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शौचालय निर्माण में 3.36 लाख का फर्जीवाड़ा
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मैनपुरी। घोटाले को लेकर सुर्खियों में रही करहल की ग्राम पंचायत टिमरख में एक और मामला सामने आया है। इसमें अब शौचालय में लाखों का फर्जीवाड़ा मिला है। जांच समिति की रिपोर्ट के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी ने प्रधान और तत्कालीन सचिव को नोटिस जारी किया है। नोटिस जारी होने के बाद खलबली मच गई है।
ग्राम पंचायत टिमरख निवासी अखिलेश और धर्मेंद्र ने शौचालय निर्माण न कराए जाने की शिकायत की थी। इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने जांच के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया था। इसमें जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी और अवर अभियंता आरईडी बरनाहल को शामिल किया गया था। जांच हुई तो पता चला कि ग्राम पंचायत में 28 शौचालय में अनियमितता की गई है। इनमें से अधिकांश शौचालय जहां बने नहीं मिले तो वहीं कुछ शौचालय लाभार्थियों ने स्वयं बनवाने की बात कही।
जांच रिपोर्ट में कुल 3.36 लाख की धनराशि का दुरुपयोग करने के लिए प्रधान और सचिव को दोषी ठहराया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्य विकास अधिकारी ने मामले में कार्रवाई के लिए डीपीआरओ को निर्देशित किया था। इस पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने ग्राम प्रधान नजरश्री और तत्कालीन सचिव रवी यादव को डीपीआरओ ने नोटिस जारी किया है। उन्हें सात दिन में साक्ष्य सहित जवाब देना होगा। जवाब न देने या जवाब उचित न होने पर रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी।
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स्कूलों में भी अधूरे मिले शौचालय
जांच समिति ने टिमरख के प्राथमिक विद्यालय देवपुरा में जांच की। यहां शौचालय अपूर्ण मिले। वहीं प्राथमिक विद्यालय टिमरख और उदयपुरा जांच के दौरान बंद मिले। इसके चलते इन स्कूलों में शौचालय की स्थिति का सत्यापन नहीं हो सका।
पहले भी मिला था 13.95 लाख का घोटाला
ग्राम पंचायत टिमरख में पहले भी लाखों का घोटाला सामने आ चुका है। जांच में 13.95 लाख का घोटाला निकलने के बाद सितंबर में कार्रवाई की गई थी। इसमें सीसी रोड व अन्य निर्माण कार्यों के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया था। मामले में सचिव प्रेमचंद्र बाथम को जेल जाना पड़ा था। वहीं प्रधान नजरश्री पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सकी थीं।
जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रधान और सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद उसका परीक्षण कर रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी।
स्वामीदीन, डीपीआरओ।
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ग्राम पंचायत टिमरख निवासी अखिलेश और धर्मेंद्र ने शौचालय निर्माण न कराए जाने की शिकायत की थी। इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने जांच के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया था। इसमें जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी और अवर अभियंता आरईडी बरनाहल को शामिल किया गया था। जांच हुई तो पता चला कि ग्राम पंचायत में 28 शौचालय में अनियमितता की गई है। इनमें से अधिकांश शौचालय जहां बने नहीं मिले तो वहीं कुछ शौचालय लाभार्थियों ने स्वयं बनवाने की बात कही।
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जांच रिपोर्ट में कुल 3.36 लाख की धनराशि का दुरुपयोग करने के लिए प्रधान और सचिव को दोषी ठहराया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्य विकास अधिकारी ने मामले में कार्रवाई के लिए डीपीआरओ को निर्देशित किया था। इस पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने ग्राम प्रधान नजरश्री और तत्कालीन सचिव रवी यादव को डीपीआरओ ने नोटिस जारी किया है। उन्हें सात दिन में साक्ष्य सहित जवाब देना होगा। जवाब न देने या जवाब उचित न होने पर रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी।
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स्कूलों में भी अधूरे मिले शौचालय
जांच समिति ने टिमरख के प्राथमिक विद्यालय देवपुरा में जांच की। यहां शौचालय अपूर्ण मिले। वहीं प्राथमिक विद्यालय टिमरख और उदयपुरा जांच के दौरान बंद मिले। इसके चलते इन स्कूलों में शौचालय की स्थिति का सत्यापन नहीं हो सका।
पहले भी मिला था 13.95 लाख का घोटाला
ग्राम पंचायत टिमरख में पहले भी लाखों का घोटाला सामने आ चुका है। जांच में 13.95 लाख का घोटाला निकलने के बाद सितंबर में कार्रवाई की गई थी। इसमें सीसी रोड व अन्य निर्माण कार्यों के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया था। मामले में सचिव प्रेमचंद्र बाथम को जेल जाना पड़ा था। वहीं प्रधान नजरश्री पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सकी थीं।
जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रधान और सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद उसका परीक्षण कर रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी।
स्वामीदीन, डीपीआरओ।