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Cyber Crime: जानिये कैसे करते थे करोड़ों की ठगी, नाइजीरियन गैंग का शातिर है वेबसाइट बनाने में माहिर
Fri, 14 Aug 2020 10:02 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 14 Aug 2020 10:02 AM IST
सार
भारत में बिना वीजा के रह रहा था गुडसटाइम संडे, वर्ष 2015 में आया था
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साइबर रेंज थाना ने पकड़ा गैंग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा पुलिस की जांच में पता चला कि नाइजीरिया का गुड्सटाइम संडे उर्फ बेंशन वर्ष 2015 में भारत आया था। उसने भोपाल के एक कॉलेज में डिप्लोमा इन ग्राफिक्स इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया था। एक साल का कोर्स पूरा करने के बाद नाइजीरिया के अन्य सदस्यों से पहचान हो गई। फरवरी 2016 में स्टूडेंट वीजा समाप्त होने के बाद भी भारत में अवैध तरीके से रह रहा था।
वह वेबसाइट बनाने में माहिर हो गया। एक घंटे में वेबसाइट तैयार कर देता है। गूगल से स्पेस लेकर अपलोड करता है। इन वेबसाइट का नाम सरकारी संस्थाओं से मिलता जुलता रखा जाता था। जब लोग वेबसाइट पर खोज करते थे, तो फर्जी वेबसाइट पर क्लिक करते थे। गुडसटाइम ने पुलिस को बताया कि उसके देश में कई लोग हैकिंग करते हैं।
संबंधित खबर- Cyber Crime: इंडो-नाईजीरियन गैंग पकड़ा, फर्जी बेवसाइट से करते थे ठगी, कमाए करोड़ों
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सरगना की पहचान से अंजान हैं गैंग के सदस्य
गैंग का सरगना जॉन स्टेनले दस साल से यह काम कर रहा है। वह गैंग के सदस्यों को दिल्ली का रहने वाला बताता था। वह सदस्य डिक्सन, वीटा, फ्रांसिस, स्टाइलिश, बैंशन के साथ गैंग संचालित करता है। गैंग का सरगना ही लोगों से फेसबुक पर युवती के नाम से दोस्ती करता है। खुद को अमेरिका में बसी होने का बताकर दोस्ती कर लेता है।
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वह वेबसाइट बनाने में माहिर हो गया। एक घंटे में वेबसाइट तैयार कर देता है। गूगल से स्पेस लेकर अपलोड करता है। इन वेबसाइट का नाम सरकारी संस्थाओं से मिलता जुलता रखा जाता था। जब लोग वेबसाइट पर खोज करते थे, तो फर्जी वेबसाइट पर क्लिक करते थे। गुडसटाइम ने पुलिस को बताया कि उसके देश में कई लोग हैकिंग करते हैं।
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सरगना की पहचान से अंजान हैं गैंग के सदस्य
गैंग का सरगना जॉन स्टेनले दस साल से यह काम कर रहा है। वह गैंग के सदस्यों को दिल्ली का रहने वाला बताता था। वह सदस्य डिक्सन, वीटा, फ्रांसिस, स्टाइलिश, बैंशन के साथ गैंग संचालित करता है। गैंग का सरगना ही लोगों से फेसबुक पर युवती के नाम से दोस्ती करता है। खुद को अमेरिका में बसी होने का बताकर दोस्ती कर लेता है।
पुलिस महानिरीक्षक आगरा की टीम
- फोटो : अमर उजाला
गैंग के सदस्य के संपर्क में फोन के माध्यम से रहता था। विदेशी व्हाट्सएप कॉल और मैसेज ही करता है। वह खाते में रकम होने की जानकारी फोन पर ही देता था। कभी मिलने नहीं आया। इसलिए पकड़े गए आरोपी भी उसकी पहचान के बारे में कुछ नहीं बता सके। जब कभी कैश में संडे रकम देने जाता था, तब भी
स्टेनले से मुलाकात नहीं होती थी। वह बैग में रकम रखकर चला आता था।
आरोपी तरुण यादव पूर्व में नाइजीरिया के फ्रांसिस और स्टाइलिश के साथ काम करता था। फ्रांसिस और स्टाइलिश कई साल तक रकम कमाने के बाद वापस अपने देश चले गए। जाते समय गैंग से संपर्क करा दिया। तब से संडे और तरुण स्टेनले के साथ काम कर रहा है। आरोपी जसपाल सब्जी व्यापारी है। अपने करंट खाते किराए पर देता था। तरुण बैंक खाते खुलवाता था। आरोप आसिफ के कहने पर जसपाल ने करन यादव को अपना खाता दिया था। इसमेें पीड़ित प्रताप सिंह की रकम जमा कराई।
किराये पर लेते हैं बैंक खाते
अकेला आरोपी संडे 50 करोड़ से अधिक की रकम अपने खाते में अपने देश में ट्रांसफर कर चुका है। लोगों से रकम जमा कराने के लिए खाते किराये पर लिए जाते हैं। जिन लोगों के खाते होते हैं, उन्हेें रकम में आठ प्रतिशत रकम दी जाती थी। आरोपी जसपाल आठ प्रतिशत लेता था। इसके अलावा तरुण धोखाधड़ी से मिली कुल रकम का सात प्रतिशत लेता था। वहीं संडे दस प्रतिशत हिस्सा लेता था। बाकी रकम को सरगना अपने खाते में जमा करा लेता था।
स्टेनले से मुलाकात नहीं होती थी। वह बैग में रकम रखकर चला आता था।
आरोपी तरुण यादव पूर्व में नाइजीरिया के फ्रांसिस और स्टाइलिश के साथ काम करता था। फ्रांसिस और स्टाइलिश कई साल तक रकम कमाने के बाद वापस अपने देश चले गए। जाते समय गैंग से संपर्क करा दिया। तब से संडे और तरुण स्टेनले के साथ काम कर रहा है। आरोपी जसपाल सब्जी व्यापारी है। अपने करंट खाते किराए पर देता था। तरुण बैंक खाते खुलवाता था। आरोप आसिफ के कहने पर जसपाल ने करन यादव को अपना खाता दिया था। इसमेें पीड़ित प्रताप सिंह की रकम जमा कराई।
किराये पर लेते हैं बैंक खाते
अकेला आरोपी संडे 50 करोड़ से अधिक की रकम अपने खाते में अपने देश में ट्रांसफर कर चुका है। लोगों से रकम जमा कराने के लिए खाते किराये पर लिए जाते हैं। जिन लोगों के खाते होते हैं, उन्हेें रकम में आठ प्रतिशत रकम दी जाती थी। आरोपी जसपाल आठ प्रतिशत लेता था। इसके अलावा तरुण धोखाधड़ी से मिली कुल रकम का सात प्रतिशत लेता था। वहीं संडे दस प्रतिशत हिस्सा लेता था। बाकी रकम को सरगना अपने खाते में जमा करा लेता था।
फिल्मी है गैंग के सदस्य तरुण की कहानी
पुलिस की पूछताछ में तरुण यादव से चौंकाने वाली जानकारी आई। तरुण यादव फ्रांसिस और स्टाइलिश से स्त्री के रूप में ही मिला था। तीन साल पहले उसने जेंडर बदलवा लिया। कृत्रिम पुरुष अंग लगाने लगा, ताकि लोग उसे पुरुष ही समझें। उसने एक नाबालिग किशोरी से शादी कर ली। मगर, वह उसकी हकीकत सामने आने के बाद छोड़कर चली गई।
बाद में एक युवती से और शादी कर ली। उससे आईवीएफ के माध्यम से एक बेटा भी पैदा किया। उसके पास से 14 पहचान पत्र मिले हैं। इनमें अलग-अलग पुरुष नाम लिखे हुए हैं। तरुण को पकड़ने के बाद पुलिस पसोपेश में थी कि उसे जनाना हवालात में रखें या पुरुष। बाद में डॉक्टर से मेडिकल कराने का निर्णय लिया। इसके बाद ही उसे हवालात में रखा जाएगा।
यह रही पुलिस टीम
निरीक्षक शैलेष कुमार सिंह, एसआई चेतन भारद्वाज, मोहित वर्मा, आशीष मलिक, एएसआई एम विशाल शर्मा, सिपाही इंद्रदेव, सुशील कुमार, जितेंद्र कुमार, नवीन प्रताप सिंह, पुष्पेंद्र कुमार, रवि मिश्रा, प्रवेश कुमार शर्मा, शैलेंद्र कुमार, शुभम, संजेश कुमार आदि रहे।
पुलिस की पूछताछ में तरुण यादव से चौंकाने वाली जानकारी आई। तरुण यादव फ्रांसिस और स्टाइलिश से स्त्री के रूप में ही मिला था। तीन साल पहले उसने जेंडर बदलवा लिया। कृत्रिम पुरुष अंग लगाने लगा, ताकि लोग उसे पुरुष ही समझें। उसने एक नाबालिग किशोरी से शादी कर ली। मगर, वह उसकी हकीकत सामने आने के बाद छोड़कर चली गई।
बाद में एक युवती से और शादी कर ली। उससे आईवीएफ के माध्यम से एक बेटा भी पैदा किया। उसके पास से 14 पहचान पत्र मिले हैं। इनमें अलग-अलग पुरुष नाम लिखे हुए हैं। तरुण को पकड़ने के बाद पुलिस पसोपेश में थी कि उसे जनाना हवालात में रखें या पुरुष। बाद में डॉक्टर से मेडिकल कराने का निर्णय लिया। इसके बाद ही उसे हवालात में रखा जाएगा।
यह रही पुलिस टीम
निरीक्षक शैलेष कुमार सिंह, एसआई चेतन भारद्वाज, मोहित वर्मा, आशीष मलिक, एएसआई एम विशाल शर्मा, सिपाही इंद्रदेव, सुशील कुमार, जितेंद्र कुमार, नवीन प्रताप सिंह, पुष्पेंद्र कुमार, रवि मिश्रा, प्रवेश कुमार शर्मा, शैलेंद्र कुमार, शुभम, संजेश कुमार आदि रहे।