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किताबों के नाम नहीं, बुक सेलर का कार्ड दे रहे स्कूल

Mon, 04 Apr 2016 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Updated Mon, 04 Apr 2016 01:49 AM IST
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no names of books, schools gave book seller's card to guardians
किताबों के नाम नहीं, बुक सेलर का कार्ड दे रहे स्कूल - फोटो : अमर उजाला
सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूल चार अप्रैल (आज) से खुल रहे हैं। फीस जमा करने से पहले किताब, कापी और यूनिफार्म की खरीदारी में अभिभावकों की जेबें ढीली हो गईं हैं। अधिकतर स्कूलों की किताबें तय दुकानों और प्रिंट रेट पर मिल रही है। अभिभावकों को स्कूलों से किताबों के नामों की लिस्ट के बजाय बुकसेलर का विजिटिंग कार्ड और पम्फलेट दिया जा रहा है। 
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पब्लिक से लेकर कान्वेंट स्कूल तक ने यह व्यवस्था बना रखी है कि उनकी ओर से निर्धारित दुकान से ही किताबें, यूनिफार्म खरीदा जाए। किताबों का नाम पता न होने से मजबूरी में अभिभावकों को निर्धारित दुकानदार जिस कीमत पर किताबें दे रहा है, खरीदनी पड़ रही हैं। दुकानदार एक तो बिल नहीं दे रहे, अभिभावकों के मांगने पर बिल दिया भी जाता है तो उस पर दुकानदार का नाम नहीं होता। 
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 पश्चिमपुरी निवासी संजय गोयल ने बताया कि उन्होंने शास्त्रीपुरम् स्थित एक पब्लिक स्कूल में बेटे का प्रवेश कक्षा आठ में कराया। किताबें खरीदने के लिए पश्चिमपुरी के ही एक बुकसेलर का विजिटिंग कार्ड दिया गया। कहने के बाद भी किताबों के नाम देने से मना कर दिया गया। बुकसेलर ने सभी किताबें प्रिंट रेट पर दीं और उसकी रसीद देेने से मना कर दिया। संजय का आरोप है कि दुकानदार ने उनसे कहा कि स्कूल वालों ने किताबें बेचने के लिए ठेका दिया है। संजय ने दुकानदार से बातचीत की रिकार्डिंग भी की है। सोमवार को वह जिलाधिकारी से मामले की शिकायत करेंगे। 
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राजामंडी और फौव्वारा में सस्ती 
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल की ओर से निर्धारित दुकानों पर जो किताबें प्रिंट रेट पर दी जा रही हैं, वही राजामंडी और फौव्वारा में 30 से 35 फीसदी छूट पर मिल रही हैं। 

‘अभिभावकों को किताबों के लिए भटकना न पड़े, इसलिए बुक सेलरों का नाम दिया जाता है। कुछ सेलर से कह दिया जाता है कि उनके यहां की सारी किताबें रखें। फिर भी स्कूलों को सूचना पट्ट पर बुक लिस्ट चस्पा करनी चाहिए। इससे अभिभावक कहीं से किताब खरीदने के लिए स्वतंत्र रहेंगे।  
- संजय तोमर, अध्यक्ष, अप्सा 

‘किसी एक बुकसेलर के यहां से किताब खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। शिक्षा विभाग को इसकी मानीटरिंग करनी चाहिए। प्रशासन के पास यदि कोई शिकायत आती है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।’

- राजेश कुमार श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी नगर 

आज स्कूल खुलने के साथ मिलेगी फीस बुक
सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूल चार अप्रैल (आज) से खुल रहे हैं। इसी के साथ फीस बुक उपलब्ध कराई जाएगी। अप्सा के सदस्य स्कूलों ने पांच से दस फीसदी तक फीस बढ़ाने का निर्णय लिया है। कुछ स्कूलों के 15 फीसदी तक फीस बढ़ोत्तरी करने की सूचना है। अप्सा के अध्यक्ष संजय तोमर का कहना है कि शिक्षकों के वेतन, अन्य सुविधाओं के लिए पांच से दस फीसदी वृद्धि का निर्णय लिया गया है। इससे अधिक बढ़ोत्तरी उचित नहीं है। 
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