कासगंज: जानलेवा हमले में पूर्व विधायक हसरत उल्ला खां सहित नौ दोषी, 25 अगस्त को सुनाई जाएगी सजा
मामला 30 मई 2011 का है। उस वक्त विधायक रहे हसरत उल्ला खां शेरवानी ने अपने समर्थकों के साथ थाने में घुसकर युवक को बेरहमी से पीटा था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कासगंज जिले में 10 साल पूर्व थाना ढोलना में घुसकर युवक के साथ मारपीट व जानलेवा हमले के मामले में पूर्व विधायक और उनके साथियों को न्यायालय ने दोषी करार दिया है। सजा के लिए 25 अगस्त की तिथि नियत करते हुए सभी दोषियों को जेल भेजा गया है। यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गगन कुमार भारती ने शनिवार को सुनाया।
मामला 30 मई 2011 का है। गांव गढ़ी निवासी शमीम ने गांव के ही शमशाद के खिलाफ थाने में 25 मई को एक मामले में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें पुलिस ने शमशाद को हवालात में बंद किया था। उस समय विधायक रहे हसरत उल्ला खां शेरवानी, उनके भांजे बजाहत शेरवानी व समर्थक अशरफ, शमीम, युसूफ, दिलशाद, हबीब, शकरुद्दीन, उमर व समर थाने पहुंचे थे।
रायफल की बटों से पीटा था
आरोपियों ने हवालात में बंद शमशाद को गेट पर बुलाया और हाथ-पैर पकड़कर रायफल की बटों से प्रहार करते हुए जान से मारने की कोशिश की। इस मामले में शमशाद ने पूर्व विधायक सहित नौ आरोपियों के खिलाफ ढोलना थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
पीड़ित पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अनिल कुमार यादव ने आरोपियों को अधिकतम सजा की पैरवी की। शनिवार को इस मामले में न्यायादेश की तारीख नियत थी। दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं के तर्क सुनने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या तृतीय गगन कुमार भारती ने पूर्व विधायक व उनके साथियों को मारपीट, जानलेवा हमले का दोषी पाया।
25 अगस्त को सुनाई जाएगी सजा
पूर्व विधायक हसरत उल्ला खां शेरवानी और उनके साथियों पर दोष सिद्ध हो जाने के बाद सजा सुनाने के लिए नियत की गई 25 अगस्त की तिथि पर लोगों की निगाहें टिकी हैं। पूर्व विधायक व उनके साथियों को कितनी सजा मिलेगी, इसको लेकर लोग कयास लगा रहे हैं। इधर इस मामले में सोशल मीडिया पर भी लोग तरह तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं।
जमे रहे समर्थक, रही कड़ी सुरक्षा
पूर्व विधायक हसरत उल्ला खां व उनके साथियों के मुकदमे की सुनवाई न्यायालय में चल रही थी तो बाहर समर्थक जमे रहे। न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम रहे। पुलिस पूरी तरह शांति व्यवस्था के उद्देश्य से मुस्तैद रही।