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बीएड की डिग्रियां ही नहीं, कॉलेज भी फर्जी निकले

Sun, 07 Aug 2016 11:57 PM IST
अमर उजाला आगरा
अमर उजाला आगरा Updated Sun, 07 Aug 2016 11:57 PM IST
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NOT ONLY BEd degrees BUT ALSO COLLEGES ARE bogus
अंबेडकर ‌व‌िव‌ि - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
 बीएड की सिर्फ डिग्रियां ही फर्जी नहीं मिलीं। पांच कॉलेज भी बगैर मान्यता के पाए गए है। जी हां। डा. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी को दी जा चुकी एसआईटी की जांच रिपोर्ट में इनके नाम दिए गए हैं। इन कॉलेजों के पास 2004 में बीएड की मान्यता नहीं थी। फिर भी इन्होंने सैंकड़ों डिग्रियां बांट दीं। इनके संचालकों से पूछताछ की जा चुकी है। अब इन्हें भी आरोपी बनाने की तैयारी चल रही   है। इन कालेजों के पास 2004 तक स्नातक की मान्यता तो थी, लेकिन बीएड की नहीं। इन पांच कालेजों में से दो आगरा जनपद में हैं। दो में एक एत्मादपुर में है। एक कॉलेज अलीगढ़ का है। एक एक एटा और फीरोजाबाद के हैं। बता दें, 2004 में कुल 83 कालेजों ने बीएड की परीक्षा कराई थी। इनमें से 67 निजी कालेज थे। इन सबके खिलाफ एसआईटी ने फर्जी डिग्री बेचने के साक्ष्य मिलने का दावा किया है। इन्हें भी आरोपी बनाया जाएगा। इन 67 के अलावा पांच ऐसे कॉलेज मिले, जिनके पास मान्यता नहीं थी।
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 कुलसचिव केएन सिंह का कहना है कि एसआईटी की जांच के अनुसार इन कालेजों को बीएड कोर्स की मान्यता बाद में मिली और मार्कशीट ही पहले जारी कर दी। इन कालेजों का रिकार्ड जुटाया जा रहा है।
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फर्जी डिग्री पर आसानी से मिली नौकरी
 बीएड सत्र 2004-05 में कुल 8,000 अभ्यर्थी पंजीकृत कराए गए थे। इतने का ही रिजल्ट घोषित किया गया। लेकिन चार्ट में रोल नंबर 13,182 मिले। इससे साफ हो गया कि 5,182 अभ्यर्थी फर्जी रहे। अब सवाल उठा कि इन्हें मार्कशीट कैसे मिली? जांच में साफ हुआ कि इन्हें कालेजों से फर्जी मार्कशीट दे दी गई। इसके बाद यूनिवर्सिटी अफसरों से सेटिंग कर इनका रिकार्ड भी चार्ट में दर्ज करा दिया गया।
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एसआईटी ने सभी 13,182 रोल नंबर लेकर इनके पते मालूम किए। इसके लिए सभी महकमों से रिकार्ड लिया गया। जो सरकारी सेवा में थे, उनसा ब्योरा मिल गया। केस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि 13,182 में से लगभग 2,500 को सरकारी नौकरी मिली। ज्यादातर सहायक अध्यापक बने। जांच में 90 फीसदी मार्कशीट उन 5,182 में से निकलीं जो फर्जी थीं। कारण यह रहा कि इनमें 80 फीसदी से कम अंक तो दिए ही नहीं गए जबकि रात दिन मेहनत करके पढ़ने वाले अभ्यर्थियों को 70 फीसदी से ज्यादा अंक नहीं मिले। उस दौरान सहायक अध्यापकों की नियुक्ति अंकों के आधार पर तैयार मेरिट से की गई। अब इनकी नौकरी खतरे में है। एसआईटी ने सभी को आरोपी बनाने की तैयारी कर ली है। इन्हें जेल जाना पड़ सकता है।

19 को हाईकोर्ट में सुनवाई
एसआईटी फर्जी मार्कशीट प्रकरण की जांच रिपोर्ट 19 अगस्त को हाईकोर्ट के सामने रखेगी। पहले तारीख 11 अगस्त थी। अब आगे बढ़ा दी गई है। देखना यह है कि 19 से पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन कोई निर्णय ले पाता है या नहीं।
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