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अब न रोटी के लाले, पढ़ाई की राह भी खुली
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sun, 03 May 2015 02:01 AM IST
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माता-पिता की मौत के बाद बेसहारा हुए बच्चों के जीवन में आए भूचाल का मामला लखनऊ तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर शनिवार को एसडीएम उमा आर माहेश्वरी अधिकारियों के साथ गांव डाबर पहुंचीं। एक दिन पहले हुई पंचायत में बच्चों की परवरिश का जिम्मा लेने वाले चाचा के घर ताला लगा मिला। हालांकि अधिकारियों के सामने बड़े चाचा ने बच्चों की परवरिश करने की बात कही है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बच्चों को दैनिक उपयोग की वस्तुएं उपलब्ध कराने के साथ स्कूल में एडमीशन भी कराया। वहीं सांसद और समाजसेवियों ने भी मदद हाथ बढ़ाए।
बता दें, डाबर गांव निवासी सरनाम सिंह और उनकी पत्नी बलवीरी ने 2013 में खुदकुशी कर ली थी। इससे बेसहारा हुए उनके बच्चों सोनिया (12), भावना (10), राखी (8) और रोहित (6) की परवरिश की जिम्मेदारी छोटे चाचा गजेंद्र ने उठाई। हाल ही में बारिश और ओलावृष्टि से फसल बर्बादी से पैदा हुई तंगहाली के चलते गजेंद्र ने भी चारों बच्चों से मुंह फेर लिया। भूख से तड़पते इन बच्चों की हालत नानी बैजंती देवी से देखी न गई। उन्होंने थाने में शिकायत की तो मामला सुर्खियों में आया। लेकिन प्रशासन ने कोई खबर न ली। इसके बाद गुरुवार को हुई सर्व समाज की पंचायत में चाचा गजेंद्र ने बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी फिर से उठाने की बात कही। दादा-दादी ने भी देखरेख की बात स्वीकार कर ली। लेकिन शनिवार को जब एसडीएम प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बच्चों का हाल जानने गांव पहुंचे तो पता चला कि बच्चों का चाचा गजेंद्र और दादा-दादी शुक्रवार से ही घर में ताला लगाकर गायब हैं। मौके पर मिले बड़े चाचा रामअवतार ने अधिकारियों से बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी लेने की बात कही।
अंत्योदय राशनकार्ड बना
आर्थिक मदद का वादा
एसडीएम उमा आर माहेश्वरी और तहसीलदार इंद्रनंदन सिंह ने बच्चों से उनका हाल पूछा। सोनिया के नाम अंत्योदय राशनकार्ड बनवाकर दिया। एसबीआई किरावली शाखा में खाता खुलवाया। डाबर स्थित रतन सिंह दौलराम कालेज में बच्चों का एडमीशन कराया। उन्हें दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी उपलब्ध कराई गईं। मौके पर पहुंचे सांसद चौधरी बाबूलाल और सिकरौदा के सरपंच उदयवीर सिंह ने 11-11 हजार रुपये की मदद का आश्वासन दिया। समाजसेवी नरेश पारस ने भी बच्चों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया। इस मौके पर भाजपा नेता जितेंद्र फौजदार, प्रशांत पौनिया, सोनू चौधरी, रामजीत आदि मौजूद रहे।
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बता दें, डाबर गांव निवासी सरनाम सिंह और उनकी पत्नी बलवीरी ने 2013 में खुदकुशी कर ली थी। इससे बेसहारा हुए उनके बच्चों सोनिया (12), भावना (10), राखी (8) और रोहित (6) की परवरिश की जिम्मेदारी छोटे चाचा गजेंद्र ने उठाई। हाल ही में बारिश और ओलावृष्टि से फसल बर्बादी से पैदा हुई तंगहाली के चलते गजेंद्र ने भी चारों बच्चों से मुंह फेर लिया। भूख से तड़पते इन बच्चों की हालत नानी बैजंती देवी से देखी न गई। उन्होंने थाने में शिकायत की तो मामला सुर्खियों में आया। लेकिन प्रशासन ने कोई खबर न ली। इसके बाद गुरुवार को हुई सर्व समाज की पंचायत में चाचा गजेंद्र ने बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी फिर से उठाने की बात कही। दादा-दादी ने भी देखरेख की बात स्वीकार कर ली। लेकिन शनिवार को जब एसडीएम प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बच्चों का हाल जानने गांव पहुंचे तो पता चला कि बच्चों का चाचा गजेंद्र और दादा-दादी शुक्रवार से ही घर में ताला लगाकर गायब हैं। मौके पर मिले बड़े चाचा रामअवतार ने अधिकारियों से बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी लेने की बात कही।
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अंत्योदय राशनकार्ड बना
आर्थिक मदद का वादा
एसडीएम उमा आर माहेश्वरी और तहसीलदार इंद्रनंदन सिंह ने बच्चों से उनका हाल पूछा। सोनिया के नाम अंत्योदय राशनकार्ड बनवाकर दिया। एसबीआई किरावली शाखा में खाता खुलवाया। डाबर स्थित रतन सिंह दौलराम कालेज में बच्चों का एडमीशन कराया। उन्हें दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी उपलब्ध कराई गईं। मौके पर पहुंचे सांसद चौधरी बाबूलाल और सिकरौदा के सरपंच उदयवीर सिंह ने 11-11 हजार रुपये की मदद का आश्वासन दिया। समाजसेवी नरेश पारस ने भी बच्चों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया। इस मौके पर भाजपा नेता जितेंद्र फौजदार, प्रशांत पौनिया, सोनू चौधरी, रामजीत आदि मौजूद रहे।
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