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स्मार्ट सिटीः सिटी पर नहीं कंपनी और सैलेरी पर करोड़ों खर्च

Mon, 27 Aug 2018 03:50 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Updated Mon, 27 Aug 2018 03:50 PM IST
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not in city but salary and became a company spend crore rupee
स्मार्ट सिटी की प्रतीकात्मक तस्वीर

आगरा को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए रुपये की कमी नहीं है। आगरा स्मार्ट सिटी कंपनी के बैंक अकाउंट में डेढ़ साल से करोड़ों रुपये जमा हैं। लेकिन शहर को स्मार्ट बनाने के लिए विकास में किए रुपये खर्च नहीं किए जा सके। जबकि आगरा स्मार्ट सिटी बनाने के लिए तैयार की गई टीम के नाम पर लाखों रुपये का वेतन हर महीने उठा रहे हैं। ये अधिकारियों की कार्यदक्षता पर सवाल खड़े करती है?

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शहर को स्मार्ट सिटी में शामिल किया गया। स्मार्ट सिटी से जुड़े कामकाजों को शुरू करने के लिए सत्र 2017-18 में पहली बार 2 करोड़ रुपये दिए गए। फिर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से पहली किश्त के नाम पर 107-107 करोड़ रुपये दिए गए। कुल 216 करोड़ रुपये स्मार्ट सिटी बनाने के लिए दिए गए। कुछ महीनों बाद 91 करोड़ रुपये और मिले। इस तरह से आगरा स्मार्ट सिटी को अब तक लगभग 307 करोड़ रुपये मिल चुके हैं।
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लेकिन इन डेढ़ सालों में स्मार्ट सिटी का एक भी प्रोजेक्ट पूरा होना तो दूर शुरू किए गए काम भी अधर में लटक गए हैं। इन कामों में अड़ंगे का कारण विभागों के बीच तालमेल की कमी है। वहीं स्मार्ट सिटी बनने के नाम पर तैयार की गई टीम हर महीने वेतन उठा रही है। मालूम हो कि आगरा को स्मार्ट सिटी में शामिल हुए दो साल हो रहे हैं।
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ऑफिस, सैलेरी और कंपनी बनने में 2.74 करोड़ खर्च

स्मार्ट सिटी बनाने के लिए विकास कार्यों में भले ही फूटी कौड़ी खर्च नहीं की गई हो, पर स्मार्ट सिटी कंपनी रजिस्ट्रेशन कराने, ऑफिस-फर्नीचर और वेतन के नाम पर 2 करोड़ 74 लाख रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। हालांकि कुछ रुपये विकास कार्यों के नाम पर खर्च जरूर किए गए हैं, पर वे काम भी अधूरे हैं।
 

35 लाख से अधिक वेतन में खर्च

आगरा स्मार्ट सिटी कंपनी तैयार की गई। इसमें कार्य करने के लिए जीएम जैसे पद की नियुक्ति की गई। साथ ही इंजीनियर, ऑर्किटेक्ट सहित पूरा स्टॉफ की भर्ती की गई। कुछ भर्ती अभी-भी होनी हैं। इन्हें वेतन के नाम पर अब तक 35 लाख रुपये से अधिक दिए जा चुके हैं। हालांकि इसी महीने से जीएम का पद भी खाली हो गया है।

हेरिटेज का काम अटका
स्मार्ट सिटी की ओर से ताजमहल के चारों ओर हेरिटेज बनाने का प्रपोजल तैयार किया गया। इसका निर्माण सभी विभागों से अनुमति लिए बगैर आनन-फानन में  शुरू करा दिया गया। नतीजा ये हुआ कि एएसआई ने रोक लगा दी। ये काम भी आधा-अधूरा पड़ा हुआ है। इसे चालू करने के लिए एएसआई से एनओसी की जरूरत है।

सरकारी कामकाज के तरीके से बचने बनाई कंपनी

प्रधानमंत्री की एक मेगा योजना में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट भी है। इस योजना में शहरों को स्मार्ट सिटी बनाना है। इसे सरकारी कामकाज के स्टाइल से दूर रखने की कोशिश की गई, इसलिए स्मार्ट सिटी के लिए अलग से नई कंपनी ही बनाई गई। इस कंपनी में स्मार्ट सिटी बनाने में जिम्मेदारी निभाने वाले हर विभाग को शामिल किया गया। इसके बाद भी विभागों में तालमेल की कमी है और सरकारी कामकाज के तरीके से प्रभावित है। स्मार्ट सिटी के काम में देरी की एक बड़ी वजह यह भी है।

 

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