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सावधान ! जालसाजों ने इंटरनेट पर बिछा रखा है ठगी का जाल, ऐसे बनाते हैं लोगों को शिकार

Fri, 15 Nov 2019 05:11 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 15 Nov 2019 05:11 PM IST
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online fraud in the name of packers and movers in agra
प्रतीकात्मक तस्वीर
अगर आप अपने घर सामान दूसरे शहर में शिफ्ट करने के लिए पैकर्स-मूवर्स को बुक कर रहे हैं, तो सतर्क हो जाइये। हो सकता है कि आप ठगी का शिकार हो जाएं। आगरा में पैकर्स एंड मूवर्स के नाम पर लोगों के साथ ठगी का धंधा जोरों पर चल रहा है। हाल में ही ऐसे कई मामले सामने आए हैं। ठगों ने न केवल लोगों का सामान रास्ते में से ही गायब कर दिया, बल्कि रकम भी वसूल ली।
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शहर में ठगों ने लोगों को फंसाने के लिए इंटरनेट पर जाल बिछा रखा है। अक्सर लोग पैकर्स-मूवर्र्स की तलाश में इंटरनेट का सहारा लेते हैं। आगरा के अधिकतर लोग नोएडा, दिल्ली, मुंबई आदि में रहकर नौकरी करते हैं। 
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जब लोग इस शहर को छोड़कर अन्य शहरों में जाना चाहते हैं तो अधिकांश लोग इंटरनेट पर पैकर्स-मूवर्स को तलाशते हैं। जस्ट डायल सहित तमाम वेबसाइट पर पैकर्स-मूवर्स के नंबरों की लंबी लिस्ट मौजूद है। इनमें ठगों के बहुत से नंबर हैं।
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केस 1
सामान लेकर हुए फरार
बोदला निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर सार्थक मेहता की नौकरी एक आईटी कंपनी नोएडा में लगी। उन्होंने वेबसाइट से पैकर्स-मूवर्स का नंबर निकालकर दो लोगों से बात की। एक ने सामान ले जाने के 15 हजार तो दूसरे ने 12 हजार रुपये मांगे। 

कम दाम के लालच में आकर उन्होंने बिना जांच पड़ताल किए सामान भेज दिया। सार्थक शाम तक नोएडा पहुंच गए, लेकिन सामान लेकर ठग गायब हो गए। वेबसाइट पर लगातार शिकायत के बाद उन्हें उनका सामान मिल सका।

केस 2
कीमती सामान गायब किया
दयालबाग निवासी डॉ. संदीप जैन ने आगरा से नौकरी छोड़कर कर कानपुर में दूसरे स्कूल में नौकरी शुरू की। उन्होंने सामान ले जाने केलिए पैकर्स-मूवर्स का नंबर ऑनलाइन वेबसाइट से निकाला। आरोपी गाड़ी में सामान लेकर दूसरे दिन कानपुर पहुंचा। 

डॉ. जैन ने जब सामान की जांच की तो एलइडी टीवी सहित कई सामान उसमें से गायब मिले। शिकायत करने के लिए फोन लगाया तो नंबर बंद मिला। सामान की कीमत ज्यादा न होने के चलते उन्होंने पुलिस से शिकायत नहीं की।

ऐसे बनाते हैं शिकार
इंटरनेट पर उपलब्ध पैकर्स-मूवर्स के नंबर पर बात करने पर वह सामान को दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए सौदा तय करते हैं। सामान को पैक कर वह अपनी गाड़ी में भर लेते हैं और फरार हो जाते हैं। 

सामान ले जाने की रकम भी वसूल लेते हैं। पीड़ित दूसरी तरफ सामान का इंतजार करता है। फोन करने पर आरोपी खुद को कहीं फंसा हुआ बताकर रकम की मांग करता है। रकम खाते में डालने पर आरोपी अपना नंबर ही बंद कर लेता है।

पुलिस से बचने को करते है इंटरनेट कॉलिंग
आरोपी ठगी करने के लिए अक्सर इंटरनेट कॉलिंग का इस्तेमाल करते हैं। इससे पुलिस को उनकी लोकेशन को पता नहीं चल पाता है। जिसकर कारण वो पकड़ में नहीं आ पाते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

पैकर्स-मूवर्स बुक करते समय उसकी वेबसाइट को ठीक से देख लें। कंपनी के मालिक और कर्मचारी के आधार कार्ड की फोटो कॉपी अपने पास जमा करा लें। सामान ले जाने वाले का फोटो अपने मोबाइल से जरूर खींच लें। यदि सामान ले जाते समय चालक और पैसे मांगता है तो जरूर ठग है, पुलिस से शिकायत करें। समय निकालकर इंटनेट पर दर्शाए गए पते को देखने जरूर जाएं।
 

ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए वेरिफिकेशन के बाद ही पैकर्स-मूवर्स को चुनें। कभी भी सामान ले जाने वाले को पूरा पैसा जमा न करें। लोकल पैकर्स-मूवर्स को ही प्राथमिकता दें। उनके ऑफिस जाकर जरूर मिलें। किसी वेबसाइट के जरिए अगर बुकिंग कर रहे हैं, तो उससे ईमेल के जरिए पैकर्स-मूवर्स के बारे में जानकारी जरूर हासिल कर लें। - अमित, इंचार्ज साइबर सेल

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