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Agra News: जीआईएस सर्वे में बढ़े एक लाख घर, 97 हजार को गृहकर का नोटिस
Sat, 27 Aug 2022 08:03 AM IST
आगरा ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 27 Aug 2022 08:03 AM IST
सार
नगर आयुक्त निखिल टी फुंडे ने बताया कि जीआईएस सर्वे में एक लाख संपत्तियां शहर में बढ़ी हैं। इनसे निगम को 112 करोड़ रुपये का टैक्स मिल सकता है।
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आगरा नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा में 97 हजार से ज्यादा घरों को गृहकर जमा करने केलिए नगर निगम ने नोटिस भेजे हैं। निगम ने हाल में ही निजी कंपनी सांई कंस्ट्रक्शन से शहर की संपत्तियों का जीआईएस (ज्योग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम) आधारित सर्वे कराया है। इस सर्वे में शहर में एक लाख से ज्यादा संपत्तियां बढ़ी हैं। अब तक नगर निगम में 3.50 लाख संपत्तियां थीं, पर सर्वे में 4.50 लाख संपत्तियां पाई गई हैं। इन्हें गृहकर जमा करने के लिए नगर निगम नोटिस भेज रहा है। इनमें 19 हजार संपत्तियां व्यावसायिक हैं। निगम को इन नए भवनों से 112 करोड़ रुपये का गृहकर मिलने की उम्मीद है।
निजी कंपनी सांई कंस्ट्रक्शन कंपनी के सर्वे पर सवाल भी उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि कंपनी के कर्मचारियों ने हर शटर को दुकान बताकर उस पर व्यावसायिक कर लगा दिया है। बहुमंजिला भवनों में नीचे अगर दुकान हैं और ऊपर मकान है तो पूरी इमारत को व्यावसायिक करार देते हुए कर लगाया है। ऐसे मामलों की शिकायतें नगर निगम में रोजाना आ रही हैं। पार्षदों को पास भी लोग इन नोटिसों के संबंध में आपत्ति जता रहे हैं।
नगर निगम ने जिन 97 हजार संपत्तियों को गृहकर के नोटिस जारी किए हैं, उनमें ताजगंज की 19 हजार संपत्तियां व्यवसायिक हैं। निगम के टैक्स अधिकारियों के मुताबिक ताजगंज में ज्यादातर होटल, रेस्टोरेंट, एंपोरियम और दुकानें हैं। यहां आपत्तियां ज्यादा नहीं है, पर आवासीय और व्यावसायिक इमारतों के मामले में शिकायतें ज्यादा हैं। नगर आयुक्त निखिल टी फुंडे के मुताबिक जो नोटिस दिए गए हैं, उनमें 30 दिन के अंदर अपनी आपत्तियां जोनल कार्यालयों में दाखिल कर सकते हैं।
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आपत्तियों की संख्या को देखते हुए नगर आयुक्त ने सत्यापन के लिए टीम बनाई है। ये टीम किसी भी शिकायत पर मौके पर जाकर सत्यापन करेगी। नगर निगम के रिकॉर्ड का मिलान जीआईएस सर्वे से कराया जाएगा। पुराने रिकार्ड देखे जाएंगे। कुछ मामलों में औचक सत्यापन भी होगा।
नगर आयुक्त निखिल टी फुंडे ने बताया कि जीआईएस सर्वे में एक लाख संपत्तियां शहर में बढ़ी हैं। इनसे निगम को 112 करोड़ रुपये का टैक्स मिल सकता है। हम लगातार नोटिस भेज रहे हैं। जिसे भी आपत्ति हो, वह जोनल कार्यालय पर दाखिल कर सकता है।
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निजी कंपनी सांई कंस्ट्रक्शन कंपनी के सर्वे पर सवाल भी उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि कंपनी के कर्मचारियों ने हर शटर को दुकान बताकर उस पर व्यावसायिक कर लगा दिया है। बहुमंजिला भवनों में नीचे अगर दुकान हैं और ऊपर मकान है तो पूरी इमारत को व्यावसायिक करार देते हुए कर लगाया है। ऐसे मामलों की शिकायतें नगर निगम में रोजाना आ रही हैं। पार्षदों को पास भी लोग इन नोटिसों के संबंध में आपत्ति जता रहे हैं।
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नगर निगम ने जिन 97 हजार संपत्तियों को गृहकर के नोटिस जारी किए हैं, उनमें ताजगंज की 19 हजार संपत्तियां व्यवसायिक हैं। निगम के टैक्स अधिकारियों के मुताबिक ताजगंज में ज्यादातर होटल, रेस्टोरेंट, एंपोरियम और दुकानें हैं। यहां आपत्तियां ज्यादा नहीं है, पर आवासीय और व्यावसायिक इमारतों के मामले में शिकायतें ज्यादा हैं। नगर आयुक्त निखिल टी फुंडे के मुताबिक जो नोटिस दिए गए हैं, उनमें 30 दिन के अंदर अपनी आपत्तियां जोनल कार्यालयों में दाखिल कर सकते हैं।
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आपत्तियों की संख्या को देखते हुए नगर आयुक्त ने सत्यापन के लिए टीम बनाई है। ये टीम किसी भी शिकायत पर मौके पर जाकर सत्यापन करेगी। नगर निगम के रिकॉर्ड का मिलान जीआईएस सर्वे से कराया जाएगा। पुराने रिकार्ड देखे जाएंगे। कुछ मामलों में औचक सत्यापन भी होगा।
नगर आयुक्त निखिल टी फुंडे ने बताया कि जीआईएस सर्वे में एक लाख संपत्तियां शहर में बढ़ी हैं। इनसे निगम को 112 करोड़ रुपये का टैक्स मिल सकता है। हम लगातार नोटिस भेज रहे हैं। जिसे भी आपत्ति हो, वह जोनल कार्यालय पर दाखिल कर सकता है।