नगर निगम पर लटकी है 25 करोड़ रुपये जुर्माने की तलवार, एनजीटी ने 29 नवंबर तक मांगी रिपोर्ट
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सॉलिड वेस्ट निस्तारण को लेकर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) में सुनवाई हुई। आगरा नगर निगम ने अपने बचाव में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने 29 नवंबर 2019 से पहले अपना पूरा प्रोजेक्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, 26 अप्रैल को हुई सुनवाई में एनजीटी ने 25 करोड़ रुपये के जुर्माने को माफ करने से मना कर दिया था। जिस पर निगम अधिकारियों ने फिर से जवाब दाखिल किया। जिसे 29 जुलाई को कोर्ट के समक्ष पेश किया, इसमें निगम अधिकारियों ने कहा है कि वो 31 दिसंबर 2019 तक शहर के सॉलिड वेस्ट का शत प्रतिशत निस्तारण कर देंगे।
एनजीटी ने निगम अधिकारियों की दलीलों को स्वीकार करते हुए साफ कर दिया है कि वो 29 नवंबर से पहले अपनी पूरी रिपोर्ट को पेश कर दें। उस रिपोर्ट में वो सभी तथ्य होने चाहिए, जिसके बारे में रिपोर्ट पेश की है।
वर्ष 1992 में की थी याचिका
पर्यावरणविद् व समाजसेवी डीके जोशी ने वर्ष 1992 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें पेयजल, सीवर, नाली निर्माण और सॉलिड वेस्ट निस्तारण में 500 करोड़ रुपये के घोटाले के साक्ष्य उपलब्ध कराए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मॉनीटरिंग कमेटी का गठन किया गया।
वर्ष 2017 में में सुप्रीम कोर्ट ने अपने यहां दायर केस को एनजीटी में स्थानांतरित कर दिया। फरवरी 2019 में एनजीटी ने नगर निगम पर 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाते हुए मुख्य सचिव को तलब किया था। इसी क्रम में नगर निगम अधिकारियों सॉलिड वेस्ट का शत-प्रतिशत निस्तारण को लेकर अपना जवाब एनजीटी में पेश किया है।
31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
14 अगस्त को होगी डूब क्षेत्र की सुनवाई
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में यमुना नदी के डूब क्षेत्र को लेकर भी सोमवार को सुनवाई हुई, जिसमें 14 अगस्त की तारीख मिली है। बताते चले कि यमुना किनारे बने 58 अवैध निर्माणों के अलावा 13 बड़े प्रोजेक्टों को लेकर एनजीटी में मामला विचाराधीन है। जिनमें पुष्पांजलि हाईट्स, कल्याणी हाइट्स, मंगलम एस्टेट एक्टेशन, तनिष्क राजश्री, राजश्री गार्डन, गणपति वंडर सिटी, जवाहर बाग, राधा बल्लभ स्कूल शामिल है।