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अब काम की चीज बनेगा कूड़ा

Fri, 24 Jun 2016 01:41 AM IST
अमर उजाला आगरा
अमर उजाला आगरा Updated Fri, 24 Jun 2016 01:41 AM IST
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Now the thing will work leftovers
मोहाली में कूड़ा - फोटो : अमर उजाला
18 एकड़ जमीन में लगेगा प्लांट
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10 मेगावाट प्रतिदिन बनेगी बिजली
500 मीट्रिक टन कूड़े की प्रतिदिन होगी जरूरत

वरदान बन सकता है कूड़ा
500 मीट्रिक टन कूड़े से बनेगी 10 मेगावाट बिजली
स्पाक कंपनी और नगर निगम के बीच जल्द होगा करार 
कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर 18 एकड़ में बनेगा प्लांट

शहर का कूड़ा अब बेकार नहीं होगा। न ही इसके ऊंचे-ऊंचे पहाड़ बनेंगे। क्योंकि अब इससे बिजली बनेगी। इसके लिए नगर निगम और स्पाक कंपनी के बीच जल्द करार होने जा रहा है। कंपनी के अधिकारियों ने शहर में डेरा डाल दिया है। वे न सिर्फ शहर से निकलने वाले कूड़े का आकलन कर रहे हैं बल्कि कुबेरपुर स्थित लैंडफिल साइट पर प्लांट स्थापित करने के लिए जगह सुनिश्चित कर रहे हैं। प्रतिदिन 500 मीट्रिक टन कूड़े से 10 मेगावाट बिजली बनेगी।

पर्यटन के मानचित्र पर सितारे की तरह से चमकने वाले इस शहर की चमक को कूड़ा फीका कर रहा है। नगर निगम के लिए कूड़ा उठाने से बड़ी समस्या इसका निस्तारण करना है। कुबेरपुर स्थित लैंडफिल साइट पर कूड़े के पहाड़ खड़े हो गए हैं। इससे आसपास के क्षेत्रों में संक्रमण का खतरा है। इसी के निस्तारण के लिए अब नगर निगम इससे बिजली बनाने के लिए स्पाक कंपनी से करार करने जा रहा है। शहर में कंपनी के अधिकारी प्लांट स्थापित करने के लिए औपचारिकताओं को पूरा करने में लगे हैं। वहीं, कंपनी की दूसरी टीम ने लैंडफिल साइट के निरीक्षण के बाद शहर से निकलने वाले कूड़े का अध्ययन शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि कुबेरपुर में वर्तमान लैंडफिल साइट पर ही नगर निगम की 18 एकड़ जमीन पर 18 महीने में प्लांट का निर्माण किया जाएगा। प्लांट तक कूड़ा पहुुंचाने की जिम्मेदारी निगम की ही होगी। यह समयसीमा यूपीपीसीएल के साथ करार होने के बाद से शुरू होगी, तभी प्लांट के निर्माण का कार्य शुरू होगा।
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यूपीपीसीएल से करार के बाद शुरू होगा उत्पादन
बिजली बनाकर कंपनी इसे उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड को बेचेगी। इसके लिए करार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नगर निगम की तरफ से औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद यूपीपीसीएल की शर्तों का अध्ययन किया जा रहा है। इस करार के बाद ही स्पाक प्लांट का निर्माण शुरू करेगी। क्योंकि जब तक बिजली बेचने के लिए करार नहीं होगा, तब तक बनाने की प्रक्रिया शुरू नहीं होगी।
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500 मीट्रिक टन से कम कूड़ा उठा तो निगम देगा पेनल्टी
शहर में प्रतिदिन 800 मीट्रिक टन से अधिक कूड़ा निकलता है। मगर, निगम इतना कूड़ा हर रोज नहीं उठा पाता। लगभग आधा कूड़ा शहर में ही रह जाता है। लेकिन कंपनी से करार के बाद नगर निगम को प्रतिदिन 500 मीट्रिक टन कूड़ा तो हर रोज उठाना ही होगा। इससे कम कूड़ा लैंडफिल साइट पर पहुंचने पर निगम को पेनल्टी देनी पड़ सकती है। करार में इस तरह की शर्त रखने की तैयारी है। 


पुराना प्लांट होगा ध्वस्त
इससे पहले वर्ष 2011 में कूड़े से खाद बनाने के लिए नगर निगम ने दूसरी कंपनी से करार किया था। मगर, यह व्यवस्था ज्यादा दिन तक नहीं चल पाई। कुछ ही महीने में कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए। तब से यह प्लांट बंद पड़ा था। करोड़ों रुपये की मशीनें यहां से चोरी हो गईं। अब प्लांट के शेष भाग को ध्वस्त करने की तैयारी की जा रही है। 
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