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अब नतीजों पर लगी सबकी नजर
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
Updated Thu, 09 Mar 2017 11:39 PM IST
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सीआईएसएफ की सुरक्षा में ईवीएम
- फोटो : Amar Ujala
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फैसले की घड़ी नजदीक आ गई है। ईवीएम शनिवार को खुल जाएगी। इसी के साथ बाहर आ जाएगा वोटरों का फैसला। ताजनगरी में अचानक से बेकरारी बढ़ गई है। उम्मीदवार ही नहीं, उनके समर्थक तक बेचैन नजर आ रहे हैं। वोटों की गिनती के लिए प्रशासन ने भी पूरी तैयारी कर ली है। पल-पल शनिवार का इंतजार हो रहा है।
नौ सीटों पर 121 उम्मीदवारों के भविष्य का फैसला होने जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि दोपहर 12 बजे तक नतीजे आ जाएंगे। दक्षिण में उम्मीदवार ज्यादा हैं, इसलिए समय ज्यादा लग सकता है। अन्य सीटों पर देर नहीं लगेगी। रुझान तो सुबह आठ बजे से ही आने शुरू हो जाएंगे। मतगणना स्थल पर सुरक्षा के भी पुख्ता बंदोबस्त किए हैं।
सवाल-1 अखिलेश का काम बोला या नहीं
सीएम अखिलेश यादव ने आगरा को हमेशा लकी शहर कहा। वह पूरे चुनाव में जिन योजनाओं के दम पर काम बोलता है का नारा देते रहे, उनमें से दो बड़े प्रोजेक्ट आगरा से जुड़े हैं। यह हैं ताजगंज प्रोजेक्ट और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे। अब देखना है कि ताजनगरी में उनका काम बोला या नहीं। पिछले चुनाव में ही यहां सपा का खाता खुला था। बाह से राजा अरिदमन सिंह जीते थे लेकिन इस बार के चुनाव में वह बीजेपी के साथ रहे।
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सवाल-2 बसपा की हैट्रिक लगेगी या नहीं
पिछले दो चुनाव में आगरा बसपा का किला बन गया। 2012 में नौ में से छह सीटें बसपा ने जीतीं। इस बार विधायकों ने जीत की हैट्रिक लगाने का सपना देखा है। पार्टी अध्यक्ष मायावती ने चुनाव अभियान की शुरुआत भी आगरा से ही की। आगरा के लिए वादों की झड़ी भी लगाई। कल पता चलेगा कि उनके वादों पर ताजनगरी ने कितना भरोसा किया।
सवाल-3 देहात में कमल खिलेगा या नहीं
पिछले चुनावों में भाजपा शहर में सिमट गई। 2012 में नौ में से सिर्फ दो सीट जीती थीं। दोनों ही शहर में। इनमें भी एक उत्तर सीट है, जो पहले से भाजपा का गढ़ है। दूसरा दक्षिण। इस बार देखना है कि शहर में पहले जैसा रंग रहता है या नहीं। सबकी नजर इस पर लगी हैं कि देहात में कमल का फूल कितना खिल पाता है।
सवाल-4 कांग्रेस का सूखा मिटेगा या नहीं
ताजनगरी में कांग्रेस 24 सालों से जीत के लिए तरस रही है। खाता खुलना तो दूर जमानत तक के लाले हैं। पिछले चुनाव में रालोद के साथ गठबंधन था लेकिन दाल नहीं गली। इस बार सपा को साथ लगाया है। दक्षिण, ग्रामीण और खेरागढ़ सीट पर कांग्रेस लड़ी। राहुल गांधी प्रचार के लिए आए। देखना यह है कि उनका असर कितना हुआ।
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नौ सीटों पर 121 उम्मीदवारों के भविष्य का फैसला होने जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि दोपहर 12 बजे तक नतीजे आ जाएंगे। दक्षिण में उम्मीदवार ज्यादा हैं, इसलिए समय ज्यादा लग सकता है। अन्य सीटों पर देर नहीं लगेगी। रुझान तो सुबह आठ बजे से ही आने शुरू हो जाएंगे। मतगणना स्थल पर सुरक्षा के भी पुख्ता बंदोबस्त किए हैं।
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सवाल-1 अखिलेश का काम बोला या नहीं
सीएम अखिलेश यादव ने आगरा को हमेशा लकी शहर कहा। वह पूरे चुनाव में जिन योजनाओं के दम पर काम बोलता है का नारा देते रहे, उनमें से दो बड़े प्रोजेक्ट आगरा से जुड़े हैं। यह हैं ताजगंज प्रोजेक्ट और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे। अब देखना है कि ताजनगरी में उनका काम बोला या नहीं। पिछले चुनाव में ही यहां सपा का खाता खुला था। बाह से राजा अरिदमन सिंह जीते थे लेकिन इस बार के चुनाव में वह बीजेपी के साथ रहे।
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सवाल-2 बसपा की हैट्रिक लगेगी या नहीं
पिछले दो चुनाव में आगरा बसपा का किला बन गया। 2012 में नौ में से छह सीटें बसपा ने जीतीं। इस बार विधायकों ने जीत की हैट्रिक लगाने का सपना देखा है। पार्टी अध्यक्ष मायावती ने चुनाव अभियान की शुरुआत भी आगरा से ही की। आगरा के लिए वादों की झड़ी भी लगाई। कल पता चलेगा कि उनके वादों पर ताजनगरी ने कितना भरोसा किया।
सवाल-3 देहात में कमल खिलेगा या नहीं
पिछले चुनावों में भाजपा शहर में सिमट गई। 2012 में नौ में से सिर्फ दो सीट जीती थीं। दोनों ही शहर में। इनमें भी एक उत्तर सीट है, जो पहले से भाजपा का गढ़ है। दूसरा दक्षिण। इस बार देखना है कि शहर में पहले जैसा रंग रहता है या नहीं। सबकी नजर इस पर लगी हैं कि देहात में कमल का फूल कितना खिल पाता है।
सवाल-4 कांग्रेस का सूखा मिटेगा या नहीं
ताजनगरी में कांग्रेस 24 सालों से जीत के लिए तरस रही है। खाता खुलना तो दूर जमानत तक के लाले हैं। पिछले चुनाव में रालोद के साथ गठबंधन था लेकिन दाल नहीं गली। इस बार सपा को साथ लगाया है। दक्षिण, ग्रामीण और खेरागढ़ सीट पर कांग्रेस लड़ी। राहुल गांधी प्रचार के लिए आए। देखना यह है कि उनका असर कितना हुआ।