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UP: मां को खोया, लकवे से जूझी, मौत को दी मात; नन्ही हथिनी बानी की कहानी कर देगी भावुक
Fri, 05 Jun 2026 08:24 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 05 Jun 2026 08:24 AM IST
सार
ट्रेन हादसे में मां को खोने और लकवे का शिकार होने के बावजूद नन्ही हथिनी बानी ने जिंदगी की जंग जीत ली। चुरमुरा के हाथी अस्पताल में विशेष उपचार के बाद वह अब स्वस्थ होकर अन्य हाथियों के साथ खुले वातावरण में घूम रही है।
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हथिनी बानी
- फोटो : वाइल्ड लाइफ एसओएस
विस्तार
आगरा के सिकंदरा से 24 किलोमीटर दूर चुरमुरा का हाथी अस्पताल, जिसने बानी समेत कई हाथियाें को जिंदगी को न केवल बचाया है, बल्कि इलाज के बाद उन्हें फिर से प्राकृतिक वातावरण देने में मदद की है। उत्तराखंड में ट्रेन की टक्कर से घायल हुई 9 माह की हथिनी बानी ने इस हादसे में अपनी मां को खो दिया था।
टक्कर से पीठ में लकवा मार गया। चुरमुरा के हाथी अस्पताल ने आयुर्वेद, एक्यूपंक्चर के इस्तेमाल से बानी की सेहत सुधार दी और अब वह अपने अन्य साथियों के साथ चुरमुरा के मैदान और जंगल में घूमती नजर आती है। हाथियों की मौजूदगी से चुरमुरा और इसके आसपास के क्षेत्रों का माहौल बदल गया है।
वन्य जीवों के लिए काम करने वाली संस्था वाइल्डलाइफ एसओएस टीम ने हाथी अस्पताल में बानी की तरह 30 से ज्यादा हाथियों को इलाज के बाद उनके पैरों पर खड़ा करने में मदद की है। इन हाथियों को ठीक करने के लिए आयुर्वेद, हाइड्रोथेरेपी और एक्यूपंक्चर सहित कई उपचार विधियों का प्रयोग किया गया।
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एसओएस की टीम के केयरटेकर मिट्टी के गड्ढे में 9 माह की बानी को कभी खिलाते तो कभी पानी में अठखेलियां कराते। एसओएस के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि बानी अन्य हाथियों के लिए प्रेरणा है। उसकी मौजूदगी से चुरमुरा के हाथी केंद्र का माहौल बदल चुका है।
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टक्कर से पीठ में लकवा मार गया। चुरमुरा के हाथी अस्पताल ने आयुर्वेद, एक्यूपंक्चर के इस्तेमाल से बानी की सेहत सुधार दी और अब वह अपने अन्य साथियों के साथ चुरमुरा के मैदान और जंगल में घूमती नजर आती है। हाथियों की मौजूदगी से चुरमुरा और इसके आसपास के क्षेत्रों का माहौल बदल गया है।
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वन्य जीवों के लिए काम करने वाली संस्था वाइल्डलाइफ एसओएस टीम ने हाथी अस्पताल में बानी की तरह 30 से ज्यादा हाथियों को इलाज के बाद उनके पैरों पर खड़ा करने में मदद की है। इन हाथियों को ठीक करने के लिए आयुर्वेद, हाइड्रोथेरेपी और एक्यूपंक्चर सहित कई उपचार विधियों का प्रयोग किया गया।
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एसओएस की टीम के केयरटेकर मिट्टी के गड्ढे में 9 माह की बानी को कभी खिलाते तो कभी पानी में अठखेलियां कराते। एसओएस के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि बानी अन्य हाथियों के लिए प्रेरणा है। उसकी मौजूदगी से चुरमुरा के हाथी केंद्र का माहौल बदल चुका है।