news-agr4267006172","type":"story","status":"publish","title_hn":"कासगंज में जन्मे संस्कृति के संवहक डीपी सिन्हा को मिला पदमश्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कासगंज में जन्मे संस्कृति के संवहक डीपी सिन्हा को मिला पदमश्री
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कासगंज। पद्मश्री पुरस्कार पाने वालों की फेहरिस्त में शामिल डीपी सिन्हा कासगंज शहर में जन्मे जरूर हैं, लेकिन उन्हें यह याद नहीं कि उनका जन्म किस मोहल्ले के किस घर में हुआ था। संस्कृति के संवाहक डीपी सिन्हा को इस सम्मान की घोषणा से शहर का नाम रोशन हुआ है।
पद्मश्री डीपी सिन्हा का जन्म 2 मई 1935 में कासगंज में हुआ। उनके पिता एएन सिन्हा यहां एक्साइज विभाग में इंस्पेक्टर थे। कासगंज में वे कहां रहते थे, यह बात उन्हें अब याद नहीं है। उनसे जब यहां की गली मोहल्ले के बारे में पूछा तो वह नहीं बता सके। जन्म के बाद उनके पिताजी का कहीं दूसरी जगह तबादला हो गया था।
मौजूदा समय में वह नोएडा में रहते हैं। लंबे समय तक उन्होंने प्रदेश में सांस्कृतिक गतिविधियों के कई जिम्मेदार पदों पर कर्मठता से काम किया। वह रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हैं। अमर उजाला को उन्होंने फोन पर बताया कि यह सम्मान उनकी कला साधना का सम्मान है। वे उत्तर प्रदेश संगीत नाट्य अकादमी के अध्यक्ष रह चुके हैं। वहीं ललित कला अकादमी और सांस्कृतिक कार्य उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्हें पहले भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं। तुलसी, खुसरो की भूमि पर जन्मे देश के गौरव बने सिन्हा ने एक बार फिर कासगंज को सुर्खियों में ला दिया है। डीपी सिन्हा ने कई पुस्तकें भी लिखी हैं। इनमें कथा एक कंस की, सांझ-सवेरा, नाट्य रचना धर्मिता सहित आदि शामिल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
पद्मश्री डीपी सिन्हा का जन्म 2 मई 1935 में कासगंज में हुआ। उनके पिता एएन सिन्हा यहां एक्साइज विभाग में इंस्पेक्टर थे। कासगंज में वे कहां रहते थे, यह बात उन्हें अब याद नहीं है। उनसे जब यहां की गली मोहल्ले के बारे में पूछा तो वह नहीं बता सके। जन्म के बाद उनके पिताजी का कहीं दूसरी जगह तबादला हो गया था।
विज्ञापन
मौजूदा समय में वह नोएडा में रहते हैं। लंबे समय तक उन्होंने प्रदेश में सांस्कृतिक गतिविधियों के कई जिम्मेदार पदों पर कर्मठता से काम किया। वह रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हैं। अमर उजाला को उन्होंने फोन पर बताया कि यह सम्मान उनकी कला साधना का सम्मान है। वे उत्तर प्रदेश संगीत नाट्य अकादमी के अध्यक्ष रह चुके हैं। वहीं ललित कला अकादमी और सांस्कृतिक कार्य उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्हें पहले भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं। तुलसी, खुसरो की भूमि पर जन्मे देश के गौरव बने सिन्हा ने एक बार फिर कासगंज को सुर्खियों में ला दिया है। डीपी सिन्हा ने कई पुस्तकें भी लिखी हैं। इनमें कथा एक कंस की, सांझ-सवेरा, नाट्य रचना धर्मिता सहित आदि शामिल हैं।
विज्ञापन